दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में गूंजा 'ओम नमः शिवाय', PM मोदी ने की पूजा-अर्चना
इंडोनेशिया के एतिहासिक हिंदू मंदिर प्रम्बानन मंदिर का भारत के सहयोग से जीर्णोद्धार किया जाएगा. इससे पहले पीएम मोदी ने अपने इडोनेशिया दौरे के दौरान इस मंदिर में 'ओम नमः शिवाय' का जाप किया, जहां खुद राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो भी मौजूद थे.
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में प्रम्बानन मंदिर का प्रांगण 'ओम नमः शिवाय' के मंत्र से गुंजायमान हो गया. इंडोनेशिया के योग्यकार्ता स्थित 9वीं सदी के प्रम्बानन मंदिर में 'ओम नमः शिवाय' के दिव्य मंत्रोच्चार गूंजे. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 28 सेकंड की वीडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा, "इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय!"
इस क्लिप में अच्छी खासी संख्या में भक्तगण परिसर में जमीन पर बैठ, आंखें बंद कर, हाथ जोड़ दिव्य मंत्रोच्चार करते सुने जा सकते हैं. घंटे की ध्वनि भी सुनाई दे रही है. गेरुए रंग के परिधान में पीएम मोदी भी हाथ जोड़े खड़े हैं. आपको बता दें कि इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है, लेकिन उसने अब भी अपनी संस्कृति को सहेज कर रखी है. तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा के तीसरे और आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर पहुंचे.
इस दौरान दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के इतिहास एवं महत्व की जानकारी ली. इसके बाद पीएम ने मंदिर में पूजा-अर्चना की. मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई और उन्हें आशीर्वाद दिया.
मंदिर पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर प्रम्बानन मंदिर का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, "राजसी प्रम्बानन मंदिर!" प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की और लिखा, "राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता से प्रम्बानन मंदिर जाते हुए."
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर जाएंगे. यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है.
दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन (रिस्टोरेशन) परियोजना का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया. इसे दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रम्बानन मंदिर में की आरती
जकार्ता, 8 (आईएएनएस). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो ने बुधवार को योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया. इस दौरान दोनों नेताओं ने मंदिर परिसर का अवलोकन किया और प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के इतिहास एवं महत्व की जानकारी ली.
इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय! pic.twitter.com/AuHupT2vSO
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की. मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई और उन्हें आशीर्वाद दिया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर में मौजूद लोगों से भी मुलाकात की. दौरे के दौरान जमीन से लेकर आसमान तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.
मंदिर पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर प्रम्बानन मंदिर का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, "राजसी प्रम्बानन मंदिर!" प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की और लिखा, "राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता से प्रम्बानन मंदिर जाते हुए."
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर जाएंगे. यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है.
दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापन (रिस्टोरेशन) परियोजना का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया. इसे दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है.
7 जुलाई को भारत और इंडोनेशिया ने योग्याकार्ता स्थित प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए भारत समर्थित परियोजना से संबंधित आशय पत्र का आदान-प्रदान किया था. यह आदान-प्रदान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद हुआ, जिसमें दोनों नेताओं ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की.
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