'प्राइवेसी पर समझौता नहीं...', नो-URL मीडिया आर्किटेक्चर से डिजिटल दुनिया बदलने की तैयारी, जानिए ZKTOR की पूरी रणनीति
Softa ने ZKTOR का नो-URL मीडिया आर्किटेक्चर पेश किया है. कंपनी के मुताबिक, 10 महीने के बीटा में भारत समेत चार दक्षिण एशियाई देशों में 10 लाख से ज्यादा यूजर्स जुड़े हैं. कंपनी का लक्ष्य प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर आधारित प्रोफाइलिंग-फ्री सोशल मीडिया तैयार करना है.
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सॉफ्टा (Softa) टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने सोशल सुपर-ऐप ZKTOR में तस्वीर और वीडियो देखने की अनुमति को उनके अनियंत्रित वितरण से अलग रखने वाला नो-URL मीडिया आर्किटेक्चर प्रस्तुत किया है. पिछले दिनों प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में लाइव तकनीकी प्रदर्शन के दौरान संस्थापक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में 10 महीने के मास पब्लिक बीटा में 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हैं. कंपनी के अनुसार भूटान और मालदीव में भी देश-आधारित परीक्षण बढ़ाए गए हैं. इस अवसर पर Softa के सीईओ सुनील कुमार सिंह से ZKtor को लेकर बातचीत की गई.
ZKTOR ने भारत और दक्षिण एशिया को ग्रोथ के लिए माना अहम बाजार
सुनील कुमार सिंह ने आगे कहा कि भारत हमारा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन बेस है, जहाँ ZKTOR को पूरी तरह भारतीयों ने विकसित किया है. दक्षिण एशिया की साझा जरूरतें और भाषाओं व संस्कृतियों की विविधता हमारी पब्लिक टेस्टिंग और क्षेत्रीय विस्तार को दिशा देती हैं, जिससे हम ग्लोबल मार्केट की ओर बढ़ रहे हैं। प्राइवेसी पाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।. हमारा मॉडल प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन, बिहेवियरल ट्रैकिंग या प्रोफाइलिंग के बिना यूजर की पसंद से चलने वाली फीड, लिंक के जरिए मीडिया निकालने को सीमित करने वाला नो यूआरएल मीडिया आर्किटेक्चर और स्थानीय जवाबदेही के साथ देश-आधारित डेटा स्टोरेज को जोड़ता है. हमारा लक्ष्य एआई युग के लिए प्रोफाइलिंग-फ्री सोशल मीडिया बनाना है, जहाँ लोग गरिमा के साथ जुड़ सकें, अपना काम दिखा सकें और कमाई कर सकें. विस्तार से लोगों के अवसर बढ़ें, उनकी निजी जिंदगी पर प्लेटफॉर्म का अधिकार नहीं.
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क्या है कंपनी की अगले 5 साल की रणनीति
उन्होंने कहा कि भारत में हमारी रणनीति एआई युग के हिसाब से रिसर्च और इंजीनियरिंग को सोशल मीडिया, स्थानीय काम और कमाई तथा कारोबार से जोड़ने की है, जिसके केंद्र में प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन है. टियर 2 से 5 के छोटे शहरों पर ध्यान देते हुए Softa ने जिला-स्तरीय हाइपरलोकल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का काम शुरू किया है।. इसमें सोशल नेटवर्क, विज्ञापन, रिसर्च और एमएसएमई को एक साथ जोड़ने के अलावा माइक्रो और छोटे कारोबारों से सहयोग तथा स्थानीय संचालन और जवाबदेही की व्यवस्थाएँ शामिल हैं. दक्षिण एशिया में मास टेस्टिंग के दौरान नेटवर्क के संचालन और गवर्नेंस को भी परखा गया, जिसके शुरुआती निष्कर्ष उत्साहजनक रहे. हमारे दस महीने के बीटा में यूजर्स की संख्या भी दस लाख से अधिक हो गई. इसी आधार पर अगले पाँच साल के भीतर हमारा लक्ष्य भारत के 200 से अधिक जिलों में जमीनी टीमें स्थापित करना, 5,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना, लाखों एमएसएमई को जोड़ना और स्थानीय स्तर पर सिविल सोसाइटी की भागीदारी बढ़ाना है. किसी जिले में हमारी मौजूदगी का मतलब केवल वहाँ यूजर्स होना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों का नेटवर्क बनाने, चलाने और उससे कमाने में भागीदार होना चाहिए। यही है लोगों के लिए इंटरनेट, प्रोफाइलिंग के लिए नहीं.
भारत, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में कैसे करेंगे काम?
हमारा मॉडल एक प्लेटफॉर्म के साथ हर देश के अलग डेटा सिस्टम और स्थानीय जवाबदेही को जोड़ता है. भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में पब्लिक टेस्टिंग का केंद्र डेटा सॉवरेनिटी रहा. प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन पर बना ZKTOR एक साझा एप्लिकेशन लेयर को हर देश के अलग सर्वर क्लस्टर से जोड़ता है. यूजर्स का पर्सनल डेटा मल्टीलेयर एन्क्रिप्शन के साथ उनके अपने देश में स्टोर होता है. अलग-अलग देशों के डेटासेट को मिलाए बिना भी यूजर्स दूसरे देशों के लोगों से जुड़ सकते हैं. डिजाइन में शामिल सुरक्षा उपाय यूजर्स की तकनीकी समझ पर निर्भरता घटाते हैं और लागू कानूनों के मुताबिक काम करने का तकनीकी आधार देते हैं. इनमें, जहाँ लागू हों, डीपीडीपी और जीडीपीआर भी शामिल हैं. स्थानीय संचालन हमारी अपनी देश-स्तरीय टीमें संभालेंगी. चारों देशों में जनरल ग्रीवेंस विंग और विमेन एंड चिल्ड्रन विंग पहले से स्थापित हैं. साझा हाइपरलोकल ढाँचे को स्थानीय भाषाओं, आर्थिक हालात और समुदायों की जरूरतों के हिसाब से ढाला जाएगा, ताकि रोजगार को बढ़ावा मिले, एमएसएमई को सहयोग मिले और सिविल सोसाइटी की भागीदारी बढ़े.
किन क्षेत्रों में दिख रह अवसर
सिंह ने आपनी बातों को रखते हुए आगे बताया कि हमारे लिए सबसे बड़ा अवसर हाइपरलोकल डिजिटल इकोनॉमी में है, जो लोगों, एमएसएमई सहित कारोबारों, स्थानीय सरकारों, शिक्षा संस्थानों और सिविल सोसाइटी को जोड़ती है. हाइपरलोकल विज्ञापन, सोशल मीडिया और बिजनेस सर्विसेज के जरिए हम कारोबारों को ग्राहकों तक पहुँचने, क्रिएटर्स को बाजार पाने और समुदायों को काम के अवसर हासिल करने में मदद करना चाहते हैं. प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन इस मॉडल का आधार है, जो लोगों का अपने डेटा पर नियंत्रण बनाए रखता है. विकसित भारत में हम ऐसे डिजिटलाइजेशन के जरिए योगदान देना चाहते हैं जिसमें सभी की भागीदारी हो और सुरक्षा, डिजिटल आजादी, प्राइवेसी तथा गरिमा साथ बनी रहें. स्थानीय लोग केवल नेटवर्क इस्तेमाल न करें, बल्कि उसे बनाने, चलाने और उससे कमाने में भी भागीदार बनें.
क्या स्थानीय कंपनियों के साथ चल रही बातचीत?
सुनील सिंह ने आगे बताया कि टेक्नोलॉजी को स्थानीय क्षमता और काम-कमाई के अवसरों में बदलने में पार्टनरशिप की अहम भूमिका है. हम भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों और सिस्टम इंटीग्रेटर्स के साथ ऐसा सहयोग चाहते हैं जिससे छोटे शहरों के कारोबारों की जरूरतों के हिसाब से डिजिटल सेवाएँ ढाली और लागू की जा सकें तथा उनके लिए सपोर्ट दिया जा सके. एमएसएमई, विज्ञापन एजेंसियाँ और स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर बाजार की समझ, भाषा संबंधी मदद और जमीनी स्तर पर सेवाएँ देने में योगदान कर सकते हैं. स्थानीय कारोबारों से सहयोग और नेटवर्क संचालन पर काम शुरू हो चुका है. खास पार्टनरशिप की घोषणा उनका दायरा और शर्तें तय होने के बाद करेंगे. प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन के तहत पार्टनर्स की पहुँच केवल उस जानकारी तक सीमित रहेगी जिसकी उनकी सेवाओं को जरूरत है, यूजर्स की ऐसी निजी गतिविधियों तक नहीं जिनका उस सेवा से संबंध नहीं है. हम चाहते हैं कि स्थानीय लोग नेटवर्क लागू करने, चलाने और उससे कमाने में भागीदार बनें.
ZKTOR अपनी प्राथमिकताओं में क्या करेगी शामिल?
उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मेक इन इंडिया में हमारा उद्देश्य केवल भारत में बना ऐप देना नहीं, बल्कि रिसर्च और सिक्योरिटी इंजीनियरिंग की क्षमता विकसित करना है. लिंक, एल्गोरिद्म और विज्ञापन ने पिछले दो दशकों के डिजिटलाइजेशन को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है. हमारा फोकस प्रोफाइलिंग, बिना अनुमति मीडिया निकालने और जरूरत से ज्यादा डेटा एक्सेस की समस्या पर है, खुद लिंक या एल्गोरिद्म पर नहीं. एआई के जरिए फोटो और वीडियो का दुरुपयोग महिलाओं की गरिमा, आजादी और समान भागीदारी के लिए खतरा है. दुनिया के राजनीतिक हालात में अनिश्चितता डेटा सॉवरेनिटी और जवाबदेही से जुड़ी चिंताओं को और गंभीर बनाती है. ZKTOR प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन, बिहेवियरल ट्रैकिंग या प्रोफाइलिंग के बिना यूजर की पसंद से चलने वाली फीड, लिंक के जरिए मीडिया निकालने को सीमित करने वाला नो यूआरएल मीडिया आर्किटेक्चर और स्थानीय जवाबदेही के साथ देश-आधारित डेटा स्टोरेज को जोड़ता है. टेक्नोलॉजी हर दुरुपयोग नहीं रोक सकती. इसलिए तकनीकी सुरक्षा के साथ शिकायतों की स्थानीय भाषाओं में मानवीय समीक्षा और विमेन एंड चिल्ड्रन विंग भी हैं. आत्मनिर्भरता का मतलब स्थानीय जरूरतों और नए जोखिमों के लिए टेक्नोलॉजी डिजाइन करना, टेस्ट करना और लगातार बेहतर बनाना है, साथ ही दुनिया के साथ सहयोग से सीखते रहना भी. हम चाहते हैं कि दुनिया भारत में विकसित टेक्नोलॉजी को उसकी उपयोगिता और भरोसेमंद होने के कारण चुने, ताकि लोग अपनी निजी जिंदगी पर नियंत्रण छोड़े बिना भाग ले सकें.
ZKTOR कैसे होगा दूसरे प्लेटफॉर्म से अलग?
उन्होंने बताया कि ZKTOR का ऐप पूरे सिस्टम तक पहुँचने का जरिया है, पूरा सिस्टम नहीं। हम ऐसा हाइपरलोकल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहे हैं जो सोशल मीडिया, प्राइवेट कम्युनिकेशन, सर्च, एआई असिस्टेंस, विज्ञापन और एमएसएमई को जोड़ता है, लेकिन बातचीत, सर्च और खरीदारी को विज्ञापन-प्रोफाइल बनाने का आधार नहीं बनाता. प्राइवेसी एंड डेटा सेफ्टी बाय डिजाइन एक साझा एप्लिकेशन लेयर, हर देश के अलग डेटा क्लस्टर, काम के उद्देश्य के हिसाब से तय परमिशन और स्थानीय जवाबदेही को जोड़ता है. नो यूआरएल मीडिया आर्किटेक्चर लिंक के जरिए प्रोटेक्टेड फोटो और वीडियो निकालने को सीमित करता है. SNDESH प्राइवेट कम्युनिकेशन की सुविधा देता है। KHOZU की सर्च में सोर्स देखे और परखे जा सकते हैं, जबकि HOLA AI खास कामों में मदद करता है. वीडीएल जोखिमों की पहचान करता है, जबकि शिकायतों पर मानवीय समीक्षा और अपील की व्यवस्था बनी रहती है. यूजर के चुने जिले और भाषाएँ डिस्कवरी को दिशा देते हैं; विज्ञापन विषय, भाषा और इलाके के आधार पर तय होता है. इससे क्रिएटर्स, एमएसएमई और स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर बिना बिहेवियरल प्रोफाइलिंग के जुड़ते हैं। फ्रूगल इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर रीयूज का उद्देश्य लागत कम रखना है. सरकारी ग्रांट या वेंचर कैपिटल लिए बिना विकास करना, आत्मनिर्भरता और डिजाइन व डेटा के इस्तेमाल पर स्वतंत्र नियंत्रण बनाए रखने की हमारी प्रतिबद्धता दिखाता है.
भारत में कंपनी के लिए क्या होगी सफलता?
सुनील सिंह ने एक सवाल के जवाब में यह भी कहा कि हमारा विस्तार चरणों में होगा और उसकी दिशा टेस्टिंग, संचालन की तैयारी और स्थानीय भागीदारी से तय होगी. भारत के 200 से अधिक जिलों में जमीनी टीमें, 5,000 से अधिक रोजगार के अवसर और लाखों एमएसएमई को जोड़ना हमारे पाँच साल के लक्ष्य हैं, अगले 12 से 24 महीनों के वादे नहीं। हमारे लिए प्रगति का मतलब स्थानीय संचालन मजबूत होना, हाइपरलोकल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ना और कारोबारों की भागीदारी बढ़ना है. भारत में सफलता का मतलब ऐसा नेटवर्क है जो आर्थिक तौर पर टिकाऊ हो, स्थानीय लोगों की कमाई में मदद करे, शिकायतों का प्रभावी समाधान दे और शुरुआती रजिस्ट्रेशन के बाद भी उपयोगी बना रहे. हम ग्रोथ को इस आधार पर परखेंगे कि उससे लोग क्या कर पाते हैं, बिना उनकी प्राइवेसी, डेटा सेफ्टी और निजी जानकारी पर उनके नियंत्रण को कमजोर किए.
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बहरहाल, ZKTOR का फोकस सोशल मीडिया को सिर्फ कनेक्टिविटी का माध्यम बनाने के बजाय प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा और हाइपरलोकल अवसरों से जोड़ने पर है. कंपनी का दावा है कि आने वाले वर्षों में वह स्थानीय रोजगार, एमएसएमई और डिजिटल सेवाओं के जरिए एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना चाहती है, जिसमें यूजर्स की भागीदारी के साथ उनकी निजी जानकारी पर नियंत्रण भी बना रहे.