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मुनीर का 'क्रिप्टो-कार्ड', कैसे कभी अमेरिका में अछूत रहा पाकिस्तान बन गया खाड़ी जंग का मध्यस्थ, जवाब है ये शख्स!

अपने आतंकी इतिहास और हरकतों की वजह से कभी व्हाइट हाउस में अछूत माना जाने वाल पाकिस्तान खाड़ी जंग का मध्यस्थ बन गया. आखिर कैसे मुनीर ने एक 35 साल के शख्स को इस्तेमाल कर ट्रंप पहुंच बनाई. आखिर कैसे क्रिप्टो के जरिए पाकिस्तान ने जबरदस्त कूटनीतिक चाल चली?

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11 Apr 2026
( Updated: 11 Apr 2026
02:38 PM )
मुनीर का 'क्रिप्टो-कार्ड', कैसे कभी अमेरिका में अछूत रहा पाकिस्तान बन गया खाड़ी जंग का मध्यस्थ, जवाब है ये शख्स!
Asim Munir Meeting Trump / Bilal Bin Saqib (File Photo)
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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की शर्तों पर बातचीत के लिए ईरानी-अमेरिकी डेलिगेशन पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच चुका है और बातचीत शुरू हो गई है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. खबर के मुताबिक, अमेरिका की ओर से बात की कमान भले वेंस संभाल रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे की सारी बिसात ट्रंप के दोस्त और सलाहकार स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर ने बिछाई है.

वैसे तो बीते कई सालों से अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते ठीक नहीं रहे, लेकिन ट्रंप 2.0 में इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं. पाकिस्तान के फील्ड मार्शल की इसी वजह से व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ डिनर भी हो चुकी है, वहीं शहबाज शरीफ की भी ट्रंप से कई मुलाकातें हुई हैं. ये सारी चीजें इशारा करती हैं कि जिस पाकिस्तान और अमेरिका के बीच तल्खी थी, वो अचानक कैसे ठीक हो गई और ट्रंप ने खाड़ी जंग में पाकिस्तान को मध्यस्थ तक बना दिया. तो इसका जवाब साफ तौर पर निजी और व्यावसायिक संबंध हैं, जिसके बूते पाकिस्तान कूटनीतिक मास्टरी के दावे कर रहा है.

वो शख्स जिसने पाक-अमेरिका की पाटी खाई!

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद और वाशिंगटन को करीब लाना, इस्लामाबाद टॉक के लिए ट्रंप को राजी करना, मध्यस्थ बनाना... इसके पीछे एक शख्स का हाथ है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसी ने मुनीर, शहबाज, ट्रंप और वाशिंगटन के बीच में नजदीकियां बढ़ाई हैं. इतना ही नहीं, उसी के जरिए मुनीर अपनी बातें ट्रंप तक पहुंचा रहे हैं, जो सीधे-सीधे हितों के टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस्लामाबाद के प्रति ट्रंप की नरमी और इस सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका को संभव बनाने में जिस शख्स की भूमिका है, उसका नाम है बिलाल बिन साकिब.

क्रिप्टो ब्रो ने दिलाई मुनीर को व्हाइट हाउस में एंट्री

इस्लामाबाद के पॉलिटिकल सर्कल में इस युवा बिजनेसमैन की खूब चर्चा हो रही है. खुद को 'क्रिप्‍टो ब्रो' कहने वाले बिलाल इन दिनों पाकिस्तान और ट्रंप प्रशासन के बीच खाई को पाटकर, दोनों को करीब लाने में एक ब्रिज के तौर पर काम कर रहे हैं. वो पाकिस्तानी-ब्रिटिश उद्यमी बिलाल बिन साकिब 'पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल' (PCC) के सीईओ और ब्लॉकचेन पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक के रूप में कार्यरत हैं. इतना ही नहीं, साकिब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार के 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' में सलाहकार के तौर पर भी काम कर रहे हैं.

ट्रंप के व्यवहार को पाकिस्तान ने बनाया अपना हथियार!

अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन की मानें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निजी संबंधों को कूटनीतिक रिश्तों की जगह ज्यादा प्राथमिकता देते हैं. इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन में लेन-देन और व्यक्तिगत रिश्तों की बहुत अहमियत होती है. इस लिहाज से देखें तो मुनीर ने ट्रंप की इसी पर्सनल परसोना यानी कि रिझाना और रिश्तों वाले एंगल से एक्सप्लोर किया. पाकिस्तान ने समझ लिया कि ट्रंप फैमिली किस तरीके से क्रिप्टो बिजनेस में इंवॉल्व है. इसी को देखते हुए फौरन 'पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल' का गठन किया और बिलाल को सीईओ बना डाला.

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मुनीर ने ट्रंप तक पहुंचने के लिए कैसे क्रिप्टो को बनाया जरिया

'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' को लीड ट्रंप के दोस्त और दुनिया भर में बैकचैनल नेगोशिएशन को लीड करने वाले स्टीव विटकॉफ के बेटे जैक विटकॉफ कर रहे हैं. वो एक युवा उद्यमी हैं. इसी कंपनी में बिलाल भी एडवाइजर हैं. ट्रंप फैमिली ही 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' की प्रमोटर है. इस लिहाज से बिजनेस और कूटनीति का घालमेल है. कहा जा रहा है कि इसी कारण बिलाल के जरिए PCC की जैक की कंपनी से डील कराई गई और पाकिस्तान का पूरा क्रिप्टो धंधा अमेरिका और ट्रंप फैमिली को सौंप दिया गया.

बिलाल मुनीर के लिए सबसे बड़ा एंट्री गेट!

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इसी बिलाल-जैक के जरिए इस्लामाबाद ने स्टीव विटकॉफ तक पहुंच बनाई और फिर सीनियर विटकॉफ के जरिए ट्रंप तक. इसलिए तो गाजा पीस कॉन्फ्रेंस और शर्म अल शेख में भी शहबाज को बुलाया गया. पाकिस्तान के साथ आनन-फानन में रेअर अर्थ मिनरल को लेकर डील की गई. देखने वाली बात ये है कि किस हद तक पाकिस्तान बिलाल और क्रिप्टो के जरिए अपनी संबंध बहाली और ट्रंप को रिझाने की कोशिशें कर रहा है. ट्रंप और पाकिस्तान दोनों का व्यवहार एक जैसा है.

जहां तक मध्यस्थता की बात है, ट्रंप जानते हैं कि भारत, पाकिस्तान की तरह मध्यस्थता के झमेले में नहीं पड़ेगा और ना ही जी-हजूरी करेगा. इसके अलावा भारत व्यक्तिगत क्रेडिट देने-लेने के चक्कर में भी नहीं पड़ेगा, जो पाकिस्तान आसानी से करता आया है, यानी कि पोस्टमेन की भांति.

बिलाल की कैसे बज रही तूती!

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आपको बताएं कि इसी साल की शुरुआत में अमेरिकी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के सीईओ जैकरी विटकॉफ (स्टीव विटकॉफ के बेटे) का पाकिस्तान दौरा हुआ था, जिसे आयोजित करने में बिलाल ने ही अहम भूमिका निभाई थी. पाकिस्तान किस हद तक ट्रंप को रिझाने के लिए गिर सकता है, उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैक विटकॉफ के साथ सैन्य और कूटनीतिक हर लेवल के अधिकारी ने मुलाकात की, जो एक बिजनेस टूर की जगह राजनयिक दौरा ज्यादा लगी.

ट्रंप को साधने के लिए आसिम मुनीर का मास्टरस्ट्रोक!

यानी कि एक क्रिप्टो डीलिंग वाली मुलाकात में अगर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर जैसी शख्सियत शामिल हों, तो साफ समझ आता है कि पाक आर्मी बिलाल और बिटकॉइन को व्हाइट हाउस में एंट्री के तौर पर इस्तेमाल कर रही है. मुनीर अच्छे से जानते हैं कि ट्रंप का व्यक्तित्व कैसा है, इस लिहाज से उनसे बात वैसे ही की जा रही है जिससे कि उनके EGO को संतुष्टि मिले. उन्हें वही ऑफर किया जा रहा है जो उन्हें पसंद है.

टैरिफ वॉर और मिनरल्स: 

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जब चीन पर अमेरिका ने टैरिफ ठोका और बीजिंग ने रेअर अर्थ मिनरल की सप्लाई रोकी, तो पाकिस्तान ने तुरंत अपने यहां इसकी खोज के लिए ट्रंप को ऑफर दिया. मुनीर खुद एक मैनेजर की भांति सांकेतिक रेअर अर्थ मिनरल के पत्थर लेकर पहुंच गए.

क्रिप्टो लॉबी: 

उन्हें पता है कि ट्रंप की फैमिली का क्रिप्टो में मैसिव इन्वेस्टमेंट है, तो फौरन PCC बनाया, बिलाल को सीईओ बनाया और उसी के जरिए व्हाइट हाउस में एंट्री मारकर खाड़ी जंग में मध्यस्थ की भूमिका पा ली.

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पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल और ट्रंप फैमिली के बीच सांठगांठ!

डिसइन्फो लैब के अनुसार, अमेरिका पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत कर रहा है और ट्रंप परिवार के 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' और पाकिस्तान में सैन्य-संबंधित फंडों से जुड़े एक क्रिप्टोकरेंसी समझौते पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते साल जून में पाकिस्तान ने ब्लॉकचेन इन्फ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए ट्रंप फैमिली द्वारा प्रमोट की जाने वाली कंपनी के साथ एक MoU साइन किया था. प्रमोटर होने का मतलब है कि भले WLF विटकॉफ की कंपनी है, लेकिन इसमें ट्रंप फैमिली का भारी पैमाने पर पैसा लगा है. इसीलिए जानबूझकर ऐसे स्टेटमेंट्स दिए जाते हैं, जिससे क्रिप्टो और बिटकॉइन के जरिए पैसे बनाए जा सकें.

कौन हैं बिलाल बिन साकिब?

लाहौर में जन्मे बिलाल ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की. उन्होंने 'तयाबा' संस्था और 'वन मिलियन मील्स' अभियान से पहचान बनाई. जब पाकिस्तान ने ट्रंप के मनोविज्ञान को पढ़ा, तो साकिब को PCC का सीईओ, प्रधानमंत्री का विशेष सहायक और 'वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी' का चेयरमैन बना दिया गया. साकिब ने जैक विटकॉफ की कंपनी से समझौते करवाए और लास वेगास में बिटकॉइन कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें जेडी वेंस, एरिक ट्रंप और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर शामिल थे.

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विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अब क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग और निजी डीलिंग के जरिए अपने आर्थिक और कूटनीतिक परिवर्तन में एक नया मोड़ देख रहा है, जहाँ कूटनीति अब स्क्रीन और सिक्कों के जरिए तय हो रही है.

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