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'हथियारों के बल पर...', जब संसद में खूब गरजे थे अटल बिहारी वाजपेयी, पाकिस्तान को दिया था दो टूक जवाब

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष माने जाते हैं. सफल राजनेता के साथ वह कवि और पत्रकार भी थे. विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर वैश्विक मंच पर हिंदी का मान बढ़ाया.

'हथियारों के बल पर...', जब संसद में खूब गरजे थे अटल बिहारी वाजपेयी, पाकिस्तान को दिया था दो टूक जवाब
Image Source: IANS
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Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: देश के पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी की आज पुण्यतिथि पर हर कोई उन्हें नमन कर रहा है. भारत की राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी की एक अलग ही पहचान थी. उनके संबंध जितने अपनी पार्टी के नेताओं से मधुर थे, उतने ही विपक्षी दलों के नेताओं के साथ भी अच्छे थे. उनका निधन 16 अगस्त 2018 को हुआ था. ऐसे में आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और राजनीतिक मसलों को सुलझाने की उनकी शैली आज भी हम सबके बीच जिंदा है. आइए, अपनी इस रिपोर्ट में हम पूर्व प्रधानमंत्री से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों को साझा करते हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति में एक शिखर पुरुष के तौर पर जाना जाता है. वह एक सफल राजनेता होने के साथ-साथ बेहतरीन कवि और पत्रकार भी थे. उनका जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था. भारतीय जनसंघ और साल 1980 में बीजेपी की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. राजनीति में उनकी बेहतरीन पकड़ के चलते सत्ताधारी दल (कांग्रेस) के शीर्ष नेता भी उन्हें पसंद करते थे. उन्हें 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री के तौर पर पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में जाने का मौका मिला. वहां उन्होंने भारत की तरफ से अपना भाषण हिंदी में दिया था, जिसने वैश्विक मंच पर हिंदी भाषा का मान बढ़ाया.

तीन बार बने भारत के प्रधानमंत्री 

अटल बिहारी वाजपेयी को अपने जीवनकाल में तीन बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था. पहली बार 16 मई 1996 से 1 जून 1996 तक, यानी केवल 13 दिनों के लिए, वह प्रधानमंत्री बने. दूसरी बार 19 मार्च 1998 से 13 अक्टूबर 1999 तक करीब 19 महीने तक वह प्रधानमंत्री रहे. तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 को जब वह प्रधानमंत्री बने, तो उनका कार्यकाल करीब पांच साल का रहा और उन्होंने 22 मई 2004 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली.

अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में दिया था तगड़ा भाषण 

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अटल बिहारी वाजपेयी अपनी राजनीति को सिर्फ पार्टी की सीमाओं तक रखने के बजाय राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते थे. उनकी यही सोच और प्रभावशाली भाषण शैली उन्हें विपक्षी दलों के बीच भी सम्मान दिलाती थी. 16 अगस्त 2018 को उनके निधन के बाद भी देश के लिए उनका योगदान और उनकी कविताएं लोगों के बीच उनकी याद को जीवंत बनाए हुए हैं. प्रधानमंत्री के तौर पर अटल जी ने पाकिस्तान को कई मौकों पर सख्त संदेश दिया था. संसद में दिए उनके भाषणों में पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका और चीन को भी परोक्ष रूप से कड़ा संदेश मिलता था. उनकी पुण्यतिथि पर आज हम आपको ऐसे ही एक चर्चित भाषण से रूबरू करा रहे हैं, जिसमें उन्होंने भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को लेकर बेहद स्पष्ट रुख रखा था. यह भाषण उस समय का है, जब कारगिल संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे थे. सीमा पार से लगातार हो रही आतंकवादी गतिविधियों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया था. ऐसे माहौल में संसद से अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों ने न सिर्फ पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी, बल्कि दुनिया के बड़े देशों को भी भारत के रुख का स्पष्ट संकेत दिया.

पाकिस्तान को दिया था दो टूक संदेश 

संसद के संबोधन में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी संसद में कहते हैं, 'हम पाकिस्तान… पाकिस्तान के सिलसिले में एक बात कहना चाहता हूं. अपने मन में से यह भ्रम निकाल दीजिए, अपने मन में से यह धारणा निकाल दें कि हम उन्हें खत्म करना चाहते हैं. पाकिस्तान बन गया, पाकिस्तान फले-फूले, सुखी रहे, समृद्ध रहे. पाकिस्तान भी उन्हीं समस्याओं से लड़ रहा है, जिन समस्याओं से हम लड़ रहे हैं. और इसलिए शांति का वातावरण चाहिए. हम वार्ता के लिए तैयार हैं. हम सभी पड़ोसियों से वार्ता के लिए तैयार हैं. हमारे राष्ट्रपति इन दिनों नेपाल गए हुए हैं. नेपाल के साथ भी हमारी समस्याएं हैं. नदी जल की समस्याएं हैं, लेकिन सारी समस्याएं बातचीत के द्वारा हल हो सकती हैं.'

जम्मू-कश्मीर पर दिया था पाकिस्तान को जवाब 

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अटल बिहारी वाजपेयी ने आगे कहा, 'लेकिन मैं पाकिस्तान के मित्रों से एक बात और कहना चाहूंगा. जम्मू-कश्मीर को हथियारों के बल पर हथियाने की  वो बात अपने मन में से निकाल दें. मैं ‘हथियारों के बल पर’ इस पर जोर दे रहा हूं. वार्ता करें. हमें वार्ता करने में कोई आपत्ति नहीं है. चर्चा करें. अगर काफी मामले हल नहीं होते तो छोड़ दें अभी. जो प्रश्न हल हो सकते हैं उनको ले लिया जाए. उन पर सहयोग बढ़े. इस भूखंड का वातावरण बदलना चाहिए. और कोई तीसरा इसमें दखल दे, इसके हम खिलाफ हैं और किसी तीसरे पक्ष को यहां आने की इजाजत नहीं है.'

बताते चलें कि अटल बिहारी वाजपेयी के ये शब्द आज भी उनकी दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व की झलक देते हैं. उन्होंने जहां पाकिस्तान को आतंक और हथियारों के रास्ते से दूर रहने का स्पष्ट संदेश दिया, वहीं बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने पर भी जोर दिया. यही वजह है कि अटल जी के भाषण आज भी भारतीय राजनीति और कूटनीति में एक खास जगह रखते हैं.

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