बंगाल में ‘रेल देवता’ की पूजा, इंजन पर चढ़े ग्रामीण…विश्वकर्मा पूजा के दिन लोगों ने जो किया, वायरल है!
बंगाल में गांव वालों ने विश्वकर्मा पूजा के दिन जो किया उसकी खूब चर्चा हो रही है. वैसे तो वीडियो तीन दिन पुराना है, लेकिन वायरल अब हो रहा है.
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भारत पर्व, त्योहार, पूजा-पाठ, संस्कृति का देश है. यानी कि देश के लोग उत्सवधर्मी हैं. भारतीय परंपरा में पेड़-पौधे, पत्थर, पहाड़ और पानी तक की पूजा होती है. हर चीज की महत्ता और उसकी सेवा को सहर्ष स्वीकार करने के लिए अलग-अलग दिन पूजाएं भी करते हैं. इसी कड़ी में हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा होती है, जहां हम लोहे, गाड़ी, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि की पूजा करते हैं. ऐसा ही एक अनोखा मामला बंगाल से सामने आया जहां ग्रामीणों ने चलती ट्रेन को बीच ट्रैक पर रोकी और उसकी पूजा-अर्चना की.
जब विश्वकर्मा पूजा के लिए ट्रेन के इंजन पर चढ़े ग्रामीण!
जानकारी के मुताबिक वायरल हो रहा वीडियो उत्तर 24 परगना जिले के कदंबगाछी इलाके का है. बताया जा रहा है कि यहां गांव वालों ने विश्वकर्मा पूजा के दिन जो किया उसकी खूब चर्चा हो रही है. वैसे तो वीडियो तीन दिन पुराना है, लेकिन वायरल अब हो रहा है. इसमें देखा जा सकता है कि लोग घंटी बजाते अपने घरों से बाहर आते हैं और ट्रेन को लाल तौलिया दिखाकर रोकते हैं और केले के पेड़ इंजन के दोनों तरफ लगाए और पूजा अर्चना की.
बंगाल में ट्रेन की लोगों ने क्यों की पूजा?
यहां शिआलदह-हसनाबाद रेल खंड के कदंबगाछी स्टेशन के पास नंबर 7 रेल गेट के आसपास रहने वाले ग्रामीण हर साल श्रावण मास के अंतिम शनिवार को यह ‘अकाल विश्वकर्मा पूजा’ करते हैं.
वीडियो उत्तर 24 परगना जिले के कदंबगाछी इलाके का है. यहां गांव वालों ने विश्वकर्मा पूजा के दिन ट्रेन को रोक कर रेलवे को देवता मानकर पूजा की. इसके पीछे कड़वी वजह है. 11-12 साल पहले इसी ट्रैक पर कई लोगों की मौतें हो गई थीं, जिसके बाद से लोग ये पूजा करते हैं. इसके बाद से कोई हादसा… pic.twitter.com/bl2sAEu6nv
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) September 21, 2026
वीडियो में आगे दिखता है कि ग्रामीण लाल कपड़ा दिखाकर लोकल ट्रेन रोकते हैं, इंजन या पटरी के सामने फूल, धूप, केला, नारियल, दूध, गंगाजल और दीये चढ़ाते हैं. गांववाले ट्रेन को ही “रेलवे देवता” मानकर पूजा करते हैं और प्रसाद बांटते हैं.
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पूजा के पीछे जुड़ी है दुखद याद!
वीडियो में ट्रेन की पूजा देखकर क़ानून और सिविल सेंस पर सवाल उठाने वाले लोगों को इसके पीछे की वजह भी जान लेनी चाहिए. इसके पीछे की वजह बताते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि करीब एक दशक पहले इस इलाके में रेल पटरी पर कई लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि लोगों ने दावा किया कि उनकी तरफ़ से ये पूजा शुरू करने के बाद से यहां कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. लोगों का मानना है कि ऐसा करने से लोगों की सुरक्षा होती है.
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एक दशक से ज्यादा समय से हो रही ये पूजा!
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ट्रेन की पूजा करने की यह परंपरा पिछले 11-12 साल से चल रही है. विश्वकर्मा पूजा बंगाल सहित पूरे देश में कारीगरों, मैकेनिकों, फैक्ट्री मजदूरों और वाहन मालिकों का प्रमुख त्योहार है. सितंबर 17 को देश में मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा होती है. सिर्फ कारीगरों या फैक्ट्रियों में नहीं, घरों में भी लोग इस दिन विशेष पूजा करते हैं. लोग भले सवाल उठा रहे हैं, लेकिन ये मामला क़ानून और एथिक्स का नहीं बल्कि लोगों के विश्वास और उनकी कड़वी याद का है.
We are having a traditional way of life.