न डिग्री, न बड़ा पद... ट्रेन में टूथब्रश बेचने वाला शख्स बोलता है 19 भाषाएं, वीडियो देख आप भी चौंक जाएंगे
भारतीय रेल का सफर काफी अद्भुत होता है,क्योंकि इसकी यात्रा के दौरान कुछ किलोमीटर की दूरी पर जहां बदली हुई भाषा सुनने को मिलती है. इस बीच एक वेंडर का वीडियो वायरल हो रहा है जो, एक के बाद एक 19 भाषा बोलता हुआ दिखाई दे रहा है.
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ट्रेन का सफर अपने आप में कई तरह के अनुभवों से भरा होता है. कभी सहयात्रियों से बातचीत शुरू हो जाती है, तो कभी खिड़की के बाहर बदलते नजारे ध्यान खींचते हैं. इसी दौरान अक्सर ट्रेन में अलग-अलग सामान बेचने वाले वेंडर भी नजर आते हैं. कोई चाय-कॉफी बेचता है, कोई पानी और स्नैक्स, तो कोई टूथब्रश, टूथपेस्ट या रोजमर्रा की जरूरत का सामान लेकर डिब्बों में घूमता दिखाई देता है. आमतौर पर यात्री सामान खरीदने के बाद आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन हाल ही में एक ट्रेन वेंडर का वीडियो सामने आया, जिसने लोगों का ध्यान अपने सामान से नहीं, बल्कि अपने हुनर से खींच लिया.
दरअसल, यह शख्स ट्रेन में टूथब्रश, टूथपेस्ट और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें बेच रहा था. पहली नजर में वह बिल्कुल सामान्य वेंडर जैसा ही दिखाई देता है. लेकिन यात्रियों ने जब उससे बातचीत शुरू की और उसकी भाषाओं के बारे में सवाल किया, तो कहानी ने अचानक दिलचस्प मोड़ ले लिया. शख्स ने बताया कि उसे करीब 18 से 19 भाषाओं में बातचीत करने का ज्ञान है. यह सुनकर आसपास मौजूद यात्रियों को पहले तो भरोसा नहीं हुआ.
एक के बाद एक कई भाषाओं में दिए जवाब
इसके बाद यात्रियों ने उसकी बात को परखने के लिए अलग-अलग भाषाओं में उससे सवाल करना शुरू किया. हैरानी की बात यह रही कि वेंडर ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए. वह अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में बातचीत करता नजर आया. उसकी भाषा पकड़ देखकर यात्रियों की दिलचस्पी उसके सामान से ज्यादा उसकी कहानी में हो गई. कुछ देर पहले तक जो लोग उससे टूथपेस्ट या टूथब्रश की कीमत पूछ रहे थे, वही अब उससे जानना चाहते थे कि उसने इतनी भाषाएं आखिर सीखीं कैसे. बातचीत बढ़ती गई और ट्रेन का सामान्य सफर कुछ समय के लिए एक अनोखी मुलाकात में बदल गया. आसपास बैठे दूसरे यात्री भी इस बातचीत को ध्यान से सुनने लगे.
A man selling toothbrushes, toothpaste and soap on a train knows 18–19 languages! 😲
— Lakshay Mehta (@lakshaymehta08) August 21, 2026
He says he loves learning new languages. pic.twitter.com/OUWMMb2I90
नई भाषाएं सीखना है जुनून
वेंडर ने बताया कि नई-नई भाषाएं सीखना उसका शौक है. वह अपने काम के लिए रोज ट्रेन में सफर करता है और यात्रियों को सामान बेचकर अपनी रोजी-रोटी कमाता है. इसके बावजूद उसने सीखने की आदत को कभी पीछे नहीं छोड़ा. काम के बीच मिलने वाले समय और लोगों से बातचीत को उसने सीखने के अवसर की तरह इस्तेमाल किया. यही बात इस कहानी को खास बनाती है. अक्सर माना जाता है कि किसी नई भाषा को सीखने के लिए महंगे कोर्स, बड़े संस्थान या विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है. लेकिन इस शख्स की कहानी बताती है कि रुचि और लगातार प्रयास हो तो सीखने के रास्ते कहीं से भी निकाले जा सकते हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया गया, जिसके बाद यह तेजी से लोगों का ध्यान खींचने लगा. वीडियो देखने वाले कई यूजर्स ने वेंडर के हुनर की तारीफ की. लोगों ने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिभा को उसके काम, कपड़ों या आर्थिक स्थिति से नहीं आंका जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर एक बात बार-बार सामने आई कि हम अक्सर किसी इंसान को उसकी पहली झलक के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं. ट्रेन में सामान बेचता यह शख्स भी शायद ज्यादातर यात्रियों को एक सामान्य वेंडर ही नजर आता होगा. लेकिन कुछ मिनट की बातचीत ने उसकी एक बिल्कुल अलग पहचान सामने ला दी.
हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं
इस घटना का सबसे बड़ा संदेश यही है कि किसी व्यक्ति के काम को देखकर उसकी क्षमता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. ट्रेन में सामान बेचना उसकी रोजी-रोटी का जरिया है, लेकिन इसके साथ-साथ भाषाएं सीखने की उसकी लगन उसकी अलग पहचान बनाती है. हजारों यात्री रोज ऐसे वेंडरों को देखते हैं और अपनी यात्रा में आगे बढ़ जाते हैं. शायद ही कोई यह सोचता हो कि सामने वाला व्यक्ति अपने जीवन में क्या-क्या सीख रहा है या उसके भीतर कौन सा हुनर छिपा है. यही वजह है कि यह वीडियो लोगों को सिर्फ हैरान नहीं करता, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है.
मुश्किल हालात में भी सीखते रहना बड़ी बात
इस कहानी की असली खूबसूरती 19 भाषाओं के आंकड़े से आगे है. सबसे अहम बात यह है कि रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच भी इस शख्स ने सीखने की इच्छा को जिंदा रखा. उसके पास कोई बड़ी पदवी या चमकदार पहचान नहीं है, लेकिन ज्ञान हासिल करने का जुनून जरूर है.
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बताते चलें कि यह घटना एक छोटी सी याद दिलाती है कि सीखने की कोई उम्र, जगह या तय सीमा नहीं होती. अगर इच्छा मजबूत हो, तो ट्रेन का डिब्बा भी सीखने की जगह बन सकता है और रोजी-रोटी के लिए किया जाने वाला काम भी नए अनुभवों का जरिया बन सकता है. शायद यही वजह है कि यह वेंडर सोशल मीडिया पर चर्चा में है. उसने बिना किसी बड़े मंच के यह दिखा दिया कि असली टैलेंट कई बार वहीं छिपा होता है, जहां हमारी नजर उसे तलाशने की कोशिश भी नहीं करती. इसलिए अगली बार ट्रेन में कोई वेंडर आपके सामने आए, तो उसे सिर्फ उसके सामान से मत आंकिए. हो सकता है, उसके भीतर भी कोई ऐसी कहानी और हुनर छिपा हो, जो आपको हैरान कर दे.