क्या ऑपरेशन सिंदूर की मार भूल गया पाकिस्तान? आजादी के जश्न में डूबे शहबाज ने भारत को दी गीदड़भभकी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घरेलू महंगाई और आर्थिक संकट के बीच भारत को सिंधु जल संधि पर चेतावनी दी. उनके भारत विरोधी बयान को पाकिस्तान की जनता का ध्यान असल समस्याओं से हटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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अगर यह समझना हो कि कोई प्रधानमंत्री अपने देश की जनता का ध्यान असल समस्याओं से कैसे भटका सकता है, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का हालिया भाषण इसका उदाहरण है. एक तरफ भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान पानी के मुद्दे पर दबाव में है, वहीं दूसरी ओर देश महंगाई और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. इसके बावजूद शहबाज शरीफ ने इन गंभीर घरेलू समस्याओं पर बात करने के बजाय एक बार फिर भारत के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी का सहारा लिया. ताकि देश की जनता ख़ुश हो सके.
शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस्लामाबाद में आयोजित 'यादगार-ए-फतह' कार्यक्रम में जनता को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पानी की एक-एक बूंद उसकी रेड लाइन है और अगर भारत अपने रुख से पीछे नहीं हटता, तो पाकिस्तान इसका जवाब देगा. शहबाज शरीफ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान खुद आर्थिक दबाव और महंगाई जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में भारत के खिलाफ तीखे बयान को घरेलू मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
सिंधु जल संधि पर तिलमिलाया पाकिस्तान
जानकारी देते चलें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. इसके बाद से ही पाकिस्तान की ओर से इस मुद्दे पर लगातार तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. इस दौरान इसी साल मई में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. इस कार्रवाई में पाकिस्तान में बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए थे. अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत के साथ सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए कड़ा बयान दिया है. शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान शांति, सम्मान और गरिमा के साथ खड़ा है, लेकिन इसे उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती दी गई, तो जवाब मई 2025 से भी ज्यादा ताकत के साथ दिया जाएगा. हालांकि, मई 2025 के सैन्य तनाव के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी. ऐसे में शरीफ की ओर से दोबारा सैन्य कार्रवाई और ताकत की बात करना क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली बयानबाजी के तौर पर देखा जा सकता है. लेकिन पाकिस्तान को इस बात को याद रखना चाहिए कि भारत ने भी अपना रूख साफ़ कर रखा है कि अगर पाकिस्तान ने कोई हिमाक़त की तो इस बार कारवाई ऐसी होगी की दुनिया के नक़्शे में पाकिस्तान की भोगौलिक स्थिति बदल जाएगी.
ट्रंप का ख़ुश करने की चली चाल
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ख़ुश करने का भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़. शहबाज ने उन्हें भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर का श्रेय देने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने दोनों देशों के बीच समय रहते युद्धविराम कराने में अहम और ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान बची. शरीफ का यह बयान ट्रंप के प्रति पाकिस्तान के झुकाव को दिखाने वाला माना जा रहा है. हालांकि, भारत लगातार इस दावे से इनकार करता रहा है कि मई 2025 में हुए सीजफायर के पीछे किसी अमेरिकी मध्यस्थता की निर्णायक भूमिका थी.
घरेलू मुद्दों पर साधी चुप्पी
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान के पुराने रुख को ही दोहराया. उन्होंने कहा कि कश्मीरियों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा. हालांकि, उनके भाषण में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POK) में सामने आ रहे विरोध प्रदर्शनों और वहां उठ रहे सवालों का कोई जिक्र नहीं दिखा. बलूचिस्तान में सरकार की कार्रवाई और एयरफोर्स से जुड़े हमलों को लेकर भी उन्होंने चुप्पी बनाए रखी. ऐसे में एक तरफ शहबाज शरीफ भारत को पानी और सैन्य कार्रवाई को लेकर चेतावनी देते नजर आए, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के अंदर उठ रहे गंभीर सवालों पर उन्होंने बात नहीं की. इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत विरोधी बयानबाजी के जरिए घरेलू मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है.
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बहरहाल, शहबाज शरीफ के भाषण में भारत को चेतावनी और ट्रंप को श्रेय देने पर जोर रहा, लेकिन पाकिस्तान के भीतर मौजूद गंभीर चुनौतियों पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी. ऐसे में सवाल यही है कि क्या भारत के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी के जरिए पाकिस्तान की जनता का ध्यान महंगाई, आर्थिक संकट और घरेलू असंतोष जैसे मुद्दों से हटाने की कोशिश की जा रही है. अब देखना होगा कि पाकिस्तान सरकार इन आंतरिक चुनौतियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है.