हरिद्वार की गंगा में आखिर कहां से आई रेल पटरी? हर की पैड़ी का नजारा देख लोग हैरान, जानें पूरा मामला
हरिद्वार की हर की पैड़ी पर गंगनहर की सफाई के लिए जल प्रवाह रोके जाने से नदी की तलहटी में पुरानी रेल पटरी दिखाई दी है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
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देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित विश्वप्रसिद्ध हर की पैड़ी इन दिनों एक अनोखे नजारे को लेकर चर्चा में है. आमतौर पर यहां गंगा में स्नान करते श्रद्धालु, पूजा-पाठ और गंगा आरती का भव्य तवीर देखने को मिलती है, लेकिन इस बार घाट का बदला हुआ स्वरूप लोगों का ध्यान खींच रहा है. गंगनहर में सफाई के लिए जल प्रवाह रोके जाने के बाद नदी की तलहटी में पुरानी रेल पटरी दिखाई दी है. इसका वीडियो और फ़ोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
गंगनहर की सफाई से बदला घाट का नजारा
दरअसल, ऊपरी गंगनहर में हर साल निर्धारित अवधि के दौरान सफाई और मरम्मत का काम किया जाता है. इस दौरान पानी का प्रवाह अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है, ताकि नहर में जमा सिल्ट यानी गाद को हटाया जा सके और जरूरी रखरखाव किया जा सके. इस साल भी 20 अक्टूबर की रात से जल प्रवाह बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है. नवंबर के पहले सप्ताह में पानी दोबारा छोड़े जाने की संभावना बताई गई है. पानी कम होने के कारण हर की पैड़ी और आसपास के घाटों का नजारा बदल गया है. जहां सामान्य दिनों में गंगा की धारा के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई देती है, वहां अब नदी की तलहटी और पानी में छिपी कुछ पुरानी संरचनाएं नजर आ रही हैं. हालांकि, जल प्रवाह कम होने से गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है.
आखिर गंगा की तलहटी में कैसे पहुंची रेल पटरी?
जानकरी देते चलें कि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पास दिखाई दी रेल पटरी जैसी संरचना की हो रही है. वायरल वीडियो और तस्वीरों को देखकर लोग जानना चाहते हैं कि नदी के भीतर यह पटरी आखिर आई कहां से. अगर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की बात करें तो इसे अंग्रेजों के दौर की छोटी रेल या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल होने वाले मिनिएचर रेलवे ट्रैक से जोड़कर बताया गया है. हालांकि, इसकी सटीक ऐतिहासिक पहचान, निर्माण का उद्देश्य और इस्तेमाल की अवधि की पुष्टि के लिए विश्वसनीय ऐतिहासिक दस्तावेजों की जरूरत है. इसलिए इसे निश्चित रूप से अंग्रेजों के समय की रेलवे लाइन कहना फिलहाल उचित नहीं होगा.
इतिहास की छिपी निशानी ने बढ़ाई लोगों की जिज्ञासा
हरिद्वार का रोड़ी बेलवाला क्षेत्र समय के साथ काफी बदल चुका है. शहरी विकास, सड़कों और यातायात के विस्तार के बीच पुरानी संरचनाएं धीरे-धीरे आम लोगों की नजरों से दूर होती गईं. पानी के नीचे रहने के कारण यह पटरी जैसी संरचना भी लंबे समय तक दिखाई नहीं देती थी. गंगनहर की सफाई के दौरान जलस्तर घटने से अब यह लोगों के सामने आ गई है. हरिद्वार के पुराने निवासी ऐसे नजारे पहले भी देख चुके हैं, लेकिन दूसरे शहरों से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य बिल्कुल नया है. कई लोग इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं. कुछ लोग इसे शहर के इतिहास की दिलचस्प झलक बता रहे हैं, जबकि अन्य इसके बारे में अधिक जानकारी जानना चाहते हैं.
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बहरहाल, फ़ोटो और वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है. सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफ़ॉर्म पर कोई इस जगह का नाम पूछ रहा है, तो कोई जानना चाहता है कि यहां कभी छोटी रेल कैसे चलती थी. यह नजारा एक बार फिर याद दिलाता है कि ऐतिहासिक शहरों में कई ऐसी निशानियां मौजूद होती हैं, जिनके बारे में आम लोगों को बहुत कम जानकारी होती है.