वॉकी-टॉकी के विज्ञापनों में चूक पड़ी भारी, होगर टेक्नोलॉजीज पर ₹1 लाख की पेनल्टी
Hogar Technologies Penalty: रविवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आदेश CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में पारित किया गया. यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर वॉकी-टॉकी यानी पर्सनल मोबाइल रेडियो की बिक्री और प्रचार के दौरान उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने से जुड़ी है.
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Walkie-Talkie Rules: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने वॉकी-टॉकी (Walkie Talkie) के विज्ञापनों और उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में जरूरी जानकारी नहीं देने के मामले में होगर टेक्नोलॉजीज के खिलाफ कार्रवाई की है. रविवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह आदेश CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता में पारित किया गया. यह कार्रवाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर वॉकी-टॉकी यानी पर्सनल मोबाइल रेडियो की बिक्री और प्रचार के दौरान उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने से जुड़ी है. प्राधिकरण का कहना है कि किसी भी उत्पाद के बारे में अधूरी या भ्रामक जानकारी देना अनुचित व्यापार गतिविधि के अंतर्गत आ सकता है. इसलिए कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे अपने उत्पादों का विज्ञापन करते समय उससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण शर्तों और नियमों की जानकारी ग्राहकों को स्पष्ट रूप से दें.
वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग में क्या कमी पाई गई?
CCPA ने होगर टेक्नोलॉजीज की वेबसाइट पर उपलब्ध वॉकी-टॉकी के अलग-अलग मॉडल के विज्ञापनों और उत्पादों की जानकारी की जांच की. इस दौरान प्राधिकरण ने पाया कि वेबसाइट पर कई उत्पादों की ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी, उनके इस्तेमाल के लिए जरूरी लाइसेंस की शर्तों और संबंधित सरकारी मंजूरियों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी. इस तरह की कमी से ग्राहक यह समझ सकते हैं कि वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी वॉकी-टॉकी को बिना किसी विशेष अनुमति के इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि वास्तविकता में ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ रेडियो उपकरणों को इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना और संबंधित मंजूरी लेना आवश्यक होता है. CCPA ने इसी बात पर जोर दिया कि ग्राहकों को उत्पाद खरीदने या उसका इस्तेमाल करने से पहले उसके कानूनी इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी गलतफहमी में आकर खरीदारी न करें.
किन वॉकी-टॉकी को लाइसेंस से छूट मिलती है?
नियमों के अनुसार, कुछ कम शक्ति वाले वायरलेस रेडियो उपकरणों को निर्धारित शर्तों के तहत इस्तेमाल करने के लिए लाइसेंस से छूट दी गई है। इसमें 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज की तय फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करने वाले पर्सनल मोबाइल रेडियो भी शामिल हैं.. हालांकि, यह छूट केवल निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार ही लागू होती है. जो वॉकी-टॉकी इस फ्रीक्वेंसी रेंज से बाहर काम करते हैं, उन पर संबंधित नियामकीय नियम लागू हो सकते हैं और उनके लिए जरूरी अनुमति या प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ सकती है. इसलिए सभी वॉकी-टॉकी को एक जैसा मानना सही नहीं है. कंपनियों को अपने उत्पादों की वास्तविक तकनीकी विशेषताओं के साथ यह भी बताना चाहिए कि उनके इस्तेमाल पर कौन-से नियम लागू होते हैं और ग्राहक को किन शर्तों का पालन करना होगा.
कंपनी ने अपनी सफाई में क्या कहा?
इस मामले में होगर टेक्नोलॉजीज ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि उसके पास वैध डीलर पजेशन लाइसेंस (DPL) है..कंपनी ने यह भी दावा किया कि संबंधित उपकरणों के लिए जरूरी इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं. इसके अलावा, कंपनी ने बताया कि उसकी वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य उत्पादों से जुड़ी जानकारी देना और संभावित ग्राहकों से संपर्क स्थापित करना है.. कंपनी के अनुसार, वेबसाइट पर सीधे ऑनलाइन खरीदारी करने की सुविधा नहीं दी गई है. यानी ग्राहक वेबसाइट पर उत्पादों के बारे में जानकारी देख सकते हैं, लेकिन वहीं से सीधे भुगतान करके सामान खरीदने की व्यवस्था नहीं है. हालांकि, CCPA ने कंपनी की इन दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद स्पष्ट किया कि लाइसेंस और जरूरी प्रमाणपत्र होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी विज्ञापनों में महत्वपूर्ण जानकारी देने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है. ग्राहकों को उत्पाद के बारे में पूरी और सही जानकारी देना अलग से जरूरी है.
ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा नहीं होने से कंपनी को छूट नहीं
CCPA ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि किसी वेबसाइट पर शॉपिंग कार्ट या ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होना, उसे उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे से बाहर नहीं करता. यदि किसी वेबसाइट पर उत्पादों का प्रचार किया जा रहा है और वहां दी गई जानकारी ग्राहकों को गुमराह कर सकती है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापनों के मामलों में यह देखा जाता है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सही और जरूरी जानकारी दी गई है या नहीं. कंपनी अपने उत्पादों को सीधे बेचती हो, किसी डीलर के माध्यम से बेचती हो या केवल ग्राहकों को जानकारी देकर उनसे संपर्क करती हो, उसे लागू नियमों का पालन करना होता है. प्राधिकरण के अनुसार, उत्पाद की बिक्री का तरीका बदलने से विज्ञापन में सही जानकारी देने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती.
ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी हो चुकी है कार्रवाई
वॉकी-टॉकी की बिक्री से जुड़े इस मामले में CCPA पहले भी कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है. प्राधिकरण ने खुद संज्ञान लेते हुए उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जांच शुरू की थी, जहां जरूरी नियामकीय जानकारी के बिना बड़ी संख्या में वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग की गई थी. जांच के दौरान विभिन्न प्लेटफॉर्म पर नियमों का पालन नहीं करने वाली 16,970 से अधिक लिस्टिंग की पहचान की गई. इसके बाद अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो, मेटा के फेसबुक मार्केटप्लेस, जियोमार्ट, इंडिया मार्ट और ट्रेडइंडिया समेत कुल 13 ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस जारी किए गए. इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचे या प्रचारित किए जाने वाले वॉकी-टॉकी के बारे में ग्राहकों को जरूरी कानूनी और तकनीकी जानकारी मिले. इससे उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पाद खरीदने से पहले उनके इस्तेमाल से जुड़े नियम समझने में मदद मिल सकती है.
अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश, 58 लाख रुपये का जुर्माना
CCPA के अनुसार, इस मामले में अब तक 12 कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किए जा चुके हैं. वॉकी-टॉकी से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार गतिविधियों के लिए कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. हालांकि, प्राधिकरण की कुछ कार्रवाइयों और आदेशों को संबंधित कंपनियों ने न्यायिक मंचों पर चुनौती भी दी है.इनमें अमेजन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्लिपकार्ट इंटरनेट और मेटा प्लेटफॉर्म्स जैसी कंपनियां शामिल हैं. इससे साफ है कि प्राधिकरण इस मामले को केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं मान रहा, बल्कि विज्ञापनों में पारदर्शिता और ग्राहकों को सही जानकारी देने को भी महत्वपूर्ण मानता है. CCPA की इस कार्रवाई से ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों को यह संदेश मिलता है कि किसी उत्पाद के लिए जरूरी मंजूरी होना पर्याप्त नहीं है. उसके विज्ञापन और लिस्टिंग में लागू नियमों, लाइसेंस की शर्तों और इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी जानकारी भी साफ तौर पर देनी होगी, ताकि उपभोक्ताओं को गलत जानकारी के आधार पर फैसला न लेना पड़े.
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Input -IANS