भारत ने खोजा नया अजित डोभाल! ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के दांत किए थे खट्टे, आखिर कौन है ये सेना का जनरल?
NSA अजित डोभाल के कामकाज और सक्रियता को देश सलाम करता है. ऐसे में भारत को उन्हीं के जैसे एक अधिकारी की खोज है. इसी दौरन एक शख्स की चर्चा खूब हो रही है, जो आने वाले समय में NSA डोभाल की जगह ले सकता है.
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चीनी राष्ट्रपति शी जीनपिंग के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन के दौरे पर पहुंचे और कई उच्च स्तरीय मुलाकातें कीं. उन्होंने इस दौरान भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास और प्रगति के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया.
इस दौरे में उनके साथ NSCS में मिलिट्री एडवाइज़र लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई भी मौजूद रहे. घई की इस हाई लेवल दौरे और मुलाक़ात में मौजूदगी ने विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरीके से उन्हें NSA डोभाल के साथ मोदी सरकार काम करा रही है, उन्हें विदेशी दौरे पर भेज रही है और जो जिम्मेदारी इसी साल उन्हें दी गई, वो काफी अहम हैं और उसमें काफी दूरगामी संदेश छिपे हैं.
इतना ही नहीं उन्होंने जिस तरीके से ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दो पदोन्निति और वो भी विभिन्न पदों पर की गई है, वो बताने के लिए काफी है कि आने वाले समय में उनका भारत की सुरक्षा और रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या रोल होने वाला है.
उन्हें भारत का अगला डोभाल भी कहा जा रहा है. कहा जा रहा कि मोदी सरकार ने अगला डोभाल खोज लिया है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि अजित डोभाल की उम्र हो चली है. वो 75+ हो चुके हैं. ऐसे में उनकी रिप्लेसमेंट आज ना कल खोजनी ही होगी. हालांकि उनका योगदान और कामकाज अतुलनीय है. उनकी बैकग्राउंड भी जनरल घई से भी अलग रही है. डोभाल IPS रहे हैं और वो रॉ में भी काम कर चुके हैं. इतना ही नहीं उन्हें पाकिस्तान में काम करने के साथ दूसरे कई खुफिया और रणनीतिक मिशनों में काम करने का अनुभव है.
वहीं राजीव घई भारत के मिलिट्री लैडर से आगे बढ़ते हुए भारत के मौजूदा डिप्टी आर्मी चीफ (रणनीति) के पद पर पहुंचे हैं. वो भारत के डीजीएमओ भी रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के वक्त उन्होंने पूरे अभियान की कमान संभाली. इतना ही नहीं उन्होंने रक्षा और इंटेलिजेंस, दोनों ही मोर्चे पर उन्होंने दुश्मनों को बखूबी जवाब दिया, उन्हें संभाला. इसी के बाद उन्हें प्रमोट कर डिप्टी आर्मी चीफ बनाया गया.
इसके बाद उन्हें सीधे NSA डोभाल का दायां बना दिया गया. उन्हें NSA के अंदर काम करने वाले NSCS में मिलिट्री एडवाइज़र बना दिया गया. यानी कि वो सरकार को सुरक्षा मामलों में रणनीतिक सलाह प्रदान करेंगे. इसके अलावा उनका राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सैन्य मामलों से संबंधित विशेषज्ञ परामर्श देना भी काम होगा. यानी कि पाकिस्तान के अलावा वो अब चीन के मामलों को भी प्रमुखता से देखेंगे और सरकार को सलाह देंगे.
ऐसे में जानना जरूरी है कि जिसे भारत का अगला अजित डोभाल कहा जा रहा है वो है कौन?
- लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई डिप्टी आर्मी चीफ (रणनीति) हैं.
- जून 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार बनाया गया.
- इस पद को संभालने वाले देश के पहले सेवारत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी.
- उन्होंने मौजूदा CDS जनरल एनएस राजा सुब्रमणी का स्थान लिया था.
- लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के DGMO भी रह चुके हैं, ऑपरेशन सिंदूर उन्हीं के नेतृत्व में हुआ.
- NSCS में मिलिट्री एडवाइजर का पद काफी अहम माना जाता है.
- सुरक्षा मामलों में सरकार को रणनीतिक सलाह प्रदान करने की जिम्मेदारी.
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सैन्य मामलों से संबंधित विशेषज्ञ परामर्श देना भी काम.
NSCS के सबसे अहम पद पर नियुक्त हुए लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई!
भारतीय सेना के उप प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में नया सैन्य सलाहकार नियुक्त किया गया है. इस नियुक्ति के साथ वह इस पद पर नियुक्त होने वाले देश के पहले सेवारत वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बन गए हैं. उनकी नियुक्ति को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई इससे पहले सैन्य संचालन महानिदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आए थे देश की नज़र में!
पिछले वर्ष चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने सैन्य अभियानों के संचालन और रणनीतिक समन्वय में अहम भूमिका निभाई थी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को अपना निशाना बनाया था. इस दौरान भारतीय सेनाओं ने कई आतंकवादियों को मार गिराया था. वर्तमान में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई सेना मुख्यालय में उप प्रमुख (रणनीति) के रूप में कार्यरत हैं.
उन्होंने इस पद पर जनरल एनएस राजा सुब्रमणी का स्थान लिया है. राजा सुब्रमणि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार रहने के बाद हाल ही में देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किए गए हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार का पद रक्षा और सुरक्षा मामलों में सरकार को रणनीतिक सलाह प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.
यह पद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को सैन्य मामलों से संबंधित विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराता है. विशेषज्ञों का मानना है कि लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश सैन्य आधुनिकीकरण, संयुक्त सैन्य संरचना और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सक्रिय सेवा में रहते हुए उनके व्यापक परिचालन और रणनीतिक अनुभव का लाभ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को मिलेगा.
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तब वह भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन थे. सेना द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद उन्हें सेना में नई जिम्मेदारी मिली. भारतीय सशस्त्र बलों के सफल अभियान के बाद उन्हें डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद पर पदोन्नत किया गया था.
जून 2025 मेंऑपरेशन सिंदूर के बाद लेफ्टिनेंट जनरल को मिली थी पदोन्नति
NSCS में आने से पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' में सफल भूमिका निभाने वाले भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को एक और पदोन्नति दी गई थी.
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को जून 2025 में भारतीय सेना का उप सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था. बतौर उप सेना प्रमुख वह रणनीति मामलों को देख रहे हैं.
National Security Advisor Ajit Doval held the 25th round of Special Representatives (SR) talks on the India-China boundary question with Chinese Foreign Minister Wang Yi in Beijing.
— DD India (@DDIndialive) August 25, 2026
During his visit, NSA Doval also called on Chinese Vice President Han Zheng to discuss… pic.twitter.com/aPr9zUTnQk
आपको बता दें कि डिप्टी आर्मी चीफ (रणनीति) भारतीय सेना में एक महत्वपूर्ण पद है. सेना के सभी ऑपरेशनल कार्यक्षेत्र, उप सेना प्रमुख (रणनीति) के कार्यालय को रिपोर्ट करते हैं. वहीं, भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य स्तर पर होने वाली बातचीत का नेतृत्व डीजीएमओ द्वारा किया जाता है.
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भारतीय सेना के डीजीएमओ रह चुके हैं लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई!
22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान में और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित विभिन्न आतंकवादी ठिकानों पर भारतीय सेना ने हमला किया था, जिसमें सौ से अधिक आतंकवादी मारे गए. पाकिस्तानी सेना ने इसके जवाब में भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमले किए, जिसका मुंह तोड़ जवाब भारतीय सेना ने दिया. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस व एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए. इसके बाद पाकिस्तान ने युद्ध विराम की मांग की.
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पाकिस्तानी सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया. दोनों के बीच यह वार्ता हॉटलाइन पर हुई थी. बीते महीने हुई इस वार्ता में पाकिस्तान ने कहा था कि वह सीमा पार से एक भी गोली नहीं चलाएगा. वार्ता में कहा गया कि दोनों पक्षों को एक भी गोली नहीं चलानी चाहिए. एक-दूसरे के खिलाफ कोई आक्रामक और शत्रुतापूर्ण कार्रवाई शुरू नहीं करनी चाहिए.