पूरी दुनिया में भारतीयों का डंका...भारत को लेकर इजरायल की सोच सबसे सकारात्मक, 71% इजरायली बोले-'इंडिया तुझे सलाम'
भारत को लेकर दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जिनकी सोच सबसे ज्यादा सकारात्मक है. वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक्स ने एक लिस्ट जारी की है, जिसमें उन देशों के नाम और प्रतिशत बताए गए हैं, जिनकी भारत को लेकर सोच सबसे ज्यादा सकारात्मक है.
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भारत सदियों से 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी की पूरा विश्व एक परिवार है की नीती और सोच पर चलता आया है. इसी कारण यहां के लोग हमेशा से, स्वभाव से सेवाभावी, वेलकमिंग और आत्मीय रहे हैं. भारत में मेहमान का दर्जा दिया जाता है. उन्हें ऐसा आदर सत्कार दिया जाता है कि जो यहां आता है, यहीं का होकर रह जाता है. हिंदुस्तान की संस्कृति, सभ्यता, खान-पान, संगीत लोगों को काफी आकर्षित करता है. ये सब सनातन धर्म में अतर्निहित है. दुनिया के कई देशी इसी वजह से भारत को अपना दूसरा घर मानते हैं.
इजरायलियों की सोच भारत के लिए सबसे सकारात्मक
इसी कारण भारत को लेकर दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जिनकी सोच सबसे ज्यादा सकारात्मक है. वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक्स ने एक लिस्ट जारी की है, जिसमें उन देशों के नाम और प्रतिशत बताए गए हैं, जिनकी भारत को लेकर सोच सबसे ज्यादा सकारात्मक है. इस लिस्ट में सबसे ऊपर इजरायल का नाम है. वहीं, भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने खुशी जताई है.
किस देश की भारत के प्रति सोच कितनी सकारात्मक?
'वर्ल्ड ऑफ स्टेटिक्स' ने प्यू रिसर्च सेंटर की 2023 की रिपोर्ट के आधार पर लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में सबसे पहले नाम इजरायल का है, जहां 71 फीसदी लोग भारत के लिए सकारात्मक सोच रखते हैं. इसके बाद दूसरा नाम ब्रिटेन का है, जहां 66 फीसदी लोग भारत के लिए सकारात्मक सोच रखते हैं. तीसरे स्थान पर 64 फीसदी के साथ केन्या और चौथे स्थान पर 60 फीसदी के साथ नाइजीरिया है. इसके अलावा पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया है. दक्षिण कोरिया में 58 फीसदी लोग भारत को लेकर पॉजिटिव सोच रखते हैं.
लिस्ट के अनुसार, भारत को लेकर जापान 55, ऑस्ट्रेलिया 52, इटली 52, अमेरिका 51, जर्मनी 47, कनाडा 47, पोलैंड 46, स्वीडन 46, इंडोनेशिया 45, मेक्सिको 42, नीदरलैंड 41, फ्रांस 39, हंगरी 34, स्पेन 34, ग्रीस 33, ब्राजील 33, दक्षिण अफ्रीका 28 और अर्जेंटीना 22 फीसदी सकारात्मक सोच रखते हैं. इस लिस्ट को रिपोस्ट कर इजरायली राजदूत रियूवेन अजार ने लिखा, "इजरायलियों को भारत से प्यार है."
भारत और इजरायल के बीच खास संबंध
दरअसल, भारत और इजरायल के बीच खास संबंध है. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एक-दूसरे का खुला समर्थन करते हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ में 14 मई 1948 को इजरायल को स्वतंत्र देश बनाने का प्रस्ताव आया था. शुरुआत में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन दो साल में ही 1950 में इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी. दोनों देशों के बीच 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए.
विभिन्न राय, लेकिन दोस्ती अटूट!
भारत फिलिस्तीन का समर्थन करता था. यही कारण है कि उसे इजरायल को मान्यता देने में इतना वक्त लगा. हालांकि, रक्षा के क्षेत्र में भारत और इजरायल के बीच की दोस्ती काफी पुरानी है. इजरायल ने ना केवल 1962 के भारत-चीन युद्ध में मोर्टार और मोर्टार रोधी डिवाइस दिए, बल्कि कारगिल युद्ध में भी इजरायल ने भारत को सैन्य मदद पहुंचाई.
PM मोदी ने पहली बार किया था इजरायल का दौरा
1950 में इसे स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के बाद पहली बार 2017 में भारत के प्रधानमंत्री ने इजरायल का दौरा किया. पीएम मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध में काफी मजबूती आई है. दोनों देशों के बीच के संबंध में काफी धीरे-धीरे विकास हुआ, लेकिन मोदी सरकार के नेतृत्व में इसमें काफी तेजी देखी गई.
भारत-इजरायल के मजबूत रणनीतिक संबंध
भारत और इजरायल रक्षा, कृषि, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापार के अहम साझेदार हैं. 2020 से लेकर 2024 तक दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में कई बड़ी साझेदारी हुई है. दोनों देश सांस्कृतिक तरीके से भी आपस में जुड़े हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में यहूदियों का आगमन लगभग दो हजार साल पहले हुआ था.
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उस समय से लेकर अब तक भारत में यहूदी शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं. इस बात से खुद इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी सहमति रखते हैं. उन्होंने हाल ही में कहा था कि भारत इकलौता ऐसा देश है, जहां बड़ी संख्या में यहूदी रहते हैं, लेकिन फिर भी कभी उनके उत्पीड़न की घटना सामने नहीं आई.
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