बलूचिस्तान में पाक आर्मी पर बड़ा अटैक, 23 जवानों के मारे जाने का दावा, कई घायल
पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले के पीछे बलूच लिबरेशन आर्मी का हाथ हो सकता है. जिस मार्ग पर सेना की गाड़ियों को निशाना बनाया गया है वह पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है.
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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षाबलों पर बड़ा हमला हुआ है. यहां लासबेला जिले में सेना के काफिले पर आतंकी हमला हुआ है, जिसमें 23 जवानों की मौत हो गई. जबकि कई घायल हो गए.
पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले के पीछे बलूच लिबरेशन आर्मी का हाथ हो सकता है. आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से BLA ने पाकिस्तानी आर्मी, उसके ठिकानों और उसके मार्गों को निशाना बनाया है. इस बार लासबेला के कशारी इलाके में फ्रंटियर फोर्स की करीब 15 गाड़ियों को घात लगाकर टारगेट किया गया.
BLA ने नहीं ली हमलों की जिम्मेदारी
बताया जा रहा है जिस सड़क मार्ग एन-25 पर सेना की गाड़ियों को निशाना बनाया गया है वह पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है. यह कराची को क्वेटा से जोड़ता है. क्योंकि यह इलाका कराची के बेहद करीब है. हमले के बाद इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. इस हमले को लेकर अभी तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का कोई बयान नहीं आया है.
पाक सुरक्षाबलों पर ये हमला ऐसे समय में हुआ जब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हाल ही में दो अलग-अलग हमलों में आर्मी के जवानों को निशाना बनाया था. इस हमले के पीछे भी BLA का हाथ माना जा रहा है लेकिन बलूच आर्मी ने अभी तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है.
BLA ने Video जारी कर मुनीर को किया था चैलेंज
बलूचिस्तान में BLA और पाक आर्मी के बीच संघर्ष लंबे समय से जारी है. दो अलग-अलग हमलों में पाकिस्तानी सेना के 25 जवानों को मार गिराया है. BLA ने अपनी कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया था. जो एक्शन से भरा है और किसी फिल्म के सीन जैसा लग रहा है. इस वीडियो में धमाके, गोलीबारी और पाकिस्तानी सेना का एक ट्रक जलता हुआ दिख रहा है.
बलोचों के अधिकारों का हनन
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी हूकुमत और सेना के खिलाफ रोष मानवाधिकारों के हनन को लेकर है. हाल ही में अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाली बलोच एक्टिविस्ट महरंग बलोच को जेल में डाल दिया गया. जेल से महरंग ने बलूचिस्तान प्रांत की न्यायपालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका राज्य संस्थानों की सहयोगी की भूमिका निभा रही है और न्याय के मूल सिद्धांतों को कमजोर किया जा रहा है.
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महरंग बलोच ने कहा कि न्यायपालिका ने अपना प्रभाव और जनता का भरोसा पूरी तरह खो दिया है और अब निष्पक्षता खत्म हो चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही पाकिस्तान के इस्लामिक गणराज्य में न्याय है, जहां अदालतें स्वतंत्र फैसला देने के बजाय राज्य संस्थानों के पहले से तय फैसलों को सुनाने की भूमिका निभा रही हैं.