×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

नेपाल में फिर गरमाई सियासत, बालेन शाह के फैसले पर जेन-जी का बड़ा प्रदर्शन

Nepal Protest: नेपाल में बालेन शाह के विरोध में रविवार को काठमांडू के मैतीघर मंडला में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि जिन परिवारों के पास पहले से रहने की कोई जगह नहीं है, उन्हें बिना कोई दूसरा इंतजाम किए हटाना इंसानियत के खिलाफ है.

Author
13 Jul 2026
( Updated: 13 Jul 2026
10:45 AM )
नेपाल में फिर गरमाई सियासत, बालेन शाह के फैसले पर जेन-जी का बड़ा प्रदर्शन
Image Source: Instagram-Balen Shah/ Meta AI/ Representative Image
Advertisement

Nepal Protest: नेपाल में एक साल बाद फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. इस बार लोगों का गुस्सा प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के खिलाफ हैं. सरकार ने भूमिहीन झुग्गीवासियों को वैकल्पिक और स्थायी पुनर्वास दिए बिना अस्थायी आवास केंद्र खाली कराने का फैसला लिया,जिससे सैकड़ो लोग नाराज हो गए. इसी के विरोध में रविवार को काठमांडू के मैतीघर मंडला में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि जिन परिवारों के पास पहले से रहने की कोई जगह नहीं है, उन्हें बिना कोई दूसरा इंतजाम किए हटाना इंसानियत के खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से गरीबों के अधिकारों की रक्षा करने, मानवाधिकारों का सम्मान करने और भूमिहीन लोगों को सुरक्षित आश्रय देने की मांग की.

बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें, मदद के लिए पहुंचे युवाओं पर भी हुई कार्रवाई

इस विवाद के बीच शुक्रवार रात काठमांडू के कीर्तिपुर स्थित एक सरकारी अस्थायी आवास केंद्र में बाढ़ का पानी भर गया. वहा रह रह करीब 150 लोगों को सुरक्षाबलों की मदद से सुरक्षित जगह पहुंचाया गया. अगले दिन जब जेन-जी आंदोलन से जुड़े कुछ युवा वहां हालात देखने और लोगों की मदद करने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया. आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई युवाओं को हिरासत में ले लिया. एक कार्यकर्ता के चेहरे पर गंभीर चोट भी आई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इस घटना के बाद सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे और कई नेताओं ने गिरफ्तार युवाओं को तुरंत रिहा करने की मांग की.

Advertisement

पहले भी हजारों परिवार हुए थे बेघर

यह मामला सिर्फ हाल के दिनों का नहीं है. इसी साल अप्रैल में सरकार ने काठमांडू घाटी और नेपाल के दूसरे इलाकों में बनी कई झुग्गियों और अस्थायी बस्तियों को हटाने की कार्रवाई की थी. इस अभियान से करीब 2,600 परिवारों के 15 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे. इनमें से कुछ परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में रखा गया, लेकिन सरकार ने बाद में उन्हें भी खाली करने का आदेश दे दिया. अब जिन लोगों के पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है, वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और इसी वजह से विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है.

Advertisement

क्या था जेन-जी आंदोलन, जिसने बदल दी नेपाल की राजनीति?

नेपाल का जेन-जी आंदोलन साल 2025 में शुरू हुआ था और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया. शुरुआत सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे इसमें भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भाई-भतीजावाद और राजनीतिक व्यवस्था से नाराज युवा भी जुड़ते चले गए. हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और कई जगह प्रदर्शन हिंसक भी हो गए. सरकारी इमारतों में आगजनी हुई, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और कई लोगों की जान भी चली गई. जनता का दबाव इतना बढ़ गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा. इसके बाद अंतरिम सरकार बनी और देश में नए चुनाव कराने का फैसला लिया गया.

आंदोलन का चेहरा बने बालेन शाह, लेकिन अब उन्हीं से नाराज हैं लोग

Advertisement

जेन-जी आंदोलन के दौरान बालेन शाह युवाओं के बीच एक मजबूत और ईमानदार चेहरे के रूप में उभरे. भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी साफ छवि और पारंपरिक राजनीति से अलग सोच ने उन्हें लोगों का भरपूर समर्थन दिलाया. इसी समर्थन की बदौलत मार्च 2026 के आम चुनाव में उनकी पार्टी ने शानदार जीत हासिल की और 27 मार्च 2026 को बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री बने. लोगो को उम्मीद थी कि नई सरकार आम जनता की परेशानियों को प्राथमिकता देगी और बड़े बदलाव करेगी.

Bangkok Fire: जश्न के बीच मौत का तांडव, धमाके के बाद पब में लगी आग, 27 लोगों की गई जान

अब जनता पूछ रही है वही सवाल, जिनके जवाब कभी उसने खुद मांगे थे

यह भी पढ़ें

सत्ता में आने के कुछ ही समय बाद बालेन शाह की सरकार को भी उसी तरह के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जैसा कभी पिछली सरकारों को करना पड़ा था. भूमिहीन लोगों को लेकर लिए गए फैसलों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई ने कई लोगों को निराश किया है. खास बात यह है कि जिन युवाओं ने कभी बदलाव की उम्मीद में बालेन शाह का समर्थन किया था, आज उन्हीं में से कई लोग उनकी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें