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587 मौतें, 2500 लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा... नेपाल में मची तबाही के बाद फिर मंडराया बाढ़ का खतरा

नेपाल में भीषण बाढ़ से 587 मौतें, करीब 2,500 लोग लापता हैं. 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ के बाद भोटेकोशी-त्रिशूली नदियों के आसपास फिर खतरा बढ़ा है.

587 मौतें, 2500 लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा... नेपाल में मची तबाही के बाद फिर मंडराया बाढ़ का खतरा
Image Source: IANS
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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पूरे इलाके को गहरे संकट में डाल दिया है. हिमालयी क्षेत्र में अचानक आए सैलाब ने देखते ही देखते बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 587 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है. भारत के लिए चिंता की बात यह है कि करीब 320 भारतीयों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है.

जानकारी देते चलें कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस भयावह तस्वीर के बीच कुछ राहत की खबर भी सामने आई है. तिब्बत में फंसे करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और उनके सुरक्षित होने की जानकारी मिली है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, कई लोगों को सुरक्षित निकालकर नेपाल की ओर लाया भी गया है. भारत की तरफ से राहत सामग्री और बचाव संबंधी मदद भी भेजी गई है.

कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?

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इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाके से हुई. शुरुआती आकलनों के मुताबिक, ग्लेशियर के टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबे का बड़ा हिस्सा नीचे की ओर आया. इस मलबे ने नदी के बहाव को प्रभावित किया और कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुक गया. जब यह प्राकृतिक रुकावट टूटी तो पानी, मिट्टी और पत्थरों ने बेहद तेज रफ्तार पकड़ ली. इसका सबसे ज्यादा असर भोटेकोशी नदी और उससे जुड़े इलाकों पर पड़ा. पानी का वेग इतना ज्यादा था कि रास्ते में आने वाली कई संरचनाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं. सड़कें और पुल टूटने से कई इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ. नेपाल सरकार की एजेंसियां लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों और क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौती है. नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी राहत कार्य में जुटे हैं.

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हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी पड़ा बड़ा असर

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नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं भी इस बाढ़ की चपेट में आई हैं. कई परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं. कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है, जिसके कारण बचाव दलों का ध्यान अब इन स्थानों पर भी केंद्रित है. राहत और बचाव अभियान में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कई इलाकों तक सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल हो गया है. ऐसे में हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. हजारों लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन लापता लोगों की बड़ी संख्या के कारण अभियान अभी लंबा चल सकता है.

नदी के बीच बनी झील ने बढ़ाई चिंता

पहली बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. सबसे बड़ी चिंता नदी के ऊपरी हिस्से में मलबे के कारण बनी अस्थायी झील को लेकर है. नदी का रास्ता रुकने से यहां बड़ी मात्रा में पानी जमा हो रहा है. चीनी अधिकारियों ने नेपाल को ऐसी ही एक बाधित जलधारा से बनी झील के बारे में चेतावनी दी है. रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है और आने वाले दिनों में इसमें और पानी पहुंचने की आशंका है. यदि प्राकृतिक बांध जैसी बनी यह रुकावट अचानक टूटती है, तो नीचे के इलाकों में दोबारा तेज बाढ़ आ सकती है. यही वजह है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. फिलहाल कुछ हिस्सों में नदी का बहाव सामान्य बताया गया है, लेकिन ऊपर जमा पानी और मलबे के कारण खतरा बना हुआ है.

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320 भारतीयों से संपर्क नहीं

नेपाल की इस आपदा ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है. इसके अलावा भारतीय मूल के 100 से ज्यादा लोगों के भी संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है. दूसरी ओर, चीन की ओर तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और उनके सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है. भारत सरकार नेपाल में राहत और बचाव कार्यों में मदद कर रही है. राहत सामग्री की खेप भेजने के साथ ही बचाव कार्यों के लिए जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है. सीमा क्षेत्र में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने की कोशिश भी जारी है.

तिब्बत में भी भारी तबाही

इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है. सीमा पार चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है. यहां भी लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं. बाढ़ के पानी ने सड़क, पुल, बिजली और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है. महत्वपूर्ण सीमा मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे नेपाल और चीन के बीच आवागमन तथा व्यापार पर असर पड़ा है.

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खतरा अभी टला नहीं है

नेपाल में फिलहाल राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है. प्रशासन लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ उन इलाकों पर भी नजर रख रहा है, जहां दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है. विशेषज्ञों और अधिकारियों के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती नदी के ऊपरी हिस्से में जमा पानी और मलबे की स्थिति पर लगातार नजर रखना है.

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बताते चलें कि यह आपदा एक बार फिर दिखाती है कि हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर, अचानक आने वाली बाढ़ और बदलते मौसम का खतरा कितना गंभीर हो सकता है. इस समय सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि लापता लोगों का जल्द पता चले और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. राहत कार्यों में जुटी टीमों के सामने मुश्किल हालात जरूर हैं, लेकिन उनकी लगातार कोशिशें प्रभावित परिवारों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बनी हुई हैं.

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