कंटेनर से सड़के सील, 20000 जवान तैनात, इंटरनेट बैन...पाकिस्तान में गृह युद्ध की आहट, इस्लामाबाद छावनी में तब्दील
पाकिस्तान में PTI के मार्च को कुचलने की तैयारी कर ली गई है. पूरे मुल्क को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. इस्लामाबाद और रावलपिंडी में 20000 जवानों की तैनाती की गई है, इंटरनेट का डाउन कर दिया गया है, कंटेनर से सड़कें सील कर दी गई हैं.
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दुनिया भर में देश अपनी सीमाओं पर दुश्मनों को रोकने के लिए दीवारें बनाते हैं, लेकिन हमारे पड़ोस में एक ऐसा महानुभाव मुल्क है, जो अपने ही मुल्क के नागरिकों से डरकर पूरी राजधानी को किराए के डिब्बों में पैक कर चुका है. जी हां! पाकिस्तान ने PTI के लॉन्ग मार्च से निपटने, देश के एक शहर को दूसरे से अलग करने और इमरान खान के समर्थकों को रोकने के लिए कुछ ऐसा ही किया है.
छावनी में तब्दील पाकिस्तान
अगर इस वक्त की सबसे बड़ी खबर की बात करें तो वो पाकिस्तान से आ रही है. यहां सेना और सरकार ने राजधानी इस्लामाबाद को पूरी तरह से मिलिट्री छावनी में तब्दील कर दिया है, सड़कें गायब हो चुकी हैं, चारों तरफ लोहे के डिब्बों (कंटेनर) का कब्जा है और ऐसा लग रहा है मानो पाकिस्तान की शहबाज सरकार अपने ही देश के नागरिकों के खिलाफ जंग लड़ने जा रही है, पीटीआई के कार्यकर्ताओं से आर या पार की तैयारी है.
बता दें कि, इमरान खान की पार्टी PTI के इस्लामाबाद मार्च को हर कीमत पर कुचलने के लिए सरकार ने शहर को सील कर दिया है, रेड जोन से लेकर प्रधानमंत्री आवास तक जाने वाली सड़कों पर कंटेनरों की डबल-लेयर लगाकर भयानक नाकाबंदी कर दी गई है, जो मुल्क दाने-दाने को तरस रहा है, वो अपनी जनता की आवाज दबाने के लिए छावनी का रूप ले चुका है.
पीटीआई के लॉन्ग मार्च के कारण इस्लामाबाद, रावलपिंडी सील
ये किसी दूसरे देश के खिलाफ युद्ध लड़ने की तस्वीरें नहीं हैं, ये पाकिस्तान में हो रहे गृह युद्ध की तस्वीरें है, जहां राजधानी इस्लामाबाद का मौजूदा हाल कुछ ऐसा ही है. पूरे शहर को रातों-रात एक अभेद्य किले और छावनी में बदल दिया गया है, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री आवास की तरफ जाने वाले तमाम रास्तों पर एक नहीं, बल्कि दो-दो लेयर में शिपिंग कंटेनर खड़े कर दिए गए हैं.
सड़कों पर गाड़ियां चलना तो दूर, पैदल चलने की भी जगह नहीं बची है, शाहराह-ए-दस्तूर से लेकर पूरे रेड जोन में सिर्फ लोहे की भयानक दीवारें नजर आ रही हैं, पूरी राजधानी पर इस समय भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों का कब्जा है. शहबाज शरीफ की हुकूमत में इतना खौफ भरा है कि उन्हें लग रहा है कि अगर कंटेनर की एक लेयर टूटी, तो जनता की भीड़ उनकी कुर्सी उखाड़ फेंकेगी. इसलिए सड़कों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है.
PTI के लॉन्ग मार्च को कुचलने की तैयारी
फिलहाल सरकार का मकसद सिर्फ शहर रोकना नहीं, बल्कि PTI समर्थकों के इस मार्च को पूरी तरह से कुचल देना है, पुलिस को खुले आदेश दिए गए हैं कि राजधानी की तरफ बढ़ने वाले किसी भी प्रदर्शनकारी पर कोई तरस न खाया जाए.
'नेट लॉन्चर' जाल फेंकने वाली बंदूकें भी होंगी इस्तेमाल!
सड़कों पर खड़े पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से 'नेट लॉन्चर' जाल फेंकने वाली बंदूकें दिए गए हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों को जानवरों की तरह जाल में जकड़ा जा सके, और पूरे इस्लामाबाद में धारा 144 लगा दी गई है और सड़कों पर 5 लोग भी एक साथ दिख जाएं, तो उन्हें सीधा जेल में ठूंसा जा रहा है, अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, डॉक्टरों की छुट्टियाँ रद्द हैं, मानो सरकार को पता है कि वो अपनी ही जनता पर किस हद तक बल प्रयोग करने जा रही है.
100 करोड़ पाकिस्तानी रुपये खर्च कर पाकिस्तान डिब्बे में बंद!
सोचिये जो पाकिस्तान दुनिया के सामने कंगाली का रोना रोता है, जो IMF के सामने एक-एक डॉलर के लिए नाक रगड़ता है, उसी पाकिस्तान ने इस्लामाबाद को सील करने के लिए 1,500 से ज्यादा कंटेनर किराए पर लिए हैं, हर एक डिब्बे का रोज का किराया 30,000 रुपये है, मार्च आगे खिसकने की वजह से अब इस सुरक्षा और लोहे के बक्सों के घेरे पर 100 करोड़ पाकिस्तानी रुपये फूँके जा रहे हैं.
इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे कासिम खान ने भी संभावित क्रैकडाउन और सेना-रेंजर्स के मूड को देखते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के समर्थकों से 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक सुनियोजित लॉन्ग मार्च के दौरान रावलपिंडी की अदियाला जेल से दूर रहने का आग्रह किया था.
कासिम खान ने आगाह किया कि अदियाला जेल के आसपास भीड़ जुटने पर पाकिस्तानी अधिकारियों को उस जेल पर कार्रवाई करने का मौका मिल सकता है, जिसे वह ‘काउंटर अटैक’ बता रहे हैं. उन्होंने कहा कि इमरान खान वहीं बंद हैं और इस तरह की किसी भी कार्रवाई से उनकी जान को खतरा हो सकता है.
इमरान खान के बेटे ने अडियाला जेल से दूर रहने की अपील की!
कासिम खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि लोगों से 27 सितंबर को अदियाला जेल के पास मार्च या विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश न करने का आग्रह करने के लिए कहा गया है.
उन्होंने कहा, "मैंने सूत्रों से सुना है कि इसका इस्तेमाल प्रतिष्ठान द्वारा उस जेल पर 'काउंटर' हमला करने के बहाने के रूप में किया जा सकता है, जहां मेरे पिता बंद हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है. कृपया विरोध प्रदर्शन के दौरान मेरे पिता के साथ हादसे का उन्हें कोई कारण न दें."
कासिम खान का यह आह्वान पीटीआई के इस्लामाबाद तक सुनियोजित मार्च से पहले आया था, जिसमें उनकी पार्टी के संस्थापक की रिहाई की मांग की जा रही है, जो अगस्त 2023 से जेल में हैं. उनकी पार्टी ने उनकी सजाओं को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटाए जाने के बाद से इमरान खान को कई मामलों का सामना करना पड़ा है, जिनमें राजकीय उपहारों और गैरकानूनी विवाह मामले से जुड़े आरोप शामिल हैं.
पीटीआई के समर्थक, नेता लॉन्ग मार्च से पहले से ही नज़रबंद
पीटीआई के इस्लामाबाद तक इस लॉन्ग मार्च से पहले, पुलिस ने रावलपिंडी डिवीजन में 150 से अधिक पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर अध्यादेश की धारा 3 के तहत हिरासत में लिया है और उन्हें विभिन्न जेलों में बंद कर दिया है. पुलिस रावलपिंडी डिवीजन में पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं की तलाश में घर-घर छापेमारी कर रही है, जिसमें अटक, चकवाल, झेलम, रावलपिंडी और मरी शामिल हैं.
सूत्रों के हवाले से पाकिस्तानी मीडिया डेली डॉन ने बताया कि पुलिस ने 463 पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है. पुलिस इंसाफ स्टूडेंट फेडरेशन और इंसाफ लॉयर्स फोरम के 91 नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नजर रख रही है, जबकि पिछले 20 दिनों में 2,000 से ज्यादा घरों और दफ्तरों की तलाशी ली गई है.
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रावलपिंडी में 10,600 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती!
डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पुलिस ने सड़कें बंद कर दी हैं, जवानों की तैनाती की है और पीटीआई के लॉन्ग मार्च से निपटने के लिए रावलपिंडी डिवीजन के सभी पांच जिलों, अटक, रावलपिंडी, मरी, चकवाल और झेलम में इंतजाम किए हैं. पीटीआई मार्च के दौरान शांति बनाए रखने के लिए रावलपिंडी में 10,600 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा.
इस बीच पाकिस्तान के एक अन्य दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने 23 सितंबर से 5 अक्टूबर तक प्रांत में सार्वजनिक सभाओं पर 13 दिन का प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान, गली, सड़क, हाईवे, मोटरवे या खुली जगह पर पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है.
कई शहरों में इंटरनेट बैन!
पंजाब सरकार ने रावलपिंडी, अटक, झेलम और मियांवाली में सुरक्षा सहायता के लिए पाकिस्तान रेंजर्स की सेवाएं मांगी हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से 27 सितंबर से रावलपिंडी और अटक में चुनिंदा स्थानों पर मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को डाउनग्रेड करने का आग्रह किया है.
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पंजाब प्रांत में आतंकवादी या उग्रवादी समूहों द्वारा 'सार्वजनिक शांति, स्थिरता और जान-माल की सुरक्षा के लिए गंभीर और आसन्न खतरे' को देखते हुए प्रतिबंध लगाए गए हैं.
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गुरुवार को लाहौर हाईकोर्ट (एलएचसी) ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों, उजमा खान और नोरीन नियाजी, के लिए जारी हिरासत आदेशों को तत्काल निलंबित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया.
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यह याचिका अदालत में तब दायर की गई थी, जब पुलिस ने लाहौर के डिप्टी कमिश्नर द्वारा मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (एमपीओ) अध्यादेश की धारा 3 के तहत 30 दिन के हिरासत आदेश के बाद इमरान खान की तीन बहनों, अलीमा खान, नोरीन नियाजी और उजमा खान को गिरफ्तार कर लिया था.