LIVE कार्यक्रम में जलील हुआ चीन, फिलीपींस के रक्षा मंत्री को पर्ची थमाने की हिमाकत पड़ी भारी, हंस रही पूरी दुनिया
फिलीपींस के रक्षा मंत्री को एक कार्यक्रम में पर्ची थामकर धमकाने की चीन की हिमाकत उसे ही भारी पड़ गई है. मंत्री ने मौका, मौसम और मंच...तीनों का बखूबी इस्तेमाल किया और सरेआम बेइज्जत कर दिया.
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दक्षिण चीन सागर का मुद्दा दशकों से विवादों में रहा है. ये फिलीपींस और चीन के अलावा वियतनाम-चीन के बीच झगड़े की मुख्य वजहों में से एक है. इस समुद्री क्षेत्र को लेकर कई बार झड़पें भी हुईं, UNCLOS का फैसला भी चीन के खिलाफ आया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. वजह है बीजिंग की हठधर्मिता, दादागिरी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की खिलाफअर्जी की आदत.
ऐसे में ये विवाद एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. वजह है ड्रैगन की एक हरकत और उसे जिस तरीके से फिलीपींस के रक्षा मंत्री की ओर से जवाब दिया गया है, वो काफी वायरल हो रहा है.
आपको बता दें कि दक्षिण कोरिया में एक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन की ओर से जो पर्ची का खेल खेला गया वो उसे भारी पड़ गया है. पूरी दुनिया में उसकी किरकिरी हो रही है. दुनियाभर के देश चीन की हिमाकत की आलोचना कर रहे हैं और फिलीपींस की रुख और उसके धौंस को सरेआम खारिज करने, उसे जवाब देने के अंदाज की तारीफ कर रहे हैं.
कोरिया में सरेआम जलील हुआ चीन
दरअसल फिलीपींस के रक्षा मंत्री एक कॉन्फ्रेंस में दक्षिण चीन सागर पर पर विवाद और उसपर आए UNCLOS के फैसले पर बात कर रहे थे, लेकिन चीनी डेलिगेशन में से एक अधिकारी ने उन्हें भरे मंच आकर एक पर्ची दिया, जिसपर लिखा था कि वो अंतरराष्ट्रीय संधि, कोर्ट और खासकर दक्षिण सागर पर आए फैसले को नहीं मानता है. वैसे भी चीन को दूसरी की बात पसंद कहा आती है. उसे तो अपनी दादागिरी करनी है. जैसे वो अपने देश में मुंह बंद कराता है, नैरेटिव को मोल्ड करता है, ठीक उसी तरह उसने फिलीपींस के रक्षा मंत्री का मुंह बंद करने की कोशिश की, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया. पूरी दुनिया में उसकी हरकत और तौर-तरीके बेनकाब हो गए.
क्या है पूरा मामला?
मालूम हो कि मंगलवार को दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में सोल डिफ़ेंस डायलॉग 2026 का आयोजन हुआ. इसमें फिलीपींस के रक्षा मंत्री गिल्बर्टो सी. थियोडोरो जूनियर सहित कई देशों के मेहामानों, विशेषज्ञों और सरकार के मंत्रियों ने भाग लिया. इस दौरान एक सेशन में चीन की ओर से फिलीपींस के रक्षा मंत्री को धमकाने या उनकी जुबान तब्दील करने की हिमाकत हुई. दरअसल जब गिल्बर्टो थियोडोरो चर्चा में अपनी बात रख रहे थे तब उन्हें शख्स ने आकर एक पर्चा थमाया, जिसमें साउथ चाइना सी पर चीन के रुख अंग्रेजी में लिखे हुए थे.
फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने लाइव कार्यक्रम की उड़ाईं धज्जियां!
इस दौर पर्चा मिलने के बाद उन्हें समझने में एक-दो सेकंड का समय लगा. फिर उन्होंने समझा कि माजरा क्या है. इसके बाद गिल्बर्टो रुकते हैं, अपने थॉट्स प्रॉसेस करते हैं और फिर कहते हैं, "मेरे पास एक पर्चा है. मुझे लगता है कि यह चीन की तरफ से है." इसके बाद उन्होंने जो किया वो ही सबसे ज्यादा वायरल है. उन्होंने ना सिर्फ उस पर्चे में लिखी बातें पढ़कर सुनाईं बल्कि हर एक प्वाइंट पर चीन का काउंटर किया और फिलीपींस के रुख और अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संधियों, फैसलों के हवाले से एक-एक का जवाब दिया.
उन्होंने पर्चा पढ़ते हुए कहा, "दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता पर चीन का रुख़ साफ़, एक जैसा और पक्का है. यह मध्यस्थता अंतरराष्ट्रीय क़ानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है."
MAHIYA NAMAN KAYO | Secretary of National Defense Gilberto C. Teodoro, Jr. responded to a note from the Chinese side during the Seoul Defense Dialogue (SDD) 2026 in Seoul, Republic of Korea.#DNDPHL #DiKaPasisiil #SDD2026 pic.twitter.com/fsCRVphkgf
— Department of National Defense - Philippines (@dndphl) September 8, 2026
चीन की हिमाकत उसे ही पड़ी भारी!
"तथाकथित फ़ैसला (फ़िलीपींस के पक्ष में) ग़ैर-क़ानूनी और अमान्य था और इसे मानने की कोई बाध्यता नहीं है. चीन न तो इस फ़ैसले को स्वीकार करता है और न ही इसे मानता है. वह इसका विरोध करता है और इससे जुड़े किसी भी दावे को कभी स्वीकार नहीं करेगा." "चीन इस फ़ैसले को स्वीकार नहीं करेगा", इस वाक्य पर गिल्बर्टो ने कहा, "क्योंकि आप हार गए हैं." इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो फिलीपींस के राष्ट्रीय सुरक्षा के विभाग ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल से भी पोस्ट किया गया है.
उस पर्चे को पढ़ने के बाद फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने सीधे ऑडियंस की ओर रुख किया और सवालिया अंदाज में कहा कि "आप किसी ऐसे देश के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर कैसे पेश आ सकते हैं. यह इस मंच के आयोजकों का अनादर करता है? आप उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि उनके साथ शालीनता से पेश आया जाए?"
फिलीपींस के मंत्री ने चीन को सरेआम जलील किया
दर्शकों से पूछते हैं, "आप किसी ऐसे देश के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर कैसे पेश आ सकते हैं. यह इस मंच के आयोजकों का अनादर करता है? आप उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि उनके साथ शालीनता से पेश आया जाए?"
इसके आगे उन्होंने कहा, "मैं आपसे पूछता हूं, क्या यह सही काग़ज़ है जो मुझे तब दिया जाए जब मुझसे मंच पर कोई सवाल पूछा जा रहा हो? और आप इस तरह के व्यवहार से कैसे निपटेंगे?"
चीन फिर हो गया एक्सपोज!
फिलीपींस के रक्षा मंत्री नी चीन को खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि, "यह व्यवहार न केवल अंतरराष्ट्रीय क़ानून का अनादर करता है बल्कि 'यूएनसीएलओएस को ज़मीन पर फेंकना और उसे रौंदना है', यह उस बुनियादी शिष्टाचार का भी अनादर है जिसे हमारे बहुत ही अच्छे मेज़बान दक्षिण कोरिया और यहां मौजूद बाकी लोगों के प्रति दिखाया जाना चाहिए था. इसलिए, शायद चीन को बुनियादी शिष्टाचार और व्यवहार अपनाने की ज़रूरत है."
पर्चा भेजकर धौंस जमाने की हरकत को फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने "ज़बरदस्ती, दादागिरी और आक्रामकता" बताते हुए कहा कि, "शायद चीन को बुनियादी शिष्टाचार और व्यवहार अपनाने की ज़रूरत है."
'इस कागज को निशानी के तौर पर रखूंगा'
इसके बाद उन्होंने पर्चा देने वाले शख्स की ओर इशारा करते हुए कहा, "मैं इस काग़ज़ को इस बात की निशानी के तौर पर रखूंगा कि चीन कितना बेताब है और आज़ाद लोगों के सामने उसका पक्ष कितना कमज़ोर है. मुझे यह काग़ज़ देने वाले व्यक्ति का बहुत-बहुत धन्यवाद. आपने अभी-अभी अपने देश की बहुत बड़ी सेवा की है."
क्या है दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद?
आपको बता दें कि दक्षिण चीन सागर पर दावे को लेकर फिलीपींस की ओर से दायर एक मामले में 12 जुलाई 2016 को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत गठित मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने अपना फैसला सुनाया था. इस फैसले में चीन के दक्षिण चीन सागर पर व्यापक समुद्री दावों को कानूनी आधारहीन बताया गया था.
न्यायाधिकरण ने साफ कहा था कि दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों, खासकर तथाकथित 'ऐतिहासिक अधिकारों,' का अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई कानूनी आधार नहीं है.
दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है. इस क्षेत्र पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान पूरे या आंशिक दावे करते हैं. इन दावों को लेकर कई बार तटरक्षक और नौसैनिक जहाज आमने-सामने आ चुके हैं, जिससे यह इलाका हिंद-प्रशांत क्षेत्र का सबसे संवेदनशील रणनीतिक केंद्र बन गया है.
दक्षिण चीन सागर को लेकर क्या था UNCLOS का फैसला, जिसे चीन नहीं मानता?
12 जुलाई 2016 को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि चीन के 'ऐतिहासिक अधिकारों' का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है. हालांकि चीन ने उस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और आज भी अपने दावों पर कायम है. वहीं अमेरिका और उसके कई सहयोगी देश लगातार इस फैसले का सम्मान करने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की वकालत करते रहे हैं.
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय सहित अमेरिका की अगुवाई में 12 देशों ने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान बल प्रयोग या दबाव के जरिए नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए. देशों ने दोहराया कि 2016 का फैसला एक ऐतिहासिक और सर्वसम्मत निर्णय था, जो चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री अधिकारों और दावों से जुड़े मामलों में अंतिम, कानूनी रूप से बाध्यकारी और निर्णायक है.
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दक्षिण चीन सागर को चीन ने युद्ध क्षेत्र में किया तब्दील!
चीन पर आरोप लगते हैं कि वो तटरक्षक बल, सैन्य जहाजों और समुद्री मिलिशिया के इस्तेमाल से दूसरे देशों की वैध समुद्री और हवाई गतिविधियों में बाधा डालता है, डराने-धमकाने या उत्पीड़न करने की भी कोशिश करता रहा है.
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इस मुद्दे को लेकर चीन का अंदाज काफी आक्रमक रहा है. उसने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप भी बनाए हैं और मैरिटाइम फोर्स की तैनाती की है. उसने समुद्री क्षेत्र को भी अपने रुख से एक सैन्य क्षेत्र में बदल दिया है. चीन, दक्षिण चीन सागर पर किसी भी संगठन और फोरम के फैसले को मानता ही नहीं है और इस पर अपना दावा करता है.
फिलीपींस को जवाब देने का चीन ने ही दिया ऐतिहासिक मौका
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इस कार्यक्रम में भी यही कुछ करने की कोशिश की गई, जिसका मौका, मौसम और मंच सब देखते हुए अच्छा जवाब दिया गया. फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने चीन 'धौंस जमाने' का आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि एक इंटरनेशनल फ़ोरम में उन्हें चीन का एक पर्चा पकड़ाया गया, जिसमें विवादित समुद्री इलाक़ों पर चीन के बड़े दावों को दोहराया गया था. ये सरासर दक्षिण कोरिया, मेजबान सहित कार्यक्रम का भी अपमान है.