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नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई तबाही... 162 की मौत और 800 से ज्यादा लोग लापता; UP-बिहार में भी बढ़ी चिंता

नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है. इस दैवीय आपदा में नेपाल में करीब 162 लोगों की मौत और 800 से अधिक लोग लापता हैं. 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए, जबकि 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. फ़िलहाल राहत बचाव कार्य लगातार जारी है.

नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई तबाही... 162 की मौत और 800 से ज्यादा लोग लापता; UP-बिहार में भी बढ़ी चिंता
Image Source: IANS
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Nepal Flood: भारत का पड़ोसी देश नेपाल बुधवार को एक बार फिर बड़ी दैवीय आपदा का शिकार हुआ.चीन की सीमा से सटे रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई और देखते ही देखते पानी ने रास्ते में आने वाली हर चीज को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया. बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह पहुंचने तक का मौका नहीं मिला. नेपाल में अब तक 162 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 800 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. बचाव दल लगातार मलबे और कीचड़ में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं.

दरअसल, इस हादसे का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है. भोटेकोशी नदी से जुड़ा जल तंत्र आगे चलकर भारत की तरफ बढ़ता है, इसलिए बिहार और उत्तर प्रदेश में भी प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. दोनों राज्यों में नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. केंद्र सरकार भी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रही है.

कुछ मिनटों में बदल गया पूरा मंजर

रसुवा जिले के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है. स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में सड़कें पानी और मलबे में डूबी नजर आ रही हैं. कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और वाहनों के बह जाने की खबर है. बाढ़ के साथ आया मलबा कई जगहों पर इतनी तेजी से फैला कि रास्ते पूरी तरह बंद हो गए. तमाम मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस आपदा के पीछे पहाड़ी क्षेत्र में हुई बड़ी भू-स्खलन या ग्लेशियर से जुड़ी घटना को संभावित कारण माना जा रहा है. अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नदी में पहुंचने से भोटेकोशी का जलस्तर तेजी से बढ़ा. जानकारों के मुताबिक हिमालयी इलाकों में ऐसी घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं, क्योंकि पहाड़ों के बीच बहने वाली नदियों में पानी का दबाव कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले सकता है.

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पुल, सड़कें और बिजली परियोजनाएं भी प्रभावित

बाढ़ ने नेपाल के जरूरी बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. नेपाल के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं, इससे प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. इसके साथ ही 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है. बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से राहत कार्यों में अतिरिक्त मुश्किलें पैदा हो रही हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन इलाकों में तबाही हुई है, उनमें से कई पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र हैं. सड़क संपर्क टूटने के बाद हेलीकॉप्टर ही कई जगहों तक पहुंचने का प्रमुख साधन बन गए हैं. नेपाल सेना और सुरक्षा एजेंसियां लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं.

भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता

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इस आपदा के बाद भारत में भी कई परिवारों की चिंता बढ़ गई है. अलग-अलग रिपोर्टों में 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े तीर्थयात्रियों के शामिल होने की बात कही गई है. हालांकि राहत और बचाव अभियान के बीच आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है और कई लोगों की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. नेपाल के इस हिस्से से बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री गुजरते हैं. ऐसे में बाढ़ के दौरान स्थानीय लोगों के साथ-साथ यात्रियों के फंसने से राहत एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ गई है.

हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू जारी 

नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है. नेपाल सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से ऐसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है, जो बाढ़ के कारण अलग-थलग पड़ गए हैं. गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देने के लिए सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी चिकित्सा व्यवस्था तैयार की जा रही है. दुर्गम इलाकों में मलबा और खराब मौसम बचाव अभियान की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है. इसके बावजूद सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े दल लगातार काम कर रहे हैं. अधिकारियों का फोकस फिलहाल लापता लोगों को तलाशने और घायलों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने पर है.

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भारत ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल में आई इस बड़ी प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने पड़ोसी देश के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत कर इस मुश्किल समय में हरसंभव सहायता का भरोसा दिया. भारत की ओर से राहत और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी की गई है. भारत और नेपाल के बीच सिर्फ पड़ोसी देशों का रिश्ता नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लोगों का लगातार आना-जाना भी होता है. यही वजह है कि नेपाल में किसी बड़ी आपदा का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक भी महसूस किया जाता है. इस समय भारत की एजेंसियां नेपाल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

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बिहार और उत्तर प्रदेश में क्यों बढ़ी चिंता?

नेपाल की बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन को खास तौर पर सतर्क किया गया है. वजह है नेपाल से भारत की ओर आने वाली नदियां. गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए बिहार में निगरानी बढ़ाई गई है. वाल्मीकिनगर बैराज से जुड़े इलाकों में भी अधिकारियों को अलर्ट रखा गया है. उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी प्रशासन संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है. एनडीआरएफ समेत आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें तैयार रखी गई हैं. फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान नदियों के जलस्तर और निचले इलाकों पर है, ताकि अगर पानी का दबाव बढ़ता है तो समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके.

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राहत अभियान पर टिकी निगाहें

नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का खतरा सामने ला दिया है. कुछ ही समय में सामान्य दिखने वाला नदी क्षेत्र मलबे और पानी की तेज धार में बदल गया. अब सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है.

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बताते चलें कि चाव अभियान जारी है और आने वाले समय में लापता लोगों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है. फिलहाल नेपाल में राहत दल मुश्किल परिस्थितियों के बीच काम कर रहे हैं और भारत समेत कई देश सहायता के लिए आगे आए हैं. इस वक्त सबसे जरूरी है कि प्रभावित लोगों तक भोजन, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित आश्रय जल्द से जल्द पहुंचाया जाए.

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