'साम्राज्य मिट गए, सदियां गुजर गईं, लेकिन भारत कायम है...', अमीराती एक्सपर्ट अमजद ताहा ने लिख डाली हिंदुस्तान की शौर्यगाथा!
अमीराती एक्सपर्ट अमजद ताहा ने भारत की तारीफ में कुछ ऐसा लिखा है कि हिंदुस्तानी गदगद हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि वो अरबी, मुसलमान और अमीराती हैं, लेकिन उन्हें उस भारत से प्रेम हो जो आज भी अटूट खड़ा है.
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अमीराती एक्सपर्ट अमजद ताहा ने दुनिया को हिंदुस्तान का दम अपने शब्दों के माध्यम से दिखाया है. उन्होंने दो टूक कहा कि साम्राज्य मिटे, सरहदें बदलीं, पर भारत अमर है, भारत अपनी कहानियां आज भी कह रहा है, विरासत, सभ्यता अटूट है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा: "मैं अरब हूँ। मैं मुसलमान हूँ। मैं अमीराती हूँ। 🇦🇪 और मैं भारत से प्रेम करता हूँ। 🇮🇳 मुझे उस भारत से प्रेम है जिसने मानवता को उपनिषद और भगवद्गीता, रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रंथ दिए; उस भारत से, जिसने आत्मा, कर्तव्य, काल और अनंतता पर उस समय चिंतन किया था, जब हमारी आधुनिक दुनिया ने ऐसे प्रश्नों को “दर्शन” कहना भी नहीं सीखा था..."
"मुझे नालंदा और सिंधु घाटी का भारत प्रिय"
ताहा ने लिखा, "...मुझे नालंदा और सिंधु घाटी का भारत प्रिय है; संस्कृत और तमिल का भारत, गणित और खगोलशास्त्र का भारत; वह भारत, जहाँ मंदिर मानो पत्थरों पर उकेरी गई कविताएँ हों, और जहाँ कहानियाँ दादा-दादी और नाना-नानी से बच्चों तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रहती हैं। मुझे उस भारत से प्रेम है जहाँ हिमालय बादलों को छूता है, केरल मानसून को अपने भीतर समेट लेता है, राजस्थान रेगिस्तान को रंगों में बदल देता है, और जहाँ हज़ारों भाषाएँ आज भी अपने-अपने अंदाज़ में एक ही बात कहती हैं: यह मेरा घर है।"
'भारत की सादगी में छिपी खुशियां भी उतनी ही प्रिय हैं'
भारत के खान-पान और आतिथ्य की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि, "मुझे भारत की सादगी में छिपी खुशियां भी उतनी ही प्रिय हैं: मसाला डोसा और सांभर, इडली, पनीर, दाल, बिरयानी और चाय। क्योंकि भारत हज़ारों वर्षों का इतिहास केले के एक पत्ते पर परोसकर भी मुस्कुराते हुए पूछ सकता है: थोड़ा और लेंगे? शायद इसीलिए, एक अमीराती होने के नाते, भारत मुझे कभी पूरी तरह पराया नहीं लगता।"
सदियों से हमारे पूर्वज उसी हिंद महासागर के आर-पार एक-दूसरे की ओर देखते आए हैं। हमारे खाड़ी तटों से मोती भारत की ओर जाते थे, और हवाएँ वहाँ से मसाले, कपड़े, विचार और कहानियाँ लेकर हमारे तटों पर लौटती थीं।
"बहुत कम राष्ट्रों को इतनी प्राचीन सभ्यता विरासत में मिली है"
"अरब और भारत के बीच का समुद्र कभी दूरी नहीं था। वह एक संवाद था। बहुत कम राष्ट्रों को इतनी प्राचीन सभ्यता विरासत में मिली है, जो आज भी इतनी जीवंत हो। साम्राज्य मिट गए। सदियाँ गुज़र गईं। सरहदें बदल गईं, लेकिन भारत अपनी कहानियाँ सुनाता रहा...उसकी प्रार्थनाओं ने भाषाएं बदलीं। उसके व्यंजन पीढ़ियों का सफ़र करते रहे। उसकी पुस्तकों ने राजवंशों को जाते देखा और स्वयं जीवित रहीं। उसके दर्शन ने सहस्राब्दियों को पार कर लिया।
मैं अरब हूँ। मैं मुसलमान हूँ। मैं अमीराती हूँ। 🇦🇪 और मैं भारत से प्रेम करता हूँ। 🇮🇳 मुझे उस भारत से प्रेम है जिसने मानवता को उपनिषद और भगवद्गीता, रामायण और महाभारत जैसे महान ग्रंथ दिए; उस भारत से, जिसने आत्मा, कर्तव्य, काल और अनंतता पर उस समय चिंतन किया था, जब हमारी आधुनिक दुनिया ने ऐसे प्रश्नों को “दर्शन” कहना भी नहीं सीखा था। मुझे नालंदा और सिंधु घाटी का भारत प्रिय है; संस्कृत और तमिल का भारत, गणित और खगोलशास्त्र का भारत; वह भारत, जहाँ मंदिर मानो पत्थरों पर उकेरी गई कविताएँ हों, और जहाँ कहानियाँ दादा-दादी और नाना-नानी से बच्चों तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रहती हैं। मुझे उस भारत से प्रेम है जहाँ हिमालय बादलों को छूता है, केरल मानसून को अपने भीतर समेट लेता है, राजस्थान रेगिस्तान को रंगों में बदल देता है, और जहाँ हज़ारों भाषाएँ आज भी अपने-अपने अंदाज़ में एक ही बात कहती हैं: यह मेरा घर है। और मुझे भारत की सादगी में छिपी खुशियाँ भी उतनी ही प्रिय हैं: मसाला डोसा और सांभर, इडली, पनीर, दाल, बिरयानी और चाय। क्योंकि भारत हज़ारों वर्षों का इतिहास केले के एक पत्ते पर परोसकर भी मुस्कुराते हुए पूछ सकता है: थोड़ा और लेंगे? शायद इसीलिए, एक अमीराती होने के नाते, भारत मुझे कभी पूरी तरह पराया नहीं लगता। सदियों से हमारे पूर्वज उसी हिंद महासागर के आर-पार एक-दूसरे की ओर देखते आए हैं। हमारे खाड़ी तटों से मोती भारत की ओर जाते थे, और हवाएँ वहाँ से मसाले, कपड़े, विचार और कहानियाँ लेकर हमारे तटों पर लौटती थीं। अरब और भारत के बीच का समुद्र कभी दूरी नहीं था। वह एक संवाद था। बहुत कम राष्ट्रों को इतनी प्राचीन सभ्यता विरासत में मिली है, जो आज भी इतनी जीवंत हो। साम्राज्य मिट गए। सदियाँ गुज़र गईं। सरहदें बदल गईं। लेकिन भारत अपनी कहानियाँ सुनाता रहा। उसकी प्रार्थनाओं ने भाषाएँ बदलीं। उसके व्यंजन पीढ़ियों का सफ़र करते रहे। उसकी पुस्तकों ने राजवंशों को जाते देखा और स्वयं जीवित रहीं। उसके दर्शन ने सहस्राब्दियों को पार कर लिया। और फिर भी, हज़ारों वर्षों के बाद, हर सुबह भारत जागता है और आज भी उतना ही विशिष्ट, उतना ही जीवंत, उतना ही भारत है। शायद यही भारत का सबसे बड़ा चमत्कार है। कुछ देशों के पास इतिहास होता है। भारत की धड़कनों में सभ्यता बसती है। एक अमीराती दिल से, सम्मान, प्रशंसा और प्रेम के साथ। 🇦🇪❤️🇮🇳
— Amjad Taha أمجد طه (@amjadt25) October 19, 2026
अंत में ताहा ने लिखा "और फिर भी, हज़ारों वर्षों के बाद, हर सुबह भारत जागता है और आज भी उतना ही विशिष्ट, उतना ही जीवंत, उतना ही भारत है। शायद यही भारत का सबसे बड़ा चमत्कार है। कुछ देशों के पास इतिहास होता है भारत की धड़कनों में सभ्यता बसती है। एक अमीराती दिल से, सम्मान, प्रशंसा और प्रेम के साथ।" 🇦🇪❤️🇮🇳
आपको बता दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब अमजद ताहा ने ऐसी कोई बात लिखी हो. उन्होंने हाल में ही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में अद्भत जज्बा और बहादुरी दिखाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार की तारीफ की और लिखा था कि कैप्टन स्मित मच्छार को सलाम. चाकू लगने और घायल होने के बावजूद, वह डटे रहे.
"अर्जुन" जैसा साहस और कर्तव्य के समय "हनुमान" जैसा संकल्प
खतरे के समय "अर्जुन" जैसा साहस और कर्तव्य के समय "हनुमान" जैसा संकल्प दिखाते हुए, उन्होंने मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाज़ा खोला और यात्रियों और क्रू को बड़ी दुर्घटना टालने का मौका दिया. उन्होंने करीब 174 लोगों की जान बचाने में मदद की. आज रात, UAE से लेकर भारत और इज़राइल तक, लोग आभार व्यक्त करते हुए एकजुट हैं और कैप्टन मच्छार के जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना कर रहे हैं. वह अपने यात्रियों, एविएशन इंडस्ट्री और हर जगह के लोगों के लिए एक हीरो हैं.
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अमजद ताहा हिंदू फोबिया और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का भी बखूबी काउंटर करते नजर आते हैं. इतना ही नहीं प्रवासी भारतीयों के यूएई के विकास के योगदान को सराहते हुए वो कट्टरपंथी इस्लाम की आलोचना करते हैं. इतना ही नहीं वो पॉलिटिकल इस्लाम और मुस्लिम ब्रदरहुड पर बैन लगानी की भी मांग करते हैं. वो कश्मीर जाकर पाकिस्तान के झूठ और प्रपंच की भी हवा निकालते हैं और पाकिस्तानी ट्रोल्स के निशाने पर रहते हैं. इसके बावजूद वो पीछे नहीं हटते हैं.