एग्रीमेंट है या हेल्थ इंश्योरेंस...सऊदी के साथ धोखा, पाकिस्तान का हूतियों पर हमले से इनकार, बनाया वेटिंग पीरियड का बहाना
पाकिस्तान ने सऊदी को बड़ा धोखा दिया है. उसने अपनी औकात दिखाते हुए यमन के हूतियों के खिलाफ लड़ाई में ‘मक्का रक्षा समझौता’ के तहत शामिल होने की सऊदी अरब की मांग को ठुकरा दिया है और वेटिंग पीरियड का बहाना बनाया है.
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पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी औकात दिखा दी है. उसने बता दिया है कि क्यों पूरी दुनिया उस पर विश्वास नहीं करती है. उसने साबित किया है कि उसकी कथनी और करनी में कितना अंतर है. ऐसा अब सऊदी अरब भी मानने लगा है. 2015 में भी पाकिस्तान ने सऊदियों को यमन में साथ देने से इंकार कर दिया था और अब मक्का समझौते के तहत भी हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमले से इनकार कर दिया है और वेटिंग पीरियड का बनाया बहाना बना लिया है.
पाकिस्तान ने सऊदी अरब को दिया धोखा!
तीन दिन पहले तक सऊदी अरब पर हूती के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की बात करने वाले पाकिस्तान के सुर बदल गए हैं. इस्लामाबाद ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ पिछले महीने हुए मक्का पैक्ट को एक रक्षात्मक गठबंधन करार देते हुए कहा है कि चुकि हूती एक नॉन-स्टेट एक्टर है, वो एक देश की फौज नहीं है, इसलिए वो उसके खिलाफ किसी भी जंग में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं है. इतना ही नहीं उसने कहा कि ये लड़ाई मक्का समझौते पर हस्ताक्षर से पहले के हैं, इसलिए वो इस पर लागू नहीं होगा. उसने कहा किर फिलहाल इसमें किसी अन्य देश को शामिल करने की कोई योजना नहीं है और न ही हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक्शन का कोई इरादा है.
मक्का समझौते के तहत हूतियों पर हमले से पाकिस्तान का इनकार!
कुल मिलाकर देखें तो पाकिस्तान ने सऊदी अरब को फिर से गच्चा दे दिया है. ऐसा लग रहा है कि मक्का समझौता दो देशों के बीच समझौता नहीं बल्कि एक हेल्थ इंश्योरेंस है, जिस पर वेटिंग पीरियड का क्लॉज है, जिसका फायदा कंपनिंया, क्लेम रिजेक्ट करने लिए उठाती हैं, वही कुछ पाकिस्तान कर रहा है.
पाकिस्तान ने इससे पहले पोस्टमैन की तरह सऊदी अरब की चेतावनी ईरान तक पहुंचाई थी. ये वॉर्निंग यमन में ईरान के प्रॉक्सी यानी कि सहयोगी माने जाने वाले हूती विद्रोहियों को काबू में रखने के लिए दी गई थी. हूतियों ने सऊदी अरब ने एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं.
सऊदी अरब की पाकिस्तान ने ठुकराई मांग!
आपको बताएं कि पाकिस्तान ने यमन में लंबे समय से लड़ रहे ईरान के प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ाई में ‘मक्का रक्षा समझौता’ के तहत शामिल होने की सऊदी अरब के अनुरोध को ठुकरा दिया है. इस समझौते के वक्त दावा किया गया था कि अगर एक देश पर हमला होता है तो दूसरे देश पर हमला माना जाएगा.
मक्का समझौते के तहत यमन में सेना भेजने पर पाकिस्तान ने क्या कहा?
ऐसे में सऊदी पर लगातार हो रहे हमलों पर पाकिस्तान और तुर्की का सऊदी की ओर से लड़ना बनता था, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया है. इस्लामाबाद का कहना है कि यह समझौता यमन युद्ध जैसी "पहले से मौजूद किसी शर्त" को कवर नहीं करता है, यह सिर्फ़ उन युद्धों पर लागू होता है जो इस पर साइन होने के बाद शुरू हुए थे, और ये सिर्फ़ सरकारी सैन्य बलों की तरफ़ से हमलों पर लागू होता है (मतलब प्रॉक्सीज़/मिलिशिया पर नहीं).
ट्रंप ने भी यमन के खिलाफ सऊदी की मदद से किया दो बार इनकार!
सऊदी अरब को ट्रंप ने दो बार मना कर चुके हैं. अब पाकिस्तान ने भी मना कर दिया है जबकि मक्का रक्षा समझौता किया ही इसलिए गया था कि एक देश पर हमला समझौते में शामिल देशों पर भी माना जाएगा. हूतियों ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ बड़ा मोर्चा खोलते हुए बाब अल-मंडेब और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को बंद कर रखा है.
इससे पहले 10 सितंबर को पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था था कि सऊदी अरब पर हूती हमले के बाद पाकिस्तान इस समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को किस तरह पूरा करेगा.प्रवक्ता ने कहा, "समझौते का उद्देश्य सदस्य देशों की सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है. समझौते के तहत हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर फिलहाल कोई चर्चा नहीं चल रही है. इस्लामाबाद सऊदी अरब के साथ रक्षा और सुरक्षा मामलों में समन्वय बनाए हुए है, लेकिन समझौते का क्रियान्वयन समय लेगा और उसके विभिन्न आयाम धीरे-धीरे सामने आएंगे."
पाकिस्तान ने क्या बहाना बनाया है?
पाकिस्तान की ओर से ये रुख ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और सऊदी अरब को हूती हमलों का सामना करना पड़ा है. यह सवाल भी पूछा गया कि ऐसी स्थिति में समझौते के तहत उसकी क्या भूमिका होगी.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "उनका देश समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा." हालांकि तत्काल जवाबी हमले की उसकी कोई योजना नहीं है.
दोहराया, "यह मक्का रक्षा समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है. तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सऊदी अरब से जुड़े हर सुरक्षा संकट में पाकिस्तान सैन्य हस्तक्षेप करेगा. सऊदी अरब में उसकी सेना पहले से प्रशिक्षण और रसद सहायता के लिए तैनात है. यह उपस्थिति पुराने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का हिस्सा है. नए समझौते को एक व्यापक ढांचे के रूप में देखा जा रहा है."
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मक्का समझौते को लेकर पहले से ही यह चर्चा रही है कि क्या इसके दायरे को अन्य मुस्लिम देशों तक बढ़ाया जा सकता है. पाकिस्तान ने फिलहाल ऐसी किसी संभावना से इनकार करते हुए कहा है कि समझौते में विस्तार की कोई योजना नहीं है.
क्या है मक्का समझौते को लेकर मौजूदा विवाद!
7 अगस्त को इस्तांबुल में इस्लामाबाद, अंकारा और रियाद के बीच मक्का डिफेंस पैक्ट हुआ था. तीनों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए दावा किया था कि किसी भी एक पर हमला सब पर हमला माना जाएगा. हूती के सऊदी अरब पर हमले के बाद पाकिस्तान ने सख्त आपत्ति जताई थी.
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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि मक्का समझौते को लेकर कोई अस्पष्टता या संदेह नहीं है. बिना उकसावे के हमला या सऊदी अरब तक हमले का विस्तार, निश्चित रूप से इस समझौते को लागू कर देगा.