ईरान-इजरायल जंग के बीच मोदी सरकार का वो फैसला जिससे ठप्प पड़ने से बच गई रेलवे, खाड़ी देशों की ब्लैकमेलिंग भी खत्म!
ईरान-इजरायल जंग के बीच भारतीय रेल ठप पड़ सकती थी. उसका चक्का जाम हो जाता, लेकिन पीएम मोदी ने रोक दिया. इतना ही नहीं रेलवे और देश के हजारों करोड़ रूपए बचाए और खाड़ी के देशों की ब्लैकमेलिंग से बचा लिया.
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ईरान-इजरायल जंग के बीच मोदी सरकार ने LPG और तेल संकट से निपटने के लिए बड़े ऐलान किए हैं. प्रधानमंत्री ने संसद में अपने संबोधन में जानकारी दी कि कैसे देश में उर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित और सुरक्षित करने के लिए कदम उठाए गए हैं. पीएम ने आगे कहा कि कैसे भारत तेल-गैसे के लिए खाड़ी के देशों पर निर्भर है. यानी कि इतने सालों और इतने प्रयासों के बावजूद देश अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है. यानी कि भारतीय लोगों की उर्जा की जरूरतें दूसरे देशों के हाथों में गिरवी थी, पहले देखा गया कि कैसे अपनी बात मनवाने के लिए ये GCC देशों ने इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया, ब्लैकमेलिंग टूल के तौर पर यूज किया.
हालांकि सरकार के प्रयासों से आज स्थिति बदल रही है. देश में उर्जा, खासकर गैस और डीजल की सबसे ज्यादा खपत होती थी. LPG आज भी इस्तेमाल हो रहा है. वहीं, रेलवे, जहां कि सबसे ज्यादा डीजल लोकोमोटिव में डीजल की खपत होती थी, लेकिन मोदी सरकार में बीते 11 सालों में जिस तरह रेलवे का इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया, उसने डीजल के इंपोर्ट को बहुत हद तक कम कर दिया.
देश अपनी जरूरत की 60% एलपीजी आयात करता है. इसकी सप्लाई में अनिश्चितता के कारण सरकार ने एलपीजी के डोमेस्टिक उपयोग को प्राथमिकता दी है. साथ ही एलपीजी के देश में ही उत्पादन को भी बढ़ाया जा रहा है. पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरे देश में सुचारू रूप से होती रहे, इस पर भी लगातार काम किया गया है.
अब सोचने वाली बात है कि अगर देश में रेलवे का इस तेजी से विद्युतीकरण नहीं किया गया होता तो सोचने वाली बात है कि ईरान-इजरायल जंग के बीच रेलवे का क्या होता. जहां घरेलू यूज के लिए तेल और गैस के लिए सरकार को जान लगानी पड़ रही है, ईरान से टॉप लेवल पर बात करनी पड़ रही है. वहां क्या होता, रेलवे का चक्का जाम हो जाता. डीजल लोकोमोटिव जहां की तहां खड़ी हो जातीं. पूरी इकोनोमी ठप्प पड़ जाती. लोगों की आवाजाही मुश्किल हो जाती, सड़के सूनी हो जातीं और माल ट्रेनों से ढुलाई मुश्किल हो जाती. महंगाई आसमान पर चली जाती और पूरे देश में हाहाकार मच जाता, लेकिन एक इलेक्ट्रिफिकेशन ने पूरे देश को और भारतीय रेल को चक्का जाम से बचा लिया.
आपको बताएं कि एनडीए सरकार (2014-2025) के दौरान 46,900 रेल किलोमीटर (RKM) का विद्युतीकरण हासिल किया. विद्युतीकरण की गति रिकॉर्ड स्तर तक तेज हुई, जिसके परिणामस्वरूप ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 100% कार्य पूरा हो गया. रेलवे ने ट्रेनों को चलाने के लिए डीजल से विद्युत ऊर्जा पर स्विच करके 6,000 करोड़ रुपये की बचत की है.
खाड़ी देशों पर से कैसे निर्भरता हुई कम!
- Ethanol के कारण हर वर्ष करीब 4.5 करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है. इससे 1.5 लाख करोड़ रुपए की बचत देश को हुई है.
- भारत में रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन 60 साल पहले शुरू हुआ.
- 2014 तक महज 20% ही इलेक्ट्रिफिकेशन हो पाया, लेकिन 2014 से 2025 तक 99% बिजलीकरण हुआ.
- इससे पहले रेलवे में हजारों डीजल इंजन चलते थे, जिसके कारण हजारों लीटर क्रूड ऑयल इंपोर्ट होते थे.
- इलेक्ट्रिफिकेशन के कारण रेलवे ने 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत की.
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटीजैसे कि मेट्रो, EV बस आदि पर चलाए गए.
- रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता आज 250GW तक हो गई.
- सोलर कैपेसिटी 130 GW तक.
- PM सूर्य घर योजना के तहत 30 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर लगाए.
- गोवर्धन स्कीम के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस पर जोर दे रही है, जिसके तहत 100 से अधिक प्लांट चालू, 600 से अधिक पर काम जारी!
भारत ने एनर्जी इंपोर्ट का किया डायवर्सिफिकेशन
प्रधानमंत्री मोदी ने इसी संबंध में संसद में कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बीते एक दशक में उठाए गए कदम और भी प्रासंगिक हो गए हैं. भारत ने बीते 11 वर्षों में अपनी एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन किया है. पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी जैसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था, वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट करता है.
तेल के स्टॉक को लेकर हुए बड़े काम!
उन्होंने तेल के भंडारण को लेकर कहा कि बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है. आज भारत के पास 53 लाख मेट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मेट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है. हमारी तेल कंपनियों के पास जो रिजर्व रहता है, वह अलग है. बीते 11 वर्षों में हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
संकट में काम आ रही सरकार की तैयारी!
संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी बहुत काम आ रही है. पिछले 10-11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्लेंडिंग पर अभूतपूर्वक काम हुआ है. एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक-डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी थी, आज हम पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं. इसके कारण प्रतिवर्ष करीब 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है.
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ऐसे ही रेलवे के बिजलीकरण से भी बहुत बड़ा फायदा हो रहा है. अगर रेलवे का इतना बिजलीकरण ना होता तो हर साल करीब 180 करोड़ लीटर डीजल अतिरिक्त लगता. ऐसे ही हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया है; 2014 में जहां देश में मेट्रो नेटवर्क 250 किलोमीटर से भी कम था, आज यह बढ़कर करीब 1100 किलोमीटर हो गया है. हमने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बहुत अधिक बल दिया. केंद्र सरकार ने राज्यों को 15,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए दी हैं. आज जिस स्केल पर वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा.
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