एक और देश में जेन-जी की बड़ी जीत! यूरोप के सर्बिया में छात्रों को मिली सत्ता, राष्ट्रपति वुसिक ने मानी हार
सर्बिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक ने हार मान ली है. कई साल से हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हुए चुनाव में स्टूडेंट लिस्ट यानी कि छात्रों को बहुमत मिल गया है. वुसिक को पुतिन समर्थक माना जाता था. उन्होंने आंतरिक मामलों कथित हस्तक्षेप को लेकर अमेरिकी डीप स्टेट पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
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नेपाल, बांग्लादेश के बाद एक और देश में छात्र प्रदर्शनकारियों के हाथ में सत्ता आ गई है. हालांकि ये एशिया का नहीं बल्कि सेंट्रल यूरोप का देश है. बात सर्बिया की हो रही है, जहां कई महीनों से प्रदर्शन कर रहे युवाओं, छात्रों को बहुमत मिल गई है. राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने हार मान ली है. उन्हें पुतिन का समर्थक माना जाता था.
सर्बिया में जेन जी की बड़ी जीत!
वुसिक भी पुतिन की तरह लंबे समय तक रहने वाले सर्बिया के राष्ट्रपति थे. उन्होंने रविवार को चुनाव में अपनी हार मान ली. उनकी सरकार दो सालों से छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रही थी. सड़कों पर लगाता प्रदर्शन हो रहे थे. हाल में ही हुए चुनाव में वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी का मुकाबला
छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन से था, जैसा कि बांग्लादेश में हुआ था.
सर्बिया की सत्ता में आए छात्र!
सर्बिया सेंट्रल यूरोप के बाल्कन क्षेत्र का देश है. वुसिक ने करीब 14 सालों तक सर्बिया की सत्ता संभाली. उनका सरकार पर पूर्ण नियंत्रण था. हालांकि वो एक दक्षिणपंथी पार्टी के नेता थे, लेकिन उन्हें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन हासिल था. इतना ही नहीं उनकी चीन से भी करीबी रिश्ते रहे. ऐसे में उनका सत्ता से बाहर होना पुतिन और चीन के लिए एक झटके के समान है.
पुतिन समर्थक वुसिक ने मानी हार!
हालांकि रूसी राष्ट्रपति ने खुद को सत्ता से हटने और पिछले कई महीनों से हो रहे प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दिया. भारी दबाव के बीच उन्होंने बीते महीने चुनाव का ऐलान किया था. छात्र आंदोलनों के बीच ही चुनाव में भारी मतदान हुआ. वुसिक की पार्टी 'सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' (SNS) और विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच मुकाबले में उनकी हार हुई. छात्रों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप लगाया था. सर्बिया में छात्रों को काफी समर्थन मिला.
सर्बिया के 64 लाख मतदाता 250 सदस्यीय संसद के लिए अपने प्रतिनिधि चुन रहे थे. हार स्वीकारते हुए वुसिक ने कहा कि उनकी पार्टी के अनुमान के मुताबिक, युवाओं के समर्थन वाली 'स्टूडेंट्स लिस्ट' को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को लगभग 105 सीटें मिल सकती हैं. ऐसे में उन्होंने अपनी हार स्वीकार ली है.
वुसिक ने स्वीकारी हार
आपको बता दें कि इस चुनाव में 64 लाख मतदाताओं ने 50 सदस्यीय संसद के लिए अपने प्रतिनिधि का चुनाव किया. अपनी हार स्वीकारते हुए वुसिक ने कहा कि उनकी पार्टी के अनुमान के मुताबिक, युवाओं के समर्थन वाली 'स्टूडेंट्स लिस्ट' को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को लगभग 105 सीटें मिल सकती हैं. इसी कड़ी में उन्होंने अपनी हार स्वीकार कर ली.
अमेरकी डीप स्टेट पर वुसिक ने लगाया हस्तक्षेप का आरोप
वुसिक ने पिछले कई सालों से हो रहे प्रदर्शनों और धरनों के लिए अमेरकी डीप स्टेट को जिम्मेदार ठहराया. अपनी पार्टी के चुनावी कार्यक्रम में समर्थकों को संबोधित करते हुए वुसिक ने कहा, 'स्टूडेंट्स लिस्ट जीत गई है.' इस दौरान उन्होंने SNS पार्टी की हार के लिए सर्बिया की स्वतंत्र मीडिया, कुछ यूरोपीय देशों के कथित हस्तक्षेप और अमेरिकी डीप स्टेट को जिम्मेदार ठहराया है.
2024 में हुई थी प्रदर्शनों की शुरुआत
मालूम हो कि सर्बिया में यह प्रदर्शन भ्रष्टाचार और बढ़ती तानाशाही के खिलाफ शुरू हुए थे. करीब 14 साल से सत्ता पर काबिज वुसिक के खिलाफ भारी सत्ता विरोधी लहर देखी जा रही थी. वुसिक के खिलाफ साल 2024 में नोवी साद शहर में ट्रेन स्टेशन की कैनोपी गिरने से 16 लोगों की मौत के बाद ही प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी.
सर्बिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिक ने बीते महीने 11 सितंबर को कहा था कि वह इस्तीफा दे देंगे और फिर 25 अक्टूबर को होने वाले संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री के लिए एक आम नागरिक के तौर पर प्रचार करेंगे. उन्होंने यह बयान नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार के लिए नए उपायों को पेश करने के दौरान, स्थानीय मीडिया के इस्तीफे की योजना से जुड़े सवाल के जवाब में दिया था.
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पिछले महीने वुसिक ने किया था इस्तीफा देने का ऐलान
सर्बियाई न्यूज एजेंसी तांजुग के अनुसार, वुसिक ने कहा कि वह इस महीने अमेरिका में अपनी आधिकारिक गतिविधियों को पूरा करने के बाद इस्तीफा देंगे. उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा दूंगा और फिर एक आम नागरिक के तौर पर प्रचार करूंगा, जिसके लिए कानून मुझे बाध्य नहीं करता. मैं एक आम आदमी और एक आम नागरिक के तौर पर जाना चाहता हूं."
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न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, वुसिक ने इसके बाद संसद भंग करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए और 25 अक्टूबर को समय से पहले संसदीय चुनाव कराने का ऐलान किया. उन्होंने टेलीविजन पर दिए गए संबोधन में यह घोषणा करते हुए कहा कि इस फैसले का मकसद लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनाव को कम करना और देश के भविष्य पर मतदाताओं को स्पष्ट रूप से अपनी राय देने का मौका देना है.
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उन्होंने कहा कि हमें ऐसे चुनाव परिणाम चाहिए जो साफ तौर पर जनता का जनादेश तय करें और यह दिखाएं कि सर्बिया किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. वुसिक अप्रैल 2017 में राष्ट्रपति चुने गए थे और अप्रैल 2022 में दोबारा चुने गए. सर्बिया के संविधान के तहत, राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल का होता है.