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'अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना है ना...', टेम्स नदी से NRI महिला का VIDEO वायरल, गणपति विसर्जन पर छिड़ी बहस

लंदन से वायरल एक वीडियो में NRI महिला नीलंजना हजारिका वर्मा ने टेम्स नदी की सफाई और सख्त नियमों का जिक्र करते हुए गणेश विसर्जन के बहाने आस्था और पर्यावरण जिम्मेदारी पर तंज कसा है.

'अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना है ना...', टेम्स नदी से NRI महिला का VIDEO वायरल, गणपति विसर्जन पर छिड़ी बहस
Image Source: Screengrab
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लंदन से सामने आए एक वीडियो ने भारतीय आस्था, परंपरा और पर्यावरण को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. दरअसल, NRI महिला नीलंजना हजारिका वर्मा ने टेम्स नदी के किनारे से एक वीडियो शेयर कर धार्मिक आस्था के नाम पर पर्यावरण के साथ लापरवाही बरतने पर सवाल उठाए हैं. उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है जो चर्चा का विषय बना हुआ है.

टेम्स नदी के किनारे से शेयर किया वीडियो

वीडियो में नीलंजना लंदन की टेम्स नदी के आसपास का साफ-सुथरा माहौल दिखाती नजर आती हैं. वह बताती हैं कि यहां नदी में तैरने और पक्षियों को दाना डालने तक को लेकर नियम लागू हैं. इसी संदर्भ में उन्होंने गणेश प्रतिमा के विसर्जन को लेकर व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल उठाया. उनकी बातों का मकसद यह बताना था कि आस्था के साथ उस देश के नियमों और पर्यावरण का सम्मान करना भी जरूरी है, जहां कोई धार्मिक आयोजन किया जा रहा है.

 
 
 
 
 
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की राय अलग-अलग नजर आई. कुछ लोगों ने नीलंजना की बात का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक परंपराओं को निभाते समय पर्यावरण और स्थानीय कानूनों का ध्यान रखना चाहिए. वहीं, कुछ यूजर्स ने विदेशों में भारतीय त्योहारों और धार्मिक परंपराओं को लेकर अलग राय रखी. एक अन्य यूज़र ने लिखा, 'प्रकृति के प्रति ज़िम्मेदारी के बिना की गई भक्ति अपना ही मकसद बेकार कर देती है.' इसी तरह एक दूसरे यूज़र ने लिखा 'अब इसे केरल में भी लागू किया जा रहा है। ऐसी प्रथाएं अपनाई जा रही हैं जो हमारी मूल संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं रही हैं; इनसे हमारी नदियां, जलाशय और महासागर प्रदूषित हो रहे हैं. भगवान के नाम का इस्तेमाल करके किया जा रहा यह काम असल में सिर्फ़ 'राजनीतिक हिंदू धर्म' है असली हिंदू धर्म का इससे कोई लेना-देना नहीं है.' इस तरह एक छोटा सा वीडियो आस्था, संस्कृति और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर बड़ी चर्चा में बदल गया. 

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नीलंजना ने दिया अपना स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बाद नीलंजना ने अपने कैप्शन के जरिए अपनी बात स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराएं बेहद खूबसूरत हैं और उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है. उनका जोर इस बात पर था कि विदेश में रहते हुए स्थानीय नियमों और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी निभाई जानी चाहिए.

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बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. आस्था अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन जिस प्रकृति और समाज के बीच हम रहते हैं, उसके प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है. यही संदेश इस वायरल वीडियो के जरिए सामने आता दिखाई दे रहा है.

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