ट्रंप के टैरिफ पर अपने ही देश में घमासान, 25 राज्यों ने सरकार पर ठोका मुकदमा
US: अमेरिका के 25 राज्यों ने मिलकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है. इन राज्यों का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को नजरअंदाज कर रही है और बिना कानूनी अधिकार के नया टैरिफ लागू कर रही है.
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US: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर अब उनके अपने ही देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ट्रंप सरकार ने कई देशों से आने वाले सामान पर नया सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाया है, लेकिन इस फैसले का विरोध सिर्फ दूसरे देशों तक सीमित नहीं है. अमेरिका के 25 राज्यों ने मिलकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है. इन राज्यों का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को नजरअंदाज कर रही है और बिना कानूनी अधिकार के नया टैरिफ लागू कर रही है. उनका आरोप है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर आम लोगों, छोटे कारोबारियों और व्यापार से जुड़े लोगों पर पड़ेगा..
कई देशों पर लगाया गया नया टैरिफ
हाल ही में अमेरिका ने यूरोपीय संघ समेत 59 देशों से आने वाले सामान पर दो अंकों वाला नया टैरिफ लागू किया. ट्रंप सरकार का कहना है कि इन देशों ने अपने यहां बंधुआ मजदूरी से बनने वाले सामान के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए. इसी वजह से अमेरिका ने इन देशों के सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का फैसला किया. सरकार का मानना है कि इससे अमेरिकी उद्योगों और वहां के मजदूरों के हितों की रक्षा होगी.
25 राज्यों का आरोप- सरकार कानून की अनदेखी कर रही है
इस पूरे मामले में 25 राज्यों ने अदालत में याचिका दाखिल की है. मुकदमे की अगुवाई न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स कर रही हैं. उनका कहना है कि सरकार पहले भी इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट से हार चुकी है, लेकिन अब उसने दूसरे कानून का सहारा लेकर फिर से वही काम शुरू कर दिया है. उनके मुताबिक, नए टैरिफ के जरिए आम परिवारों और कारोबारियों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाला जा रहा है, जो कानूनी रूप से सही नहीं है.
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पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने दिया था झटका
दरअसल, ट्रंप लंबे समय से मानते रहे हैं कि ज्यादा टैरिफ लगाने से विदेशी सामान महंगा होगा और इससे अमेरिका में बनने वाले उत्पादों की मांग बढ़ेगी. इसी सोच के तहत उन्होंने पहले 1977 के एक आपातकालीन कानून के जरिए लगभग सभी देशों के आयात पर भारी टैक्स लगाया था. लेकिन इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि उस कानून के तहत राष्ट्रपति को इस तरह टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कई आयातकों से वसूला गया टैक्स भी वापस करना पड़ा. इसके बाद सरकार ने कुछ समय के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू किया था, जिसकी समय-सीमा जुलाई के आखिर में खत्म हो गई.
अब नए कानून के तहत फिर लगाया गया टैक्स
अस्थायी टैरिफ खत्म होने के तुरंत बाद ट्रंप सरकार ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का इस्तेमाल करते हुए 10 से 12.5 प्रतिशत तक का नया टैरिफ लागू कर दिया. इस कानून के तहत राष्ट्रपति उन देशों पर अतिरिक्त टैक्स लगा सकते हैं, जिन पर अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप हो. इस नए फैसले का असर अमेरिका में आने वाले लगभग 99 प्रतिशत आयातित सामान पर पड़ सकता है. यानी दुनिया के ज्यादातर देशों से आने वाला सामान अब पहले से महंगा हो सकता है.
व्हाइट हाउस ने फैसले का किया बचाव
वहीं, व्हाइट हाउस ने इस फैसले को पूरी तरह सही बताया है. सरकार के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अगर दूसरे देश बंधुआ मजदूरी से बने सामान के निर्यात को नहीं रोकते हैं, तो इसका नुकसान अमेरिकी उद्योगों और वहां के मजदूरों को उठाना पड़ता है. उनका कहना है कि धारा 301 के तहत लगाया गया नया टैरिफ पूरी तरह कानूनी है और इसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापार, उद्योग और रोजगार की सुरक्षा करना है. हालांकि अब यह मामला अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है.
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Input - IANS