ट्रंप का व्यवहार ही जिम्मेदार…PM मोदी ने क्यों नहीं की अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ जॉइंट PC? भारत ने दे दिया जवाब
पीएम मोदी ने ट्रंप के 'अप्रत्याशित व्यवहार' की वजह से ही फ्रांस में G7 समिट के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की. दुनियाभर के नेता भी ट्रंप के साथ मीडिया टॉक से बच रहे हैं. भारत ने भी सावधानी बरती. अमेरिका को दक्षिण अफ्रीका-यूक्रेनी राष्ट्रपति के साथ बर्ताव को याद करना चाहिए.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गैर पारंपरिक और गैर कूटनीतिक रवैया किसी से छुपा नहीं है. ट्रंप विदेशी नेताओं के साथ-साथ अपने सहयोगियों के साथ भी कैसा रवैया रखते हैं, ये बात पूरी दुनिया में जानती है. उनका व्हाइट हाउस, ओवल ऑफिस और दूसरे मंचों-प्रेस कॉन्फ्रेंसे में कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ अपमानजनक व्यवहार भी जगजाहिर है. ऐसे में अब दुनियभार के नेता ट्रंप के साथ मीडिया टॉक या कोई भी सार्वजनिक स्टेज साझा करने से बचते हैं.
ट्रंप के व्यवहार के कारण मोदी ने नहीं की जॉइंट पीसी
यही कुछ भारत ने भी फ्रांस के एवियान में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी किया था. भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी दल को बता दिया था कि पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ PC नहीं करेंगे और ना ही मीडिया के सवालों का जबाब देंगे.
सरकार के विश्वस्त सूत्र ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि डोनाल्ड ट्रंप के इसी अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर भारतीय पक्ष ने G7 सम्मेलन के दौरान फ्रांस में बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी नेता की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने का फैसला किया था. जिसे गोर ये कह रहे हैं कि भारत ने सवाल ना लेने का अनुरोध किया था. हालांकि ये आधा सच है. इसके पीछे की बैकग्राउंड उन्होंने बताई.
इतना ही नहीं पीएम मोदी और ट्रंप की ये मुलाकात संभवत: ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई थी. इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के वक्त और उससे पहले ट्रेड डील का रवैया कैसा था ये पूरी दुनिया जानती है.
ट्रंप ने एकतरफा सीजफायर का ऐलान किया, मध्यस्थता का झूठा दावा किया, बार-बार युद्धविराम का क्रेडिट लेने की कोशिश की और बार-बार जहाज़ गिरने-गिराने का दावा किया. जबकि भारत ने हमेशा कहा है कि भारत-पाक के बीच किसी तीसरे पक्ष ने मध्यस्थता की थी, बल्कि पाकिस्तान ने सीजफायर की माँग की थी, जिसे भारत ने लार्जर हित में स्वीकार किया.
इसके अलावा भारत ये भी नहीं भूला कि ट्रंप कैसी कोशिशें कर रहे थे कि व्हाइट हाउस में आसिम मुनीर-पीएम मोदी को साथ बैठाना चाह रहे थे. जिसे पीएम मोदी ने फेल कर दिया अमेरिका जाने का न्योता इनकार कर.
भारत नहीं भूला ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के वक्त क्या किया था!
इतना ही नहीं ट्रंप ने भारत पर 50% की टैरिफ़ और पेनाल्टी ठोकी. भारत की इकोनॉमी को डेडलाइन इकोनॉमी करार दिया. ऐसे में भारत कैसे भूलता कि ट्रंप का रवैया कैसा है और कैसा हो सकता है. इसी सब अप्रत्याशित रवैये के कारण पीएम मोदी और भारतीय अधिकारियों की ओर से सवाल नहीं लेना का फैसला किया गया.
हालांकि शिखर सम्मेलनों और द्विपक्षीय बातचीत के बाद मीडिया टॉक और सवाल-जावब भी एक परंपरा रही है, लेकिन बाध्यकारी नहीं है. हां कूटनीतिक रूप से ऐसा होता है. ना कि जैसा ट्रंप करना चाहते हैं. ऐसे में सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने वाले विदेशी प्रतिनिधिमंडल उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर सतर्क रहते हैं, जैसा कि दक्षिण अफ्रीका सिरिल रामाफोसा और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की सहित दूसरे देशों के नेताओं और राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनकी बातचीत से देखा जा सकता है.
फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप के साथ जॉइंट पीसी नहीं करने की भारत ने बता दी वजह
सूत्रों के मुताबिक भारत ने इस साल जून में फ्रांस के एवियान में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान ‘सावधानीपूर्ण रुख’ अपनाया था. शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह फैसला ट्रंप के "अप्रत्याशित व्यवहार" को ध्यान में रखते हुए लिया गया था.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की सप्ताहांत में एक कार्यक्रम के दौरान की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मामले से परिचित सरकारी अधिकारियों ने कहा कि किसी भी वीवीआईपी यात्रा से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया से बातचीत की व्यवस्था को लेकर चर्चा सामान्य प्रक्रिया है.
दरअसल, गोर ने कहा था कि भारत ने दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद मीडिया के साथ किसी भी संयुक्त बातचीत से बचने का ‘विशेष अनुरोध’ किया था.
ट्रंप के साथ मंच शेयर करने से बच रहे दुनियाभर के नेता!
एक अधिकारी ने कहा, "इस संबंध में भारतीय पक्ष ने ऐसी यात्राओं के लिए अपनी मानक प्रक्रिया से अमेरिकी पक्ष को अवगत कराया. जब कोई प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलता है तो उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर सतर्क रहता है. दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ उनकी बातचीत में भी ऐसा व्यवहार देखा गया है. यही कारण है कि भारत ने सावधानीपूर्ण रुख अपनाया."
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 18 जून को एवियान में हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बहाल करने की दिशा में ट्रंप के प्रयासों की सराहना की थी. उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन स्वतंत्रता और निर्बाध वाणिज्यिक गतिविधियों को बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया था. साथ ही, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता रेखांकित की थी.
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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, " दोनों नेताओं ने फरवरी 2025 में वाशिंगटन डीसी में हुई अपनी बैठक के बाद से भारत-अमेरिका सीओएमपीएसीटी (कैटेलाइजिंग ऑपर्च्युनिटीज फॉर मिलिट्री पार्टनरशिप, एक्सेलरेटेड कॉमर्स एंड टेक्नोलॉजी) के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की." बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में हुई प्रमुख प्रगति का स्वागत किया.
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पीएमओ ने कहा कि दोनों नेताओं ने अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर विशेष संतोष व्यक्त किया और अधिकारियों को जल्द से जल्द संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी तथा व्यावसायिक रूप से सार्थक समझौते की दिशा में काम करने का निर्देश दिया.
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दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा दोनों देशों और उनके लोगों के पारस्परिक हित में सभी क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई.