15 साल की उम्र में डकैतों ने किया था अगवा, 65 साल बाद परिवार से मिली ‘मिठनी’ तो पूरा गांव हुआ इमोशनल
80 साल की मिठनी के लिए गांव लौटना किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था. 65 साल का लंबा सफर, अपनों से बिछड़ने का दर्द, यातना और फिर साथी बना एक शख्स.
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर टोलवा आट गांव, जहां फरवरी की गाढ़ी धूप के साथ लोगों सुबह सामान्य सी ही शुरु हुई थी, लेकिन एक घटनाक्रम ने पूरे गांव को फिल्मी मोड़ दे दिया. टोलवा आट गांव ऐसे ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना जहां एक बेटी को 65 साल पहले डकैतों ने अगवा किया था, जो अब वापस लौटी तो पूरा गांव भावुक हो गया.
ये कहानी है 80 साल की मिठनी की. जिसके लिए गांव लौटना किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था. 65 साल का लंबा सफर, अपनों से बिछड़ने का दर्द, यातना और फिर साथी बना एक शख्स.
गौना होने से पहले उठा ले गए डकैत
ये बात है साल 1961-62 की. उस समय मिठनी महज 15 साल की थी. कुछ दिन पहले ही उसकी शादी हो गई थी, लेकिन गौना नहीं हुआ था. घर में गौने की तैयारी ही चल रही थी, लेकिन एक दिन गांव में सौ डकैतों ने हमला बोल दिया. डकैत बलदेव के घर में घुसे और जमकर गोलीबारी की, बलदेव के घर पर कुछ कीमती था तो उनकी बेटी मिठनी, जो बेहद सुंदर थी. जिस पर डकैतों की नजर पड़ चुकी थी. मिठनी के भाई और पिता को घायल करने के बाद डकैत मिठनी को अपने साथ अगवा कर ले गए.
जंगल-जंगल मिठानी को घुमाते रहे डकैत
एक 15 साल की बच्ची को डकैत जंगल में अपने साथ घुमाते, मारते-पीटते टॉर्चर करते. ये सब यहीं नहीं रूका, गिरोह के सरगना ने अलीगढ़ में मिठनी को किसी के पास बेच दिया. यहीं से मिठनी की जिंदगी 360 डिग्री घूम गई. एक ऐसा मोड़ आया जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. अलीगढ़ में मिठनी के बारे में यहां के दादों क्षेत्र के समेघा गांव के पहलवान सोहनलाल यादव को पता चला. सोहनलाल का इलाके में दबदबा और जान पहचान थी. सोहनलाल ने अपने साथियों की मदद से मिठनी को डकैतों के चंगुल से छुड़ाया. डकैतों के कब्जे में अपनी सुध बुध खो बैठी थी, लेकिन सोहनलाल मिठनी को काफी मानने लगे. उन्होंने उससे शादी कर ली. अब अलीगढ़ में ही मिठनी की गहृस्थी बस गई थी. मिठनी पांच बेटियों और तीन बेटों की मां है, लेकिन बचपन, मां-पिता, भाई गांव का घर सब कुछ जेहन में था. यादें धुंधली जरूर हुईं लेकिन मिटी नहीं.
गांव में बेटी और परिवार के साथ मिठनी
बेटी ने 65 बाद गांव पहुंचाया
मिठनी अक्सर अपने बच्चों को गांव की कहानियां और किस्सों के बारे में बताती थी. इन किस्सों में गांव का शिव मंदिर, मिठनी अपने दो भाई शिवलाल और सुबेदार का जिक्र जरूर करतीं. मिठनी की छोटी बेटी सीमा यादव, जो नोएडा में रहती हैं, अपनी मां के इस दर्द को समझती थी. सीमा ने मां को वापस उनके गांव और घरवालों से मिलवाने की ठानी. सीमा अपनी मां को लेकर अलीगढ़ से हरदोई पहुंचीं. गांव की जमीं पर कदम रखते ही मिठनी की धुंधली होती बूढ़ी आंखों में मानों चमक सी लौट आई. गांव का सकाहा मंदिर, जहां मेले का शोर, हंसी ठहाके और उत्सव के गीत गूंजते थे. मिठनी मानों जैसे वापस बचपन में लौट गई. आंखें भर आई, न केवल मिठनी भावुक हुई बल्कि पूरा गांव रोने लगा.
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मिठनी घर पहुंची तो पता चला उनके भाई इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन भाभियों और बाकी सदस्यों ने उन्हें पहचान लिया. उनके बच्चों ने भी दिल खोलकर स्वागत किया. मिठनी का 65 साल का इंतजार जब खत्म हुआ तो खुशी शब्दों से नहीं आंखों से छलकी. ये उस परिवार के लिए भी भावुक पल था, उन्होंने बेटी को गले लगाया. हरदोई के इस चमत्कारिक घटनाक्रम की चर्चा अब हर कहीं हो रही है.
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