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नौकरी छोड़ भारत घूमने आईं 2 विदेशी लड़कियां, वंदे भारत में सफर के बाद बोलीं- एक-एक पैसा वसूल!

लिथुआनिया की पर्यटक करिशा और क्रिस्टीना भारत घूमने आई हैं. दिल्ली और आगरा के बाद दोनों ने वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर किया. करिशा ने यात्रा को 'एक-एक पैसा वसूल' बताया, लेकिन स्टेशन पर सामान रखने और ट्रेन में चढ़ने की होड़ देखकर उन्हें फिल्म 'द हंगर गेम्स' की याद आ गई.

नौकरी छोड़ भारत घूमने आईं 2 विदेशी लड़कियां, वंदे भारत में सफर के बाद बोलीं- एक-एक पैसा वसूल!
Image Source: Screengrab
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भारत की संस्कृति, खूबसूरत नजारे और यहां की रेल यात्रा विदेशी पर्यटकों को हमेशा से आकर्षित करती रही है. इन दिनों लिथुआनिया की दो महिला पर्यटक करिशा (Karisha) और क्रिस्टीना (Kristina) भारत घूमने आई हैं. दोनों ने देश की खूबसूरती को करीब से देखने के लिए अपनी नौकरियां तक छोड़ दीं. दिल्ली और आगरा घूमने के बाद जब दोनों जम्मू-कश्मीर के सफर पर निकलीं, तो उन्होंने पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा की. इस सफर का अनुभव उनके लिए काफी यादगार रहा. करिशा ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए ट्रेन की तारीफ की, लेकिन स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ देखकर उन्हें हॉलीवुड फिल्म 'द हंगर गेम्स' की याद आ गई.

स्टेशन की भीड़ देखकर क्यों आई फिल्म की याद?

करिशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ट्रेन यात्रा के कई वीडियो साझा किए हैं. इनमें से एक वीडियो में रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ दिखाई देती है. ट्रेन में चढ़ने और सामान रखने के लिए जगह तलाशने के दौरान यात्रियों के बीच काफी आपाधापी नजर आई. इस स्थिति को देखकर करिशा ने मजाकिया अंदाज में इसकी तुलना फिल्म 'द हंगर गेम्स' से कर दी. उनके मुताबिक, ट्रेन में सामान रखने की जगह ढूंढना और सही तरीके से चढ़ना आसान नहीं था. हालांकि, शुरुआती परेशानी के बाद दोनों का करीब 10 घंटे का सफर काफी आरामदायक रहा. करिशा ने वंदे भारत के फर्स्ट एसी अनुभव को शानदार बताया और कहा कि इस यात्रा में खर्च किया गया पैसा पूरी तरह वसूल हो गया.

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नॉन-एसी ट्रेन के मुकाबले वंदे भारत क्यों पसंद आई?

करिशा ने अपने एक अन्य वीडियो में भारत की एसी और नॉन-एसी ट्रेनों के बीच अंतर पर भी बात की. उन्होंने बताया कि उनके अनुभव में दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था. उन्होंने लगभग 3 यूरो यानी करीब 250 से 300 रुपये के अंतर का जिक्र किया. करिशा ने कहा कि अगर उन्हें दोबारा इन दोनों विकल्पों में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो वह नॉन-एसी ट्रेन के बजाय वंदे भारत में सफर करना पसंद करेंगी. उन्हें इसमें सफर करना ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित महसूस हुआ. हालांकि, सुरक्षा का यह अनुभव उनका व्यक्तिगत नजरिया है, इसे सभी ट्रेनों की सुरक्षा की तुलना का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए.

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टॉयलेट की सफाई पसंद आई, लेकिन बदबू से हुई परेशानी

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वंदे भारत के सफर के दौरान करिशा ने ट्रेन के टॉयलेट का वीडियो भी साझा किया. उन्होंने वहां की सफाई की तारीफ की, लेकिन हल्की बदबू की शिकायत भी की. टॉयलेट के डिजाइन को देखकर वह हैरान रह गईं. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वहां बेसिन टॉयलेट सीट से भी बड़ा लग रहा था.

बहरहाल, करिशा और क्रिस्टीना करीब एक महीने के भारत दौरे पर हैं. उनकी यह यात्रा सोशल मीडिया पर चर्चा में है. उनका अनुभव बताता है कि विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की यात्रा सिर्फ खूबसूरत जगहों को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की रोजमर्रा की जिंदगी, रेलवे स्टेशन की भीड़ और रेल सुविधाएं भी उनके लिए यादगार अनुभव बन जाती हैं.

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