अमेरिका-ईरान समझौता लागू, होर्मुज स्ट्रेट में फिर लौटी रौनक; क्या अब सचमुच खत्म हो गया तनाव?
अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौता लागू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है और तेल की कीमतों में गिरावट आई है. हालांकि लेबनान में जारी संघर्ष के बीच इस समझौते की दीर्घकालिक सफलता को लेकर सवाल बने हुए हैं.
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करीब चार महीने तक चले संघर्ष और तनाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता अब लागू हो चुका है. इस समझौते के प्रभाव भी दिखाई देने लगे हैं. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है, जबकि अमेरिका ने भी ईरान पर लगाया गया नेवल ब्लॉकेड हटा लिया है. इसका असर वैश्विक बाजारों में भी देखने को मिला, जहां तेल की कीमतें युद्ध शुरू होने के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं.
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है. युद्ध के दौरान यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई देशों को ऊर्जा संकट की चिंता सताने लगी थी. अब समझौते के लागू होने के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में तेल और गैस का व्यापार सामान्य स्थिति में लौट सकता है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद भी बढ़ गई है.
ट्रंप पर बढ़ रहा राजनीतिक दबाव
समझौते ने युद्ध को फिलहाल रोक दिया है, लेकिन अमेरिका के भीतर इस पर राजनीति भी तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. आलोचकों का कहना है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका ने ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं. दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने दावा किया है कि यह समझौता अमेरिका की मजबूरी का परिणाम है. उन्होंने साफ संकेत दिया कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की बातचीत आसान नहीं रहने वाली.
60 दिनों में होगा बड़ा फैसला
समझौते के तहत दोनों देशों को अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी समाधान निकालने की कोशिश करनी होगी. इस अंतरिम डील में ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड और अन्य आर्थिक सहायता का भी प्रावधान रखा गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि भविष्य की वार्ताओं में ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा. ऐसे में आने वाले दो महीने दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हुआ है, लेकिन मध्य पूर्व पूरी तरह शांत नहीं हुआ है. लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है और हाल के दिनों में नए हवाई हमलों की खबरें भी सामने आई हैं.
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बताते चलें कि इसी बीच ईरान ने घोषणा की है कि अगले 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही उसके नियंत्रण में रहेगी. हालांकि उसने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दौरान किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. फिलहाल यह समझौता दुनिया के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन इसकी असली सफलता आने वाले 60 दिनों की वार्ताओं और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह शांति स्थायी रूप ले पाएगी या फिर तनाव एक बार फिर लौटेगा.