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ईरान को चोट लेकिन नुकसान भारत को… जिस चाबहार पोर्ट पर अमेरिका ने किया हमला वो इंडिया के लिए कितना जरूरी, जानें

चाबहार पोर्ट रणनीतिक लिहाज से भारत के लिए काफी अहम है. भारत ने ईरान में स्थित इस महत्वपूर्ण पोर्ट को विकसित करने में करीब 1000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है.

ईरान को चोट लेकिन नुकसान भारत को… जिस चाबहार पोर्ट पर अमेरिका ने किया हमला वो इंडिया के लिए कितना जरूरी, जानें
Image Source- IANS/X/@narendramodi
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Chabahar Port: अमेरिका ने ईरान के लिए ‘स्वर्ण द्वार’ माने जाने वाले चाबहार पोर्ट पर हमला किया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर तोड़ते हुए ईरान पर बड़ी स्ट्राइक की, जिसकी जद में भारत का मेगा प्रोजेक्ट चाबहार पोर्ट भी आ गया. 

चाबहार पोर्ट रणनीतिक लिहाज से भारत के लिए काफी अहम है. भारत ने ईरान में स्थित इस महत्वपूर्ण पोर्ट को विकसित करने में करीब 1000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है. जानते हैं आखिर चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमले ने भारत को कैसे बड़ी चोट दी? क्या है इसके मायने जानें. 

चाबहार पोर्ट क्या है? 

चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर, सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) पर स्थित ईरान का एकमात्र प्रमुख समुद्री (oceanic) बंदरगाह है. यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर स्थित है, जो इसे सामान्य रूप से बंदरगाहों से अलग और रणनीतिक रूप से सुरक्षित बनाता है.

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पोर्ट दो हिस्सों में बंटा है, शाहिद कालांतरि और शाहिद बेहेष्टी, यह गहरे पानी वाला बंदरगाह है और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से सिर्फ 170 किमी दूर है. यह ईरान के लिए ‘स्वर्ण द्वार’ (Golden Gate) माना जाता है क्योंकि यह अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों (तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान) तक पहुंच बनाता है. 

भारत के लिए चाबहार पोर्ट की अहमियत

चाबहार भारत की विदेश नीति और कनेक्टिविटी रणनीति का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. 

पाकिस्तान को बायपास: भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. कराची पोर्ट की तुलना में चाबहार अफगानिस्तान की सीमा से करीब 800 किमी करीब है. यह भारत-ईरान-रूस-मध्य एशिया-यूरोप को जोड़ने वाला बहु-मॉडल (समुद्र, रेल, सड़क) गलियारा है. इससे माल ढुलाई का लगभग 30 फीसदी समय और खर्च कम होता. 

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आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा: ईरान और मध्य एशिया के संसाधनों (तेल, गैस) तक पहुंच, व्यापार विस्तार और भारत के निर्यात के नए बाजार उपलब्ध करवाने में बड़ी भूमिका. 

रणनीतिक लिहाज से क्या हैं चाबहार पोर्ट के मायने? 

चीन-पाकिस्तान के CPEC और ग्वादर पोर्ट के जवाब में चाबहार पोर्ट भारत की मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है. भारत ने शाहिद बेहेष्टी टर्मिनल का संचालन 10 साल के लिए लिया है. यह मार्ग भारत की मानवीय पहल का मुख्य रास्ता है, जहां से अफगानिस्तान को गेहूं, दवाएं और अन्य सामग्री भेजी जाती है. 

अमेरिका के हमलों में चाबहार पोर्ट के मेरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर को भारी नुकसान पहुंचा है. जिसमें कुछ पियर्स (घाट), वेयरहाउस और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुए हैं. माना जा रहा है इससे 120 मिलियन निवेश वाला टर्मिनल भी प्रभावित हुआ है. हालांकि सटीक आंकड़े आना अभी भी बाकी हैं. 

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चाबहार पोर्ट एक तरह से भारत का वो बुनियादी प्रोजेक्ट है. जिसके जरिए देश ने पश्चिम और मध्य एशिया में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने और व्यापारिक दबदबा बढ़ाने का रणनीतिक केंद्र बनाया है. 

यह भी पढ़ें- आतंकवाद, साइबर, मैरीटाइम...40 साल बाद भारतीय PM का न्यूजीलैंड दौरा, 18 बड़े MoU...मोदी की चीन को उसके गढ़ में चुनौती!

चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी का यह कदम भारत की दशकों से चली आ रही मेहनत पर पानी फेर सकता है. भारत इस पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के सबसे मजबूत और मुख्य हिस्से के रूप में देखता है. हालांकि अभी पोर्ट पर कामकाज पहले की तरह से ही जारी है उसमें कोई रुकावट नहीं आई है. लेकिन कूटनीतिक और रणनीतिक मोर्चे पर इसे भारत के लिए बड़ी चोट माना जा रहा है. जो भारत की दशकों की मेहनत पर पानी फेर सकता है. 

भारत पर दबाव बनाने की अमेरिकी नीति 

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जानकार इसे अमेरिका की दबाव वाली नीति का हिस्सा भी मान रहे हैं. पिछले साल सितंबर में अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के संचालन में जुटे पक्षों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था. हालांकि बाद में इसमें 6 महीने की छूट दी थी. 

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