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पाकिस्तान के लिए दोहरा झटका, पहले ट्रंप ने दूख में पड़ी मक्खी की तरह निकाला, इधर भारत पहुंच गया ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान और अमेरिका ने एक साथ पाकिस्तान के साथ खेला कर दिया है. एक ओर ट्रंप ने मुनीर को पीस प्रक्रिया से बाहर निकाल फेंका दूसरी ओर एक बड़ी बैठक के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंच गया. ये पाक फौज के लिए किसी सदमे से कम नहीं है.

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05 Aug 2026
( Updated: 05 Aug 2026
11:55 AM )
पाकिस्तान के लिए दोहरा झटका, पहले ट्रंप ने दूख में पड़ी मक्खी की तरह निकाला, इधर भारत पहुंच गया ईरानी प्रतिनिधिमंडल
Image Source: IANS
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कहते हैं सो सुनार की, एक लोहार की...भारत ने ये बात साबित कर दी है. ईरान-अमेरिका जंग में बहुत चौधरी बन रहा था पाकिस्तान, अब उसे ऐसा झटका लगा कि उसकी नींद उड़ गई है. और ये मार उसे हिंदुस्तान की ओर से पड़ी है. दरअसल पाकिस्तान को पहले अमेरिका ने ईरान के साथ शांति वार्ता प्रक्रिया से बाहर किया, ट्रंप ने उसका नाम तक लेना जरूरी नहीं समझा, उधर ईरान ने भारत के साथ मिलकर बड़ी चाल चल दी, जिसमें रूस-चीन भी शामिल हैं.

ट्रंप ने पाकिस्तान को दूध में पड़ी मक्खी तरह बाहर निकाला!

हुआ ये कि डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत बड़ा झटका देते हुए अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध में मध्यस्थता करवाने वाले देशों की लिस्ट से पाकिस्तान को बाहर कर दिया. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बीते दिनों कहा कि "हम बातचीत कर रहे हैं, और यह बातचीत ईरान के अनुरोध पर हो रही है. इसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और खास तौर पर कतर का समर्थन प्राप्त है. इसके अलावा कुछ अन्य देश भी इसका समर्थन कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि सभी पक्ष किसी ऐसे समाधान की तलाश में हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव कम हो और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए रास्ता खुल सके. हालांकि उन्होंने एक बार भी पाकिस्तान का नाम ही नहीं लिया जिसने भीख मांग कर इस्लामाबाद टॉक्स का आयोजन किया, लाखों डॉलर खर्च कर, कर्जा लेकर अमेरिका-तेहरान तक पोस्टमैन की भूमिका निभाई और अंत में हाथ क्या लगा, भीख का कटोरा.

ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा भारत

उधर अमेरिका के साथ जंग के बीच ईरानी प्रतिनिधिमंडल पूरे दल-बल के साथ भारत पहुंच गया. इसका बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है. आपको बता दें कि भारत की अध्यक्षता में हो रही 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक के लिए ईरानी डेलिगेशन भुवनेश्वर के ब्रिक्स शिक्षा बैठक में हिस्सा लेगा. यह बैठक 5 से 7 अगस्त तक चलेगी. इसमें 200 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.  

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भारत को गीदड़भभकी दे रहा था पाकिस्तान, खुद मुंह की खाई

आपको बता दें कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भारत पहुंचना और अमेरिका-ईरान वार्ता से बाहर निकाला जाना पाकिस्तान के लिए किसी सदमे से कम नहीं है. इस पीस डील में पाकिस्तान के शामिल होने को शहबाज शरीफ और असीम मुनीर अपनी जीत और बादशाहत की तरह पेश कर रहे थे. वो अपने मुल्क में भारत की हार की तरह भी दिखा रहे थे कि देखो कैसे कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान से भारत पिछड़ गया है. हालांकि यहां ये बता देना जरूरी है कि भारत किसी भी देश की मध्यस्थता ना करता है और ना ही अपने मामलों में किसी को मध्यस्थ बनने देता है. जबकि पाकिस्तान के साथ ऐसा नहीं है, उसे दूसरे के मामलों में कूदने और अपने मामलों में दूसरों को शामिल करने का बड़ा शौक है और मजबूरी भी है. क्योंकि वो जानता है कि कानूनी और वैश्विक ताकत के एतबार से उसका भारत से कोई मुकाबला नहीं है. इसलिए तो उसने कश्मीर मामले से लेकर सिंधु जल संधि तक में दूसरे देशों को शामिल कर दिया है.

भारत ने ईरान के साथ मिलकर पाकिस्तान के साथ कर दिया गेम

कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को शांति वार्ता प्रक्रिया से दूध में मक्खी की तरह निकाल फेंकने की बड़ी वजह है पाकिस्तान की ही दोगली नीति. खबर के मुताबिक वाइट हाउस को इनपुट मिले हैं कि पाकिस्तान पूरे मामले में अमेरिका के साथ गेम कर रहा था, ईरान के साथ कुछ बात, वहीं अमेरिका के साथ कुछ बात. ईरान के साथ वो इस्लामिक एंगल से धार्मिक कार्ड खेल रहा था और अमेरिका के साथ कूटनीतिक मैंसेंजर की भूमिका निभा रहा था. इसलिए तो ट्रंप ने जिन तीन देशों को मध्यस्थ बताया है उनमें सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के नाम हैं. यह पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका है. रिपोर्ट्स तो ये भी हैं कि पाकिस्तान को लेकर ट्रंप प्रशासन में आंतरिक मतभेद उभरने लगे थे. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने चीनी हथियारों की डिलीवरी ईरान को की है.

ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेगा ईरान

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जहां तक ईरानी प्रतिनिधिमंडल के भारत आने की बात है तो इसमें ईरान के विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के कार्यवाहक मंत्री डॉ. मसूद शमश बख्श और प्रौद्योगिकी एवं नवाचार विभाग के उपमंत्री डॉ. मोहम्मद नबी शाहिकी ताश बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे. वे भुवनेश्वर में होने वाली बैठक में शामिल होंगे.

इसकी जानकारी ईरानी दूतावास के आधिकारिक 'एक्स' पोस्ट के जरिए दी गई. ईरान के दूतावास ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान ईरानी प्रतिनिधि भारत के कई अग्रणी वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों का दौरा भी करेंगे.

इस बैठक का आयोजन तीन दिन तक होगा, जिसमें 5 अगस्त को ब्रिक्स शिक्षा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हो रही है. 6 अगस्त को मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त चर्चा होगी और 7 अगस्त को 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की आधिकारिक बैठक होनी है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी भी शामिल होंगे. इस बैठक में सदस्य देशों के बीच शिक्षा सहयोग, नवाचार और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी.

भारत ने इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान युवाओं की भागीदारी को सबसे ज्यादा महत्व दिया है. इसी सोच के साथ 'मॉडल ब्रिक्स' नाम की एक छात्र-केंद्रित पहल शुरू की गई है.

कौन-कौन से देश हैं ब्रिक्स में शामिल?

यह पहल ब्रिक्स की मंत्रिस्तरीय बैठकों के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित की जाएगी. इसका मकसद युवा नागरिकों को ब्रिक्स की प्रक्रिया से जोड़ना है. साथ ही उन्हें कूटनीति, बहुपक्षीय सहयोग और सहमति बनाने के तरीके समझाने में मदद करना है. भुवनेश्वर में हो रही यह बैठक शिक्षा के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

आपको बता दें कि ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं - ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात, ये सभी देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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