चमचमाती मार्बल फ्लोरिंग, प्लास्टर, पेंट...फिर बनकर तैयार हुआ जैश मुख्यालय, ऑपरेशन सिंदूर' में हुआ था तबाह
पाकिस्तान के बहावलपुर में आतंकी संगठन जैश का मुख्यालय फिर से बनकर तैयार हो गया है. पाक फौज की 25 करोड़ की मदद से सेंट्रल हॉल को प्लास्टर, पेंट और मार्बल फ़्लोरिंग से नया रूप दिया गया. भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में मिसाइल दागकर कर दिया था ध्वस्त.
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पिछले साल 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था. इसमें से एक था बहावलपुर स्थित जैश का मुख्यालय, जिसे फिर से बनाकर खड़ा कर दिया गया है. भारत के सटीक मिसाइल हमलों में उसे बुरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था.
जैश का मुख्यालय फिर से बनकर तैयार
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे जैश के मुख्यालय पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर उसका पुनर्निर्माण किया गया है. जिस सेंट्रल हॉल में गहरे गड्ढे थे, बिल्डिंग को चीर कर मिसाइल अंदर दाखिल हो गई थी, मकान जर्जर हो गया था, पूरी बिल्डिंग खंडहर बन गई थी, उस जगह को अब प्लास्टर, पेंट और मार्बल फ़्लोरिंग से नया रूप दिया गया है. इतना ही नहीं मुरीदके, बहावलपुर सहित दूसरे अन्य ठिकानों पर भी बड़े स्तर पर सफाई और दोबारा निर्माण का काम चलता दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान ने इसके लिए 25 करोड़ रुपए दिए थे.
बता दें कि मरकज़ सुभान अल्लाह वही परिसर है, जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निशाना बनाया था. भारतीय सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कई आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए थे. इनमें बहावलपुर स्थित जैश का यह प्रमुख ठिकाना भी शामिल था.
मई महीने में सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरों में भी वहां निर्माण सामग्री और मशीनें नजर आई थीं, जिससे पता चलता है कि इन ठिकानों को फिर से तैयार किया जा रहा है. इसी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपने कई अहम ऑपरेशनल बेस पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से हटाकर खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में शिफ्ट कर दिए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय हमलों के बाद पीओके उनके लिए कम सुरक्षित माना जाने लगा, जबकि केपीके को ज्यादा सुरक्षित और बचाव योग्य समझा जा रहा है. वहीं जहां तक बहावलपुर, मुरीदके का सवाल है तो वो पाकिस्तानी पंजाब में पड़ता है. पंजाब दूसरे प्रांतो के अलावा आतंकियों के लिए सेफ माना जाता था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में उन पर हुई कार्रवाई ने उन्हें खौफ में भर दिया कि अब उनके लिए कोई इलाका सेफ नहीं है. हालांकि वो पंजाब से पूरी तरह नहीं जा सकते क्योंकि आंतकी सबसे ज्यादा पंजाब से ही आते हैं. पाक फौज की सबसे ज्यादा बहाली, ऑफिसर, फंडिंग, सपोर्ट और वैचारिक समर्थन यहीं से आता है. ऐसे में पाक फौज के दिल, पंजाब में रहना उनके लिए ज्यादा मुफीद और दूसरे की तुलना में ज्यादा सेफ और मजबूरी है.
अमेरिका की संस्था मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईएमआरआई) की मानें तो आतंकियों की यह शिफ्टिंग पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी की सीधी मदद से की जा रही है, ये बीते एक साल से भी जारी है.
पाकिस्तान के बहावलपुर में आतंकी संगठन जैश का मुख्यालय फिर से बनकर हुआ तैयार, लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर सेंट्रल हॉल को प्लास्टर, पेंट और मार्बल फ़्लोरिंग से नया रूप दिया गया. भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में मिसाइल दागकर कर दिया था ध्वस्त.#Pakistan #Bahawalpur #JaishEMohammad… pic.twitter.com/aQy5zvLK0e
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) August 24, 2026
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पुलिस सुरक्षा में जैश-ए-मोहम्मद लगातार खुली सभाएं आयोजित कर रहा है ताकि वो फिर से अपनी जमीन मजबूत कर सके. फंडिंग और आतंकियों की बहाली उसके लिए बहुत जरूरी हो गया है. जैश की बढ़ी गतिविधि में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम की भी इसमें भूमिका रही.
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया था.
एमईएमआरआई की रिपोर्ट में कहा गया, “सैटेलाइट तस्वीरों में बहावलपुर में एन-5 नेशनल हाईवे के पास स्थित जामिया सुभान अल्लाह परिसर में फिर से निर्माण गतिविधियां साफ दिखाई दे रही हैं. 14 अप्रैल 2026 की तस्वीरों में भारी मशीनें और कई निर्माण वाहन साइट पर काम करते नजर आए थे.”
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “अमेरिका की स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी 'वंटोर' से मिली हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों में देखा गया कि मस्जिद के जो गुंबद हमले में क्षतिग्रस्त हुए थे, उन्हें अब दोबारा बना दिया गया है. नए गुंबदों का रंग पहले की तुलना में ज्यादा गहरा दिखाई दे रहा है, जिससे लगता है कि हाल ही में सीमेंट का काम हुआ है.”
रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ बहावलपुर ही नहीं बल्कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दूसरे ठिकानों पर भी दोबारा निर्माण का काम हो रहा है. इसमें कहा गया कि इस साल 22 अप्रैल की सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सैयदना बिलाल मस्जिद में भी ऐसी गतिविधियां देखी गईं, जिसे इस संगठन से जुड़ा माना जाता है.
पाकिस्तान अभी भी एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है. यह संस्था एफएटीएफ के आतंकवाद फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के मानकों के आधार पर देशों की जांच करती है.
पाकिस्तान आर्मी ने जैश मुख्यालय के लिए दिए 25 करोड़ रुपए
रिपोर्ट में कहा गया, “अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट्स ने डिजिटल वॉलेट्स के जरिए फंड जुटाने के संकेत दिए थे, ताकि सुभान अल्लाह परिसर के पुनर्निर्माण का काम किया जा सके.”
पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को लेकर चिंता जताते हुए एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा डी एंडा माद्राजो ने कहा था कि जो देश पहले ग्रे लिस्ट से बाहर आ चुके हैं, वे भी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने सरकारों से सख्त निगरानी और मजबूत कार्रवाई जारी रखने की अपील की थी.
रिपोर्ट में कहा गया, “उन टिप्पणियों के कुछ ही महीनों बाद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ठिकानों पर खुलेआम दोबारा निर्माण का काम दिखना यह सवाल खड़ा करता है कि निगरानी व्यवस्था वास्तव में कितनी असरदार है.”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पाकिस्तान अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था. साथ ही यह दावा किया गया कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी एक मीडिया जांच में जेईएम के मुख्यालय में विस्तार के संकेत मिले थे, जो पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बाद शुरू हुए थे.
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