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भारत ने मार्को रुबियो के साथ किया कुछ ऐसा, पाकिस्तान भी करने लगा तारीफ, खुद पर हो गया शर्मिंदा, VIDEO वायरल

अमेरिकी विदेश मंत्री  मार्को रुबियो के दिल्ली दौरे के दौरान भारत ने कुछ ऐसा किया जिसकी पाकिस्तान में भी चर्चा हो रही है. सरकार के सख्त तेवर की गूंज इस्लामाबाद तक सुनाई दे रही है. वहीं अब अमेरिका कहने लगा है कि वो भारत की कीमत पर दूसरे देशों से संबंध नहीं बनाएगा.

भारत ने मार्को रुबियो के साथ किया कुछ ऐसा, पाकिस्तान भी करने लगा तारीफ, खुद पर हो गया शर्मिंदा, VIDEO वायरल
mage Credit: X/@DrSJaishankar
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खाड़ी में जारी जंग और होर्मुज स्ट्रेट पर बने तनाव के बीच अमेरिकी विदोश मंत्री मार्को रुबियो का भारत दौरा काफी सुर्खियों में है. ना सिर्फ रुबियो के दौरे की टाइमिंग बल्कि यहां जिस तरह भारत ने ट्रंप प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है उसकी गूंज वॉशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक सुनाई दे रही है. इसी कड़ी में भारत ने रुबियो के साथ कुछ ऐसा किया जिसकी पाकिस्तान में भी चर्चा हो रही है. पाकिस्तानी विश्लेषक तुलना कर रहे हैं कि कैसे भारत प्रोटोकॉल देता है और कैसे वो किसी अमेरिकी के उनके देश आने पर बिल्कुल बिछ जाते हैं. 

मसलन बीते दिनों जब इस्लामाबाद टॉक के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद आए थे तो उन्हें एयरपोर्ट पर लेने के मानो पूरा पाकिस्तान पहुंच गया था, जैसे कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, डिप्टी पीएम इशाक डार से लेकर पूरी फौज और सरकार पहुंच गई थी. वहीं जब रुबियो भारत आए तो भारत की ओर से सख्त कूटनीतिक संदेश दिया गया कि अमेरिका अपमी हद भूले और भारत को टेकन फॉर ग्रांटेड ना ले. इसलिए तो रुबियो के समकक्ष विदेश मंत्री एस जयशंकर उन्हें रिसीव करने नहीं पहुंचे. इसके कई कूटनीतिक मायने और ट्रंप प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी दर्ज कराने जैसा देखा जा रहा है.

क्या आनन-फानन में दिल्ली आए मार्को रुबियो?

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अब पाकिस्तान भी इसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है कि कैसे ट्रंप की अक्ल ठिकाने लग गई है. इसलिए तो भारत से संबंध सुधारने और पीएम मोदी से दोस्ती बढ़ाने को लेकर विदेश मंत्री मार्को रुबियो को आनन-फानन में दिल्ली भेेजा गया है. इसको लेकर बात करते हुए पाकिस्तान के दिग्गज पत्रकार और सेना और सरकार में गहरी पैठ रखने वाले नजम सेठी ने कहा कि तो अब बात यह है कि अमेरिका अब एहसास होने लगा है कि उसे अब भारत के साथ अपने रिश्ते सुधारने की ज़रूरत है. आखिर भारत एक बड़ा देश है और एक अहम देश भी है. और कुल मिलाकर, भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है.

भारत का पहले से ही अमेरिका के साथ एक बड़ा व्यापारिक रिश्ता है. भारत के नागरिक, पेशेवर, और भारतीय-अमेरिकी-ये सब मिलकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा बनाते हैं. यह एक बहुत बड़ा समूह है. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के प्रचार वगैरह में भी इनकी तरफ़ से काफ़ी फ़ंडिंग आती है. 

उन्होंने आगे कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप की यह कोशिश है कि भारत के साथ रिश्ते सुधारे जाएं. यह मत भूलिए कि इस संघर्ष में भारत हमारे (अमेरिका के) और इज़रायल के पक्ष में खड़ा है. इजरायल भारत की तारीफ कर रहा था, जबकि अमेरिका चुप बैठा था. अब ट्रंप इसे ही बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी सिलसिले में रुबियो को भारत दौरे पर भेजा गया है.

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ट्रंप ने रुबियों को क्यों भेजा, पाकिस्तानी ने बता दिया!"ट्रंप ने मार्को रुबियो को भेजा कि भाई जाओ थोड़े पीएम मोदी के पैर-वैर पड़ जाओ, उन्हें खुश करो, मसला बना हुआ है. इसलिए जैसे ही वो आया है, भारत ने उसे स्नब किया है. भारत ऐसा करता है...जयशंकर एयरपोर्ट पर रुबियो को लेने नहीं गए...कि देखो हम तुम से खुश नहीं हैं...हम भारत हैं...तुम ऐसा हमारे साथ बिहेव नहीं कर सकते...इसलिए तो विदेश मंत्रालय के एक लो-लेवल के अधिकारी को भेजा गया, जबकि प्रोटोकॉल के हिसाब से ऐसा नहीं होना चाहिए था... यह निश्चित रूप से प्रोटोकॉल के ख़िलाफ़ था. हां, यह एक तरह की अनदेखी ही थी. इस पर एंकर ने कहा कि वही तो देखिए कि हमारे यहां जेडी वेंस आए तो कौन-कौन गया था लेने और यहां कौन गया था लेने...". अब ये वीडियो सोशल मीडियो पर जमकर वायरल हो रहा है.

आपको बता दें कि अमेरिका और ईरान में चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा है. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच नजदीकियां देखने को मिलीं. इस बीच भारत दौरे पर आए अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश से हमारे संबंध भारत के साथ साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे.

भारत से संबंधों की कीमत पर दूसरे देशों से रिश्ते नहीं: रुबियो

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यूएस और दूसरे देशों के बीच संबंध और अमेरिका-भारत के बीच के संबंध को लेकर अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा, "जहां तक दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों का सवाल है, हम दुनियाभर के देशों के साथ अलग-अलग स्तरों पर सहयोग करते हैं और विभिन्न तरीकों से काम करते हैं. भारत भी यही करता है. जिम्मेदार देश इसी तरह अपने संबंध को आगे बढ़ाते हैं लेकिन मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ हमारे संबंधों को भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता, खासकर उन कारणों की वजह से जिनका मैंने पहले भी उल्लेख किया है."

ईरान के साथ जंग शुरू करने को लेकर क्या बोले रुबियो?

उन्होंने कहा कि युद्ध के सवाल पर मैं मिलिट्री टैक्टिक्स पर बात नहीं करने वाला हूं, सिर्फ इसलिए कि वह मेरा डिपार्टमेंट नहीं है. जब ईरान के साथ लड़ाई शुरू हुई, तो लक्ष्य तय थे और वे बहुत आसान थे. वे बहुत साफ थे. हम उनकी नेवी को खत्म करने वाले थे, जो हमने कर दिया है. हम उनकी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने की काबिलियत को काफी कम करने वाले थे, क्योंकि यही वो पारंपरिक ढाल थी जिसके पीछे वे छिपने की कोशिश कर रहे थे और हमने वो मकसद हासिल कर लिया है.

रुबियो ने कहा कि हम डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को नुकसान पहुंचाने वाले थे, ताकि ईरान इन सब चीजों को फिर से न बना सके. हमने वो भी हासिल कर लिया है. वो हमारे ऑपरेशन के टारगेट थे और उन्हीं पर टारगेट किया गया था. दूसरी तरफ, ईरान आतंकवादियों के प्रॉक्सी ग्रुप्स को स्पॉन्सर करना पसंद करता है और इन आतंकवादियों को इस बात की परवाह नहीं है कि वे क्या उड़ाते हैं. वे किसी भी चीज और हर किसी को उड़ा देते हैं. हम इन्हीं से निपट रहे हैं.

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अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा, "यह वह ईरान है जिसने कुछ समय पहले ही अपने हिज्बुल्लाह प्रॉक्सी के जरिए अर्जेंटीना में एक यहूदी सेंटर को उड़ा दिया था और बहुत से लोगों को मार डाला था. यह वह ईरान है जिसने सड़क किनारे बमों का इस्तेमाल करना शुरू किया, जिससे बहुत से लोग मारे गए और घायल हुए, जिनमें अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे. यह वह ईरान है जिसने पूरी दुनिया में लोगों की हत्याएं और हत्या की कोशिशें संगठन की हैं, जिनमें आम लोग, विरोधी लोग और वे लोग भी शामिल हैं जिनसे वे सहमत नहीं हैं."

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दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है जो ईरान से ज्यादा आतंकवाद को स्पॉन्सर करता हो और उन्होंने आतंकवाद को स्पॉन्सर करने और दुनिया भर में लोगों को टारगेट करने में लाखों-करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं और इसमें वे आम लोग भी शामिल हैं जो इसमें फंस गए हैं.

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