नेपाल में भीषण बाढ़ से हाहाकार, 392 लोगों की मौत; 1500 से ज्यादा लापता, फिर बाढ़ का खतरा
नेपाल में भीषण बाढ़ से मृतकों की संख्या 392 पहुंच गई है, जबकि 1,500 से अधिक लोग लापता हैं. 290 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है. त्रिशूली हाइड्रोपावर टनल में फंसे 350 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया. वहीं, लेंडे नदी का बहाव रुकने से बनी अस्थायी झील के टूटने पर निचले इलाकों में फिर बाढ़ का खतरा है.
Follow Us:
Nepal Flood: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है. इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 392 हो गई. वहीं, 1500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैकड़ों परिवार अब भी अपने लोगों की तलाश में जुटे हैं और राहत एवं बचाव दल मलबे और तेज बहाव वाले नदी क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं.
इस आपदा का असर नेपाल में रह रहे भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है. भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में मौजूद 290 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है. भारतीय अधिकारियों ने इन लोगों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास तेज कर दिए हैं. अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. इनमें त्रिशूली-एक जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 श्रमिक और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं.
हेलीकॉप्टर और सड़क मार्ग से जारी रेस्क्यू
नेपाल पुलिस के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया है. इसके अलावा 796 अन्य लोगों को सड़क मार्ग से बाहर निकाला गया है. हालांकि, पुलिस ने बचाए गए विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता के बारे में जानकारी नहीं दी है. सबसे बड़ी राहत की खबर त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना से आई है. यहां एक टनल में करीब 350 मजदूर और कर्मचारी फंस गए थे. नेपाली सेना की टीम ने अभियान चलाकर टनल में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इस परियोजना में कई भारतीय मजदूर भी काम कर रहे थे. ऐसे में इस रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हिमनद टूटने से आया पानी और मलबे का सैलाब
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमनद टूटने के बाद चट्टानें खिसकने और हिमस्खलन की स्थिति बनी. इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव मध्य नेपाल की ओर बढ़ गया. देखते ही देखते कई गांव और कस्बे इसकी चपेट में आ गए. मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, जबकि कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है. इस आपदा ने केवल जान-माल को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि कई इलाकों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला सड़क नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. नेपाल के सड़क विभाग के अनुसार, नुवाकोट के बेत्रावती से रसुवागढ़ी के बीच करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हो गई है. कई कंक्रीट पुल भी पानी के तेज बहाव में बह गए. राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, बाढ़ में 35 सड़क पुल, 45 सस्पेंशन पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं. इससे प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाना बड़ी चुनौती बन गया है.
एक और बाढ़ का खतरा
बाढ़ का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है. सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि रसुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर लेंडे नदी का बहाव पूरी तरह रुक गया है. इसके कारण नदी के आसपास के क्षेत्र में एक अस्थायी झील बन गई है. अधिकारियों को आशंका है कि यदि प्राकृतिक बांध टूट गया तो निचले इलाकों में अचानक पानी का तेज बहाव आ सकता है. भोटेकोशी नदी प्रणाली के उद्गम क्षेत्र के पास भी एक नई अवरोध झील बनने की जानकारी सामने आई है. इसके चलते निचले इलाकों में दोबारा अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है. प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी है.
तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता
इस आपदा का असर सीमा पार तिब्बत तक पहुंचा है. अधिकारियों के मुताबिक, तिब्बत में 558 लोग लापता हैं. नेपाल में 910 लोगों के लापता होने की जानकारी है. दोनों जगहों के आंकड़ों को मिलाने पर लापता लोगों की संख्या 1500 तक पहुंचती है. भारत ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं. भारत नेपाल के अधिकारियों, संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है.
यह भी पढ़े: बचने के लिए पहाड़ पर जा रहे थे लोग, तभी आया सैलाब और मची चीख पुकार, नेपाल बाढ़ का खौफनाक Video
तीन दिन में 30 लाख घन मीटर बढ़ने का अनुमान
चीनी अधिकारियों के आकलन के मुताबिक, गुरुवार सुबह तक बनी नई अवरोधक झील में लगभग 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था. अनुमान है कि अगले तीन दिनों के दौरान इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है. पानी का लगातार बढ़ता स्तर प्राकृतिक अवरोध के टूटने की आशंका को बढ़ा रहा है, जिससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.
नेपाल के लिए भारत ने बढ़ाई राहत सहायता
भारत ने नेपाल को राहत सामग्री भेजने का सिलसिला भी तेज कर दिया है. बुधवार को 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी गई थी. इसके बाद गुरुवार को सैन्य परिवहन विमान के जरिए 37.5 टन और राहत सामग्री, दवाएं तथा खाद्य सामग्री नेपाल भेजी गई. इस तरह भारत अब तक कुल 47.5 टन सहायता नेपाल पहुंचा चुका है.
यह भी पढ़ें
बहरहाल, नेपाल के कई हिस्सों में राहत और बचाव अभियान जारी है. मलबे में अपनों की तलाश करते लोगों की तस्वीरें इस आपदा की भयावहता बयां कर रही हैं. सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जिनसे अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है. प्रशासन के सामने एक तरफ लापता लोगों को तलाशने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर संभावित नई बाढ़ से आबादी को बचाने की चुनौती भी बनी हुई है.