आतंकवाद, साइबर, मैरीटाइम...40 साल बाद भारतीय PM का न्यूजीलैंड दौरा, 18 बड़े MoU...मोदी की चीन को उसके गढ़ में चुनौती!
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मैरीटाइम से लेकर आतंकवाद से निपटने और साइबर सुरक्षा पर गहरे सहयोग पर सहमति बनी है. इस दौरान उन क्षेत्रों में भी पार्टनरशिप बढ़ाने को लेकर समझौता हुआ है, जहां चीन का एकछत्र राज माना जाता रहा है.
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प्रधानमंत्री मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान मैरिटाइम से लेकर साइबर तक कई समझौते हुए, जिसने चीन की नींद उड़ा दी है. करीब 40 साल बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के पहले न्यूजीलैंड दौरे में करीब 18 समझौते हुए, जिसे सामरिक लिहाज से एतिहासिक माना जा रहा है. करीब 10 MoU और 8 बड़े ऐलानों के साथ ही दोनों देशों के रिश्तों को अब स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिल गया है.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए 18 बड़े समझौते!
आपको बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड ने शनिवार को आतंकवाद से लड़ने, साइबर-सिक्योरिटी बढ़ाने और दूसरी उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोग को गहरा करने के अपने साझा इरादे को फिर से दोहराया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके न्यूजीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन ग्लोबल शांति, सुरक्षा और लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय और बहुपक्षीय फोरम के जरिए ज्यादा जुड़ाव बनाने पर सहमत हुए. कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते इंडो पैसिफिक यानी कि एशिया प्रशांत में चीन के प्रभाव को नियंत्रित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे.
आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे भारत और न्यूजीलैंड
विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी भारत-न्यूजीलैंड के संयुक्त बयान में कहा गया, "दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद का मुकाबला करने, साइबर सुरक्षा और इससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संबंधित क्षेत्रीय व बहुपक्षीय मंचों पर संवाद और सहयोग सहित आपसी जुड़ाव को और मजबूत करने के अवसरों पर काम करने पर सहमति व्यक्त की."
बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने बॉर्डर पार आतंकवाद समेत आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की. दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल, 2025 को भारत के जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई आतंकी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि हमलों के दोषी लोगों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.
बयान में आगे कहा गया, “उन्होंने आतंकवाद के लिए जीरो-टॉलरेंस और एक जैसा नजरिया अपनाने की बात कही और आतंकवाद के फाइनेंसिंग नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने, ऑनलाइन समेत आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने और आतंकवाद के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की बात कही. दोनों नेता आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ से लड़ने में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए. नेताओं ने काउंटर-टेररिज्म पर एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी) बनाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया. यह जानकारी और ज्ञान शेयर करने के लिए एक फ्रेमवर्क देगा.”
क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म से मिलकर निपटेंगे भारत और न्यूजीलैंड
बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने गैर-कानूनी ड्रग तस्करी, वित्तीय अपराध, साइबर से जुड़े अपराध, आतंकवाद से जुड़े अपराध और लोगों की तस्करी समेत ट्रांसनेशनल और ऑर्गनाइज्ड अपराध से निपटने के लिए व्यावहारिक कानून प्रवर्तन सहयोग को मजबूत करने का वादा किया. इसमें आगे कहा गया, “वे भारत और न्यूजीलैंड की संबंधित एजेंसियों के बीच काउंटर-नारकोटिक्स सहयोग और कानून लागू करने में सहयोग पर व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द औपचारिक बनाने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए.”
भारत और न्यूजीलैंड की सेनाओं के बीच समझौता
आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच सबसे अहम समझौते रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर हुए हैं भारत और न्यूजीलैंड की सेनाएं अब समुद्री सुरक्षा, जानकारी साझा करने और संयुक्त अभ्यास के साथ-साथ विभिन्न मुद्दो पर मिल कर काम करेंगी. दोनों देशों ने समुद्र से जुड़े नक्शे और हाइड्रोग्राफी डेटा साझा करने पर भी सहमति जताई गई है. इससे समुद्री रास्तों की सुरक्षा और बेहतर होगी. एक और समझौते के तहत दोनों देशों की नौसेनाएं जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को लॉजिस्टिक सपोर्ट भी दे सकेंगी.
चीन के गढ़ में चुनौती देगा भारत!
हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में चीन की बढ़ती आक्रामकता और विस्तारवादी नीतियों के बीच, भारत और न्यूजीलैंड का यह नया रणनीतिक गठजोड़ एक बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है. रक्षा, मैरीटाइम सिक्योरिटी (समुद्री सुरक्षा) और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसे अहम मोर्चों पर दोनों देशों का साथ आना सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती नहीं है. रणनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक, यह इस पूरे रीजन में ड्रैगन के खिलाफ एक मजबूत 'स्ट्रैटेजिक बैलेंस' (शक्ति संतुलन) बनाने की दिशा में उठाया गया एक बेहद ठोस कदम है. इसके दूरगामी परिणाम होंगे— इससे न सिर्फ समंदर में सुरक्षा तंत्र और व्यापारिक मार्ग मजबूत होंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता भी सुनिश्चित की जा सकेगी.
मौजूदा स्थिति में परिप्रेक्ष्य में, जब चीन लगातार इस क्षेत्र (एशिया प्रशांत) में अपना कूटनीतिक और सैन्य प्रभाव बढ़ा रहा है, तब इन दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच यह समझौता 'बैलेंस ऑफ पावर' (Balance of Power) की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.
समुद्री सुरक्षा और व्यापार: यह समझौता प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (Sea Lanes of Communication) की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, जो निर्बाध वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत आवश्यक है.
रणनीतिक संतुलन (Strategic Balancing): लॉजिस्टिक सपोर्ट और रक्षा सहयोग से दोनों देशों की नौसेनाओं की रणनीतिक पहुँच (Strategic Reach) बढ़ेगी, जो चीन के बढ़ते प्रभुत्व को काउंटर करने में सक्षम होगी.
क्षेत्रीय स्थिरता: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक नियम-आधारित व्यवस्था (Rule-based order) स्थापित करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में यह कूटनीतिक साझेदारी एक मील का पत्थर साबित होगी.
This has been a great year for the India-New Zealand partnership. Earlier this year, our nations concluded a Free Trade Agreement in record time and now, we have elevated our ties to a Strategic Partnership. Next up, we wish to double bilateral trade by 2030! https://t.co/IyR5qpUt2X
— Narendra Modi (@narendramodi) July 11, 2026
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हिंद-प्रशांत को लेकर भी चर्चा!
पीएम मोदी और लक्सन ने हिंद-प्रशांत के लिए अपने-अपने तरीकों पर भी विचार साझा किए. इसके साथ ही एक आजाद, खुले, शांतिपूर्ण और खुशहाल हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जहां संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाता है और नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखा जाता है. कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर हुई बातचीत और शब्दावली का चयन सीधे तौर पर चीन को संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
Honoured to receive a ceremonial welcome at Government House in Auckland. The traditional Māori pōwhiri was a moving reflection of New Zealand’s rich heritage and traditions.@chrisluxonmp pic.twitter.com/6yhtmert9N
— Narendra Modi (@narendramodi) July 11, 2026
बयान में कहा गया, “उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर 1982 के समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुसार, नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की आजादी और समुद्र के दूसरे कानूनी इस्तेमाल की फिर से पुष्टि की. दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर यूएनसीएलओएस के अनुसार विवादों को शांति से सुलझाने की जरूरत पर फिर से जोर दिया. उन्होंने हिंद-प्रशांत में सुरक्षा और खुशहाली के लिए मिलकर काम करने की अहमियत पर जोर दिया.”
दोनों नेताओं ने आसियान के नेतृत्व वाले और दूसरे क्षेत्रीय फोरम में सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया, जिसमें ईस्ट एशिया समिट, आसियान रीजनल फोरम और आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग प्लस शामिल हैं. बयान के मुताबिक, उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका और हिंद-प्रशांत को लेकर आसियान के नजरिए के महत्व को फिर से दोहराया.
स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के लेवल पर पहुंचे भारत-न्यूजीलैंड के रिश्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके न्यूजीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को ऑकलैंड में बड़े स्तर पर बातचीत की. इस बातचीत में वे भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने पर सहमत हुए. साथ ही, वे व्यापार, रक्षा, शिक्षा, खेल और संस्कृति जैसे खास क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा भी करेंगे. दोनों नेताओं ने कई ज्ञापन समझौते (एमओयू) का आदान-प्रदान भी देखा, जिनका मकसद आपसी जुड़ाव को गहरा करना था.
बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने शुक्रवार शाम को एयरपोर्ट पर खुद आकर उनका स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री लक्सन को धन्यवाद दिया और इसे एक खास संकेत बताया, जो दोनों देशों के बीच संबंधों की गर्मजोशी को दिखाता है.
पीएम मोदी ने कहा, “कल रात, आपका मुझे लेने के लिए एयरपोर्ट आना एक बहुत ही खास संकेत था और मैं इसके लिए दिल से धन्यवाद देता हूं. आपके मंत्री पूरे समय मेरे साथ थे और मैं सच में इसकी सराहना करता हूं.”
उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात है कि 40 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड आया है. अपनी आर्थिक राजधानी में ये कार्यक्रम आयोजित करके, आपने एक नई रफ्तार पैदा की है और भारत-न्यूजीलैंड के संबंधों को नई मजबूती दी है. मैं आपका शुक्रगुजार हूं.” प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड के लोगों, खासकर भारतीय प्रवासियों के जोश भरे स्वागत और प्यार ने इस दौरे को खास तौर पर यादगार बना दिया है.
उन्होंने कहा, “यहां आकर और न्यूजीलैंड के लोगों का भारत के लिए प्यार देखकर कोई भी भावुक हो सकता है. यह सच में दिल को छू लेने वाला है. यह हमारे संबंधों के ऐतिहासिक पलों में से एक है, जो हमारी दोस्ती और आपसी संबंधों को नई रफ्तार और नई ऊर्जा देगा.” बातचीत के बाद, लक्सन ने दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी, खासकर प्रस्तावित भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर चल रही बातचीत पर जोर दिया.
क्या बोले न्यूजीलैंड के पीएम?
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पीएम लक्सन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “न्यूजीलैंड और भारत हिंद-प्रशांत को जोड़ते हैं, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए साथ काम करने में दूरी कोई रुकावट नहीं है. हम अपने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए यही कर रहे हैं, जिससे पहले दिन से ही भारत को बेची जाने वाली हमारी हर चीज पर 57 फीसदी टैरिफ खत्म हो जाएगा.” पीएम मोदी अपने तीन देशों के दौरे के आखिरी पड़ाव पर हैं, उनकी यह यात्रा 40 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा है.