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RSS का कट्टर स्वयंसेवक, PM मोदी का भरोसेमंद, 5 बार के MP...आखिर कौन हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?

देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की प्रोफाइल को लेकर पूरे देश में चर्चा है. धर्मेंद्र प्रधान की तरह जोशी का भी संघ और विद्यार्थी परिषद से लंबा जुड़ाव रहा है. ऐसे में जानना जरूरी है कि जोशी का पूरा राजनीतिक और सामाजिक जीवन कैसा रहा है?

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26 Jul 2026
( Updated: 26 Jul 2026
10:36 AM )
RSS का कट्टर स्वयंसेवक, PM मोदी का भरोसेमंद, 5 बार के MP...आखिर कौन हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?
Prahlad Joshi/ Image Source: IANS
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शनिवार को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. यह घटनाक्रम परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध प्रदर्शनों के बीच हुआ है. राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से इस नियुक्ति की पुष्टि की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. यह स्वीकृति संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत की गई है.

इसी बीच, राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि वे खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री के रूप में अपना मौजूदा कार्यभार भी संभालते रहेंगे.

कितने पढ़े हैं देश के नए शिक्षा मंत्री?

जहां तक प्रह्लाद जोशी की शिक्षा-दीक्षा की बात है तो उन्होंने हुबली से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने धारवाड़ के कदाससिद्धेश्वर कला महाविद्यालय से बीए (आर्ट्स ग्रेजुएट) की पढ़ाई पूरी की. आपको बता दें कि यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध है. यहीं से उन्होंने 1983 में बीए की डिग्री प्राप्त की. कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना 1949 में हुई थी. ये उत्तरी कर्नाटक का एक प्रमुख विश्वविद्यालय है.

इसकी पहचान एक ऐसे ऐतिहासिक विश्वविद्यालयों से होती है जहां से पढ़कर कई राजनेता, सरकारी अधिकारी और अन्य प्रसिद्ध लोग देश के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़े हैं. जोशी ने अपने छात्र जीवन के दौरान सार्वजनिक मुद्दों, सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास में गहरी रुचि विकसित की और RSS-ABVP से जुड़क विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों में अपना योगदान दिया, 

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शिक्षा मंत्रालय की है बड़ी जिम्मेदारी!

देश के केंद्रीय विद्यालयों, विश्वविद्यालय, कॉलेजों, शिक्षा नीति, परीक्षा, टेक्स्टबुक, सहित अन्य विभिन्न मुद्दों के लिए जिम्मेदार शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालेंगे. इसके अलावा उनके उपर अब NEET में सुधार, NTA को ठीक करना, पेपर लीक रोकना और विभिन्न परीक्षाओं-संस्थाओं की शुचिता बहाली की जिम्मेदारी होगी.

प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बहाल करने से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को आगे बढ़ाने और उच्च शिक्षा सुधारों की देखरेख तक, उनके सामने आने वाली चुनौतियां प्रशासन से कहीं अधिक व्यापक है.

RSS के कट्टर स्वयंसेवक, पीएम मोदी के भरोसेमंद हैं प्रह्लाद जोशी

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पेपर लीक विवाद सहित अन्य मुद्दों के कारण पूरे देश में सुर्खियों के केंद्र में रहे शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने जा रहे प्रह्लाद जोशी को लेकर पूरे देश में चर्चा है कि आखिर देश का नया शिक्षा मंत्री है कौन जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने धर्मेंद्र प्रधान की जगह कमान सौंपी है. उनकी प्रोफाइल, पॉलिटिकल जर्नी, संघ और संगठन को लेकर लोगों में जानने की उत्सुकता है. आपको बता दें कि कर्नाटक के दिग्गज बीजेपी नेताओं में से एक प्रह्लाद जोशी को स्वभाव से शांत माना जाता है और प्रधानमंत्री के भरोसेमंद नेताओं में से करार दिया जाता है.

पांच बार के सांसद हैं प्रह्लाद जोशी, संगठन और सरकार का लंबा अनुभव!

आपको बताएं कि प्रह्लाद जोशी का पूरा नाम प्रह्लाद वेंकटेश जोशी है और उनका जन्म 27 नवंबर 1962 कर्नाटक के विजयपुर में हुआ था. 2004 में धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से पहला संसदीय चुनाव लड़ने वाले प्रह्लाद जोशी मौजूदा मोदी मंत्रिमंडल में संघ के कट्टर स्वयंसेवकों में से एक हैं और प्रधानमंत्री के सबसे करीबियों में से एक माना जाता है. वे 2014 से 2016 तक भारतीय जनता पार्टी (BJP), कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे. उन्होंने वक्फ़ सहित लोकसभा विभिन्न कमेटियों में भी काम किया.

वक्फ की कमेटी में भी काम करने का अनुभव, संघ के पुराने स्वयंसेवक!

प्रह्लाद जोशी अपने शुरुआती जीवन से ही संघ के स्वंसेवक रहे हैं. वो RSS के साथ तब चर्चा में आए जब उन्होंने 1992-1994 के दौरान कर्नाटक के हुबली में ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने का आंदोलन चलाया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार भी रखा था जिसमें उक्त मैदान का मालिकाना हक हुबली-धारवाड़ नगर निगम को वापस दिया गया था. वे 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में लोकसभा के लिए चुने गए. फिलहाल मोदी मंत्रिमंडल के सीनियर मंत्रियों में से एक हैं.

ईदगाह में झंडा फहराने और कश्मीर बचाओ आंदोलन का किया नेतृत्व

पेशे से उद्योगपति रहे प्रह्लाद जोशी ने 1992 से 1994 तक कर्नाटक के हुबली में ईदगाह मैदान (जिसे कित्तूर रानी चेन्नम्मा मैदान के नाम से भी जाना जाता है) में तिरंगा फहराने का आंदोलन आयोजित करके राजनीति में कदम रखा. उन्होंने उन वर्षों के दौरान "कश्मीर बचाओ आंदोलन" का भी नेतृत्व किया, जिसने उन्हें राज्य के उन इलाकों में एक जाना-माना चेहरा बना दिया. इसके बाद उन्हें धारवाड़ जिले में BJP का अध्यक्ष चुना गया. उन्होंने पहली बार 2004 में 14वीं लोकसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने INC के बी.एस. पाटिल को हराकर धारवाड़ निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की.

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विभिन्न मंत्रालयों की संभाली जिम्मेदारी

प्रह्लाद वेंकटेश जोशी ने कर्नाटक में ज़मीनी स्तर से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. उन्होंने 1995 से 1998 तक BJP के धारवाड़ ज़िला अध्यक्ष और फिर 1998 से 2003 तक महासचिव के तौर पर काम किया. 

2004 में 14वीं लोकसभा के लिए चुने जाने के साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा. संसदीय ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ, उन्होंने 2006 से 2013 तक BJP की कर्नाटक राज्य इकाई के महासचिव के तौर पर काम किया. साथ ही, उन्हें रसायन और उर्वरक, परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर बनी स्थायी समिति और वक्फ़ पर बनी संयुक्त संसदीय समिति में काम करने का अनुभव भी मिला. 

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2009 में वे दूसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए और रेलवे पर बनी स्थायी समिति और सदस्यों की अनुपस्थिति पर बनी समिति में काम किया. 2013 में उन्हें BJP की कर्नाटक राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 

मई 2014 में तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद, जोशी ने कई अहम विधायी ज़िम्मेदारियाँ संभालीं. इनमें अध्यक्षों के पैनल और कार्य सलाहकार समिति में काम करना, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर बनी स्थायी समिति के अध्यक्ष के तौर पर काम करना, और साथ ही आचार, सामान्य उद्देश्य और विशेषाधिकार समितियों की सदस्यता शामिल थी. 

मई 2019 में वे लगातार चौथी बार 17वीं लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए. उन्होंने मई 2024 तक संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालयों का कामकाज सफलतापूर्वक संभाला. 

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जून 2024 में 18वीं लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद, उन्होंने मोदी 3.0 सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर शपथ ली. अब उन्हें शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.

जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार 

आपको बता दें कि देश के कई हिस्सों में जोर पकड़ने वाले इन विरोध प्रदर्शनों ने मंत्रालय को गहन जन और राजनीतिक जांच के दायरे में ला दिया था. शनिवार को आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरभ दास ने छात्रों से विरोध प्रदर्शन समाप्त करने और घर लौटने का आग्रह किया.

ये भी पढ़ें: देश के अगले शिक्षा मंत्री होंगे प्रह्लाद जोशी, मोदी सरकार ने सौंपा अतिरिक्त प्रभार, धर्मेंद्र प्रधान की लेंगे जगह

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वरिष्ठ मंत्रिमंडल मंत्री प्रह्लाद जोशी अब खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारियों के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का भी कार्यभार संभालेंगे. अधिकारियों ने कहा कि दोहरी प्रभार व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षा मंत्रालय के कामकाज में बिना किसी बाधा के निरंतरता सुनिश्चित करना है.

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राष्ट्रपति के विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह परिवर्तन तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जिससे नई व्यवस्था बिना किसी देरी के प्रभावी हो सकेगी. प्रधानमंत्री की सलाह पर इस्तीफा स्वीकार करके और साथ ही अतिरिक्त प्रभार सौंपकर राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रधान के पद छोड़ने और प्रह्लाद जोशी के नेतृत्व में अंतरिम व्यवस्था को औपचारिक रूप दे दिया है. शिक्षा मंत्रालय के किसी भी दीर्घकालिक पुनर्गठन के संबंध में आगे की जानकारी उचित समय पर घोषित किए जाने की उम्मीद है.

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