भारत-चीन पर 100% टैरिफ का खतरा! अमेरिकी हाउस में रूस पर प्रतिबंधों का बिल पास, जानें क्या होगा असर
अमेरिकी हाउस में भारत पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति वाला बिल पास हो गया है. अब राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर बाकी हैं. बिल में भारत और चीन का नाम भी खास तौर पर जोड़ा गया है, जिससे टैरिफ लागू होने पर कई वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं. बता दें इस बिल का असर भारत और अमेरिका के रिश्तों पर भी पड़ सकता है.
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रूस और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर बड़े स्तर पर दिखाई देने लगा है. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक बड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. इस बिल का नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' है. बुधवार को हुए मतदान में बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े. अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा. इस बिल के कानून का रूप लेते ही भारत पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता भी साफ़ हो आएगा.
दरअसल, इस कानून की सबसे अहम बात यह है कि इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खोला गया है. राष्ट्रपति ट्रंप को कुछ परिस्थितियों में ऐसे देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है. भारत और चीन उन प्रमुख देशों में शामिल हैं जिन पर इस प्रावधान का असर पड़ सकता है. अमेरिकी हाउस में पेश किए गए बिल में भारत, चीन समेत 10 देशों के नाम स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किए गए थे. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि बिल पास होते ही भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हो गया है. कानून बनने के बाद राष्ट्रपति के पास इस अधिकार का इस्तेमाल करने का विकल्प होगा.
#WATCH | The US Congress has passed the sweeping sanctions bill targeting Russia and Iran, officially named the Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026, with a 262-159 vote in the House.
— ANI (@ANI) September 16, 2026
The bill now sits on President Trump’s desk, with his signature… https://t.co/1vpN1h6P37 pic.twitter.com/MyzDu2KYWX
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश
अमेरिका की ओर से इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाना बताया गया है. यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी सांसदों का मानना है कि रूस की तेल और गैस से होने वाली आय उसके लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराती है. ऐसे में रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले बड़े देशों पर भी दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही है. बिल में रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों से जुड़े प्रतिबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ रूस की प्रतिबंधों से बचने वाली तथाकथित शैडो फ्लीट पर भी कार्रवाई का प्रावधान है. इसका मकसद रूस की उस क्षमता को प्रभावित करना है जिससे वह तेल और अन्य संसाधनों की बिक्री के जरिए राजस्व हासिल करता है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
जानकारी देते चलें कि भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बना. ऐसे में अमेरिकी कानून में रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर संभावित टैरिफ का प्रावधान भारत के लिए अहम माना जा रहा है. अगर आने वाले समय में अमेरिकी राष्ट्रपति भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो इसका असर अमेरिका को भारतीय सामान निर्यात करने वाले कारोबारियों पर पड़ सकता है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और महत्वपूर्ण हो सकती है. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ निश्चित रूप से लगाया जाएगा, क्योंकि कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है, इसे अनिवार्य नहीं बनाता.
डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल
विधेयक को लेकर अमेरिकी संसद में पूरी तरह एक राय नहीं रही. कई डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने पर सवाल उठाए. उनका तर्क है कि इससे कार्यपालिका को व्यापार नीति में काफी बड़ा अधिकार मिल सकता है. इसके बावजूद विधेयक को हाउस में पर्याप्त समर्थन मिला और यह 262-159 के मत से पारित हो गया. हाउस से मंजूरी मिलने के बाद बिल अब राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाएगा. यदि वह इस पर हस्ताक्षर करते हैं तो यह कानून बन जाएगा और राष्ट्रपति को रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों के खिलाफ निर्धारित परिस्थितियों में अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा.
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इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की नजर इसलिए भी रहेगी क्योंकि मामला सिर्फ रूस और अमेरिका के बीच नहीं है. इसका सीधा संबंध ऊर्जा खरीद, भारतीय निर्यात और भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ सकता है. फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 100 प्रतिशत टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन उसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में एक नया कानूनी विकल्प जरूर आ गया है.