'हम हिंदुस्तानी लोग हैं...', पाकिस्तान के चर्चित मौलाना ने तकरीर में क्यों कही ऐसी बात, वायरल हुआ VIDEO

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें मुफ्ती तारीक मसूद मजाकिया अंदाज में खुद को 'हिंदुस्तानी' बताते नजर आ रहे हैं. बिरयानी के मसाले को लेकर दिए गए इस हल्के बयान ने इंटरनेट पर पहचान और सरहद की बहस छेड़ दी है.

'हम हिंदुस्तानी लोग हैं...', पाकिस्तान के चर्चित मौलाना ने तकरीर में क्यों कही ऐसी बात, वायरल हुआ VIDEO
Mufti Tariq Masood (File Photo)

बिरयानी की एक प्लेट से उठी भाप ने इस बार सोशल मीडिया पर ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसकी खुशबू सरहद पार तक महसूस की जा रही है. पाकिस्तान के जाने-माने इस्लामी विद्वान मुफ्ती तारीक मसूद का एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह खुद को 'हिंदुस्तानी' बताते नजर आ रहे हैं. तक़रीर के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई उनकी बात सोशल मीडिया की दुनिया में यह एक बड़े विचार का कारण बन गया है.

वीडियो में मुफ्ती ने क्या कहा गया?

वायरल वीडियो में मुफ्ती तारीक मसूद बिरयानी का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं. वह बताते हैं कि उन्होंने एक होटल से बिरयानी मंगवाई थी. होटल प्रबंधन ने यह सोचकर कि मौलाना साहब शायद सादा भोजन पसंद करते होंगे, कम मसाले वाली या लगभग सफेद चावल जैसी बिरयानी भेज दी. इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'भाई हम हिंदुस्तानी लोग हैं, हमें मसालेदार बिरयानी पसंद है.' उनका यह वाक्य मजाक में कहा गया था, लेकिन यही लाइन अब चर्चा का केंद्र बन गई है.

बयान पर क्यों मचा बवाल?

जानकारी देते चलें कि मुफ्ती तारीक मसूद पाकिस्तान के नागरिक हैं और उनका जन्म भी वहीं हुआ है. ऐसे में उनका खुद को हिंदुस्तानी कहना कई लोगों को चौंकाने वाला लगा. हालांकि पूरे वीडियो को ध्यान से देखने पर साफ समझ आता है कि उन्होंने यह बात सांस्कृतिक संदर्भ में कही थी. यहां 'हिंदुस्तानी' शब्द का प्रयोग उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप की साझा खान-पान और मसालेदार स्वाद की परंपरा के संदर्भ में किया था, न कि किसी राजनीतिक पहचान के रूप में.

एक तरह का खान-पान 

दरअसल, भारत और पाकिस्तान का इतिहास भले 1947 के बाद अलग राजनीतिक दिशाओं में चला गया हो, लेकिन उससे पहले दोनों एक ही सांस्कृतिक भूगोल का हिस्सा थे. खाने-पीने की परंपराएं, मसालों का इस्तेमाल और कई व्यंजन आज भी दोनों देशों में लगभग समान जड़ें रखते हैं. बिरयानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. भारत में हैदराबादी, लखनऊई और कोलकाता की बिरयानी मशहूर है, तो पाकिस्तान में कराची और लाहौर की बिरयानी का अलग स्वाद पहचान रखता है. मसालों की खुशबू और तीखापन दोनों ओर के लोगों की पसंद में शामिल है.

सोशल मीडिया पर यूजर्स की आ रही प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ यूजर्स इसे मजाकिया और सहज बयान मान रहे हैं. उनका कहना है कि खाने और संस्कृति के मामले में सरहदें मायने नहीं रखतीं. वहीं कुछ लोग इसे भारत-पाकिस्तान रिश्तों के बड़े परिप्रेक्ष्य में भी जोड़कर देख रहे हैं. वीडियो को सबसे पहले '@islamallahquranbayanat' नाम के यूट्यूब अकाउंट से साझा किया गया था. इसके बाद यह अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गया. कई यूजर्स कमेंट सेक्शन में 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' लिख रहे हैं, तो कुछ लोग बिरयानी की तस्वीरें साझा कर अपने पसंदीदा स्वाद पर चर्चा कर रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर दिखा दिया है कि एक साधारण सा बयान भी डिजिटल दौर में बड़ी बहस का रूप ले सकता है.

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फिलहाल यह कहना गलत नहीं होगा कि बिरयानी की यह बहस राजनीति से ज्यादा संस्कृति और स्वाद की पहचान से जुड़ी है. मसालों की खुशबू ने एक बार फिर याद दिलाया है कि साझा इतिहास और खान-पान की परंपराएं आज भी लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं. सोशल मीडिया पर चल रही यह चर्चा भले कुछ दिनों में ठंडी पड़ जाए, लेकिन बिरयानी का स्वाद और उससे जुड़ी भावनाएं हमेशा की तरह लोगों के दिलों में गर्म ही रहेंगी.

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