क्या ब्रिटेन को मिलने वाला है 5 साल में 5वां PM? कीर स्टार्मर के इस्तीफे की अटकलों से मची हलचल
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि सरकार के भीतर बढ़ते राजनीतिक दबाव और आंतरिक मतभेदों के चलते उन्होंने यह फैसला लिया है.
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ब्रिटेन की राजनीति इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है. कभी राजनीतिक स्थिरता का उदाहरण माने जाने वाले इस देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान नेतृत्व परिवर्तन का सिलसिला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है. अब एक नई रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. ब्रिटिश मीडिया में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर सकते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो ब्रिटेन पिछले पांच वर्षों में अपना पांचवां प्रधानमंत्री देख सकता है. यही वजह है कि इस घटनाक्रम की तुलना कई लोग पाकिस्तान की राजनीति से भी कर रहे हैं, जहां अक्सर प्रधानमंत्री अपना पूरा कार्यकाल नहीं कर पाते हैं.
सरकार के भीतर बढ़ा दबाव
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले कुछ समय से सरकार के भीतर राजनीतिक दबाव और मतभेद लगातार बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि कीर स्टार्मर ने हाल के दिनों में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों, राजनीतिक सलाहकारों, लेबर पार्टी से जुड़े प्रमुख सहयोगियों और ट्रेड यूनियन नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की है. इन बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हुई कि मौजूदा हालात में उनके लिए नेतृत्व जारी रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
गिरती लोकप्रियता बनी चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार की लोकप्रियता में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. लेबर पार्टी के भीतर भी कुछ नेताओं ने भविष्य की रणनीति को लेकर चिंता जताई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी सरकार को बड़े सुधार लागू करने के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता, तो नेतृत्व पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक हो जाता है. इसी वजह से पार्टी के भीतर संभावित सत्ता हस्तांतरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता से बचना चाहता है.
नया प्रधानमंत्री कैसे चुना जाएगा?
यदि कीर स्टार्मर इस्तीफा देते हैं, तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए नेता के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रह सकते हैं. इसके बाद लेबर पार्टी की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी नेतृत्व चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी. इस प्रक्रिया में नामांकन, प्रचार और मतदान के बाद नए नेता का चयन किया जाएगा. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव केवल नए प्रधानमंत्री का फैसला नहीं करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में लेबर पार्टी की दिशा और ब्रिटेन की राजनीति पर भी बड़ा असर डालेगा.
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बहरहाल, पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. यदि इस्तीफे की अटकलें सही साबित होती हैं, तो ब्रिटेन की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर सकती है. ऐसे में सोमवार का दिन देश की राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.