मक्का समझौते के जवाब में इजरायल-ग्रीस की भी डील सील, नेतन्याहू की ऐसी 'चाणक्य नीति', तुर्की का कर दिया हिसाब
इजरायल ने चाणक्य नीति का प्रयोग कर तुर्की का दिमाग ठंडा कर दिया है. नेतन्याहू ने तुर्की के पड़ोसी ग्रीस के साथ 'अकिलीज शील्ड' समझौता कर उसके मक्का समझौते की हवा निकाल दी है. यानी कि शत्रु का शत्रु दोस्त वाली नीति अपनाते हुए एर्दोगान की अकड़ का पूरा बंदोबस्त कर दिया है.
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इजरायल के इतिहास के सबसे बड़े रक्षा निर्यात समझौतों में से एक, 'अकिलीज शील्ड' समझौते पर सोमवार को इजरायल और ग्रीस ने हस्ताक्षर किए. इसके तहत इजरायल, ग्रीस में एक मल्टी-लेयर्ड (कई परतों वाला) रक्षा प्रणाली स्थापित करेगा. इसमें इजरायली सिस्टम आर्किटेक्चर शामिल होगा, जिसमें राफेल के बनाए 'डेविड्स स्लिंग' और 'स्पाइडर' सिस्टम के अलावा इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा बनाया गया 'बराक एमएक्स' सिस्टम शामिल हैं.
मक्का समझौते के जवाब में इजरायल ने ग्रीस से किया रक्षा समझौता
इजरायल और ग्रीस के बीच ये समझौता इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि ना सिर्फ ग्रीस और तुर्की की लंबे समय से दुश्मनी चली आ रही है. वहीं बीते महीने ही तुर्की-सऊदी और पाकिस्तान के बीच मक्का समझौता हुआ, जिसके केंद्र बिंदु में भारत और इजरायल है. एक ओर जहां तुर्की और पाकिस्तान इजरायल को देखना नहीं चाहते हैं, तो वहीं पाकिस्तान की भारत से दुश्मनी है, जिसे बढ़ाने में तुर्की उसकी हथियार, ड्रोन और कूटनीति के जरिए मदद करते हैं.
नेतन्याहू ने तुर्की के खिलाफ चली चाणक्य नीति!
इनके बीच हुए एक समझौते का मूल है कि अगर एक देश पर हमला होता है तो दूसरे देश पर भी इसे स्वाभाविक हमला माना जाएगा. इस लिहाज से देखें तो इजरायल के लिए अलग चुनौती पैदा हो गई. ऐसे में इजरायल ने चाणक्य नीति का इस्तेमाल किया है. आचार्य चाणक्य की मंडला थ्योरी कहती है कि एक राष्ट्र या देश का पड़ोसी उसका स्वाभाविक दुश्मन होता है और उस पड़ोसी का पड़ोसी आपका दोस्त हो सकता है, या उससे आपकी दोस्ती होनी ही चाहिए. क्योंकि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है. इसी नीति पर चलते हुए इजरायल ने ग्रीस के साथ ऐतिहासिक डिफेंस डील कर तुर्की की नींद उड़ा दी है. यानी कि साइप्रस के अलावा अब ग्रीस भी तुर्की की कट्टरपंथी, विस्तारवादी नीति से निपटेगा और उसमें इजरायल हेल्प करेगा.
कैसे इजरायल ने तुर्की, सऊदी, पाकिस्तान के मक्का समझौते की हवा निकाली?
यानी कि अगर ग्रीस पर तुर्की हमले की कोशिश करता है तो इजरायल उसे हर तरह से मदद करेगा. इस लिहाज से ना सिर्फ तुर्की अपनी सीमा में रहेगा बल्कि वो इजरायल पर भी बुरी नजर से देखने की सोचेगा भी नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि वो अगर ऐसा करता है तो उसे साइप्रस और ग्रीस के साथ-साथ इजरायल के तीन मोर्चों पर लड़ना होगा. वहीं अगर पाकिस्कान मोर्चा खोलता है तो उसके लिए पश्चिमी सीमा पर यानी कि भारत के साथ लग रही सीमा के खुलने के चांस बढ़ जाएंगे.
क्या है तुर्की-ग्रीस की लड़ाई?
आपको बता दें कि ग्रीस और तुर्की की दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है. एस ओर जहां ग्रीस दक्षिणी-पूर्वी यूरोप में बाल्कन प्रायद्वीप पर स्थित है तो वहीं वो नाटो के साथ-साथ यूरोपीय संघ का भी सदस्य देश है. ग्रीस भूमध्य सागर से घिरा हुआ देश है, जिसकी राजधानी एथेंस है. उत्तर में अल्बानिया, उत्तरी मैसेडोनिया और बुल्गारिया से सीमा लगती है, जबकि पूर्व में तुर्की से.
मालूम हो कि ग्रीस की सबसे प्रमुख और लंबे समय से चली आ रही कट्टर दुश्मनी उसके पड़ोसी तुर्की से ही है. दोनों देशों के बीच एजियन सागर के द्वीपों, समुद्री सीमाओं, हवाई क्षेत्र और साइप्रस द्वीप को लेकर ऐतिहासिक विवाद हैं.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 1974 में साइप्रस पर तुर्की के सैन्य हस्तक्षेप के बाद संबंध और बिगड़े हैं. मौजूदा समय में भी कभी-कभी सैन्य तनाव और राजनयिक झड़पें होती रहती हैं, हालांकि दोनों नाटो सदस्य हैं.
पाकिस्तान का भी होश रहेगा ठंडा?
ऐसे में देखें तो हालिया मक्का समझौते को देखते हुए ग्रीस ने अब तुर्की को केंद्र में रखकर अपनी रक्षा और सुरक्षा की रणनीति बनानी शुरू कर दी है. इजरायल के साथ उसका अरबों का डील इसी का हिस्सा है. वहीं अब इजरायल की कोशिश मिस्त्र, यूएई, ग्रीस, साइप्रस आदि देशों के साथ मिलकर एक डिफेंस क्वाड बनाने की, ताकि यूएई की सऊदी-ईरान, मिस्त्र की आर्थिक और सैन्य चुनौती, इजरायल की पाकिस्तान, ईरान आदि वहीं, ग्रीस-साइप्रस की तुर्की वाली चुनौती से एक साथ निपटा जा सके.
इजरायली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल अमीर बारम और ग्रीक खरीद निदेशालय के प्रमुख यानिस बोरस ने लगभग तीन बिलियन यूरो (10 बिलियन एनआईएस यानी न्यू इजरायली शेकेल से अधिक) के इस बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए.
क्या है अकिलीज शील्ड डील?
समझौते के तहत, इजरायली तकनीक और सिस्टम पर आधारित एक व्यापक मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम ग्रीस के लिए स्थापित करेगा. यह सिस्टम युद्ध के दौरान रक्षा प्रतिष्ठान को मिले व्यापक ऑपरेशनल अनुभव पर भी आधारित होगा.
इजरायली रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हस्ताक्षर समारोह तेल अवीव में आयोजित की गई. इसमें एसआईवीएटी के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल यायर कोलेस, रक्षा खुफिया एजेंसी के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल डैनी गोल्ड, राफेल के सीईओ योआव तुर्गेमैन, इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के सीईओ गाइ बार लेव, रक्षा खुफिया एजेंसी के वॉल डायरेक्टोरेट प्रमुख मोशे फट्टल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
मंत्रालय ने कहा कि ग्रीस में 'अकिलीज शील्ड' के नाम से जाना जाने वाला यह कार्यक्रम देश के इतिहास के सबसे बड़े रक्षा समझौतों में से एक है. यह पहली बार है जब इजरायली रक्षा मंत्रालय बैलिस्टिक मिसाइलों और हवाई हमलों से लेकर दुश्मन के मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) तक, कई तरह के खतरों के खिलाफ एक संपूर्ण रक्षा प्रणाली प्रदान करेगा.
इजरायली रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 'अकिलीज शील्ड' समझौते में 'डेविड्स स्लिंग' सिस्टम शामिल है, जिसे रक्षा मंत्रालय के एमएपीएटी के "होमा" डायरेक्टोरेट के नेतृत्व में विकसित किया गया है, जिसमें राफेल मुख्य डेवलपर है.
इसमें आईएआई एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज का बनाया 'बराक एमएक्स' सिस्टम; राफेल निर्मित 'स्पाइडर' सिस्टम; आईएआई एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के एल्टा डिवीजन निर्मित एयर कंट्रोल के लिए एमएमआर मल्टी-मिशन रडार; और एक नया राष्ट्रीय कमांड और कंट्रोल सिस्टम शामिल है, जो सभी एयर डिफेंस क्षमताओं को एक जगह केंद्रित करेगा और इसे राफेल के नेतृत्व में विकसित किया जाएगा.
इजरायल की सैन्य ताकत का ग्रीस-साइप्रस दोनों को होगा फायदा?
इसके अलावा, बैठक के दौरान एक और अतिरिक्त डील साइन की गई. यह डील 26 मिलियन यूरो (लगभग 92 मिलियन एनआईएस) की थी, जिसके तहत रणनीतिक जगहों पर ड्रोन से सुरक्षा और मौजूदा डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए राफेल के 'ड्रोन डोम' सिस्टम बेचे जाएंगे.
इजरायल औद्योगिक-सुरक्षा सहयोग भी बढ़ाएगा, जिसमें स्थानीय ग्रीक इंडस्ट्री को जानकारी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करना शामिल है.
इजरायली सरकार ने कहा कि यह प्रोजेक्ट इजरायल और ग्रीस के बीच सुरक्षा सहयोग में एक और अहम पड़ाव है; ग्रीस, पूर्वी भूमध्य सागर में इजरायल का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है. सरकार ने कहा कि पिछले दशक में अपने सबसे बड़े एयर डिफेंस प्रोग्राम के लिए ग्रीस का इजरायली टेक्नोलॉजी को चुनना दोनों देशों के बीच बने गहरे भरोसे को दिखाता है.
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इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा, "कुछ महीने पहले ग्रीस के रक्षा मंत्री डेंडियास के मेहमान के तौर पर मेरी ग्रीस यात्रा, इजरायल और ग्रीस के बीच रणनीतिक संबंधों की गहराई और इसे और मजबूत करने के हमारे साझा संकल्प का एक और सबूत थी.
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बैठक में, हमने दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई. इजरायल और ग्रीस के रणनीतिक हित एक जैसे हैं और वे एक जैसी क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे समय में जब वर्चस्व की चाहत रखने वाले तत्व अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं और क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं, इजरायल और ग्रीस अपने सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करना जारी रखेंगे, और स्थिरता बनाए रखने तथा अपनी सुरक्षा और साझा हितों को मजबूत करने के लिए दृढ़ता से काम करेंगे."