एक-दूसरे पर नहीं करेंगे हमला, अमेरिका और ईरान में बन गई बात, हॉटलाइन स्थापित करने पर भी बनी सहमति
अमेरिका और ईरान फिलहाल एक दूसरे पर हमले रोकेंगे. अब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोहा में बातचीत होगी. रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम से ज्यादा अब होर्मुज की सुरक्षा पर विस्तार से बात होने की संभावना है.
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अमेरिका और ईरान के बीच एक दूसरे पर हमले रोकने पर बात बन गई है. अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान अभी के लिए आपसी हमले रोकने और होर्मुज स्ट्रेट पर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में बातचीत करने पर सहमत हो गए हैं. एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि दोनों पक्ष अभी के लिए पीछे हटेंगे और जहाज आसानी से आ-जा सकते हैं क्योंकि टेक्निकल बातचीत जारी रहने वाली है.
स्विट्जरलैंड की जगह अब दोहा में होगी अमेरिका-ईरान में बात
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, असल में स्विट्जरलैंड में मंगलवार की बातचीत होनी थी और इसका मुख्य मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम था. हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट में नए तनाव के कारण बातचीत को दोहा में शिफ्ट कर दिया गया. इससे रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग सुरक्षा को लेकर फोकस बढ़ गया है.
अमेरिकी मिलिट्री और ईरान के बीच हॉट लाइन स्थापित करने पर सहमति
एक हफ्ते पहले स्विट्जरलैंड में बातचीत के दौरान, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान के साथ इस बात पर सहमत हुआ कि वह अमेरिकी मिलिट्री और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स के बीच स्ट्रेट में ट्रैफिक को कोऑर्डिनेट करने के लिए एक हॉटलाइन बनाएगा.
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तक हॉटलाइन अभी भी चालू नहीं थी. अमेरिका ने शुक्रवार और शनिवार को ईरानी ठिकानों पर हमले किए, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ईरान के लगातार हमले का हवाला दिया गया. ईरान ने इस इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करके जवाब दिया.
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के पास एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर हमला कर सीजफायर समझौते का फिर से उल्लंघन किया है. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए. ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे, तो इस्लामिक रिपब्लिक का अस्तित्व नहीं बचेगा.
ट्रंप के हमले के एक दिन बाद बनी सहमति!
दरअसल, ईरान ने कथित तौर पर एक तरफा ड्रोन हमला किया, जिसने सुबह 4:30 बजे ईटी पर पनामा के झंडे वाले टैंकर एम/टी किकू को निशाना बनाया. इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने कहा कि ये स्ट्राइक राष्ट्रपति के कहने पर किए गए थे.
टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के पास से गुजर रहा था और उसमें दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल था. ट्रूथ सोशल पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, “अमेरिका के एयरक्राफ्ट ने अभी-अभी सीजफायर एग्रीमेंट का उल्लंघन करने के लिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज जगहों, और तटीय रडार साइट्स पर हमला किया है, फिर से! यह बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे!”
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राष्ट्रपति ने लिखा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम नहीं कर पाएंगे और हमें उस काम को मिलिट्री से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था. अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का वजूद खत्म हो जाएगा!” अमेरिकी सैन्य कमांड ने कहा कि एम/वी एवर लवली पर हमले के जवाब में शुक्रवार को अमेरिका के हमलों के बाद ईरान को सीजफायर मानने का मौका दिया गया था.