सऊदी में जिस स्वीटी को मिली मौत की सजा, उसके पिता बोले-जेल में, जिंदा है बेटी! नजरूल केस में सामने आया पाकिस्तानी एंगल
सऊदी में जिस 'स्वीटी' को मौत की सजा मिलने की खबरें थीं, उसके परिवार ने बड़ा दावा किया हुए कहा है कि उनकी बेटी अभी जिंदा है और जेल में बंद है। वहीं दूसरी तरफ, नजरूल केस में अब एक चौंकाने वाला 'पाकिस्तानी एंगल' सामने आ गया है.
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सऊदी अरब ने 14 अक्टूबर को दो बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर मक्का की एक मस्जिद में ‘अनैतिक हरकत’ के आरोप में सजा-ए-मौत दे दी. इनमें से एक 25 साल की महिला सिटी (स्वीटी) अख्तर थी और दूसरा 22 साल का पुरुष नजरुल इस्लाम. हालांकि, सजा के 9 दिन बाद भी यह पता नहीं चल पाया है कि दोनों को सजा कैसे दी गई - फांसी या सिर कलम करके (बीहेडिंग) मौत के घाट उतारा गया.
स्वीटी और नजरूल की मौत की सजा मामले में क्या पता चला?
इसी बीच परिवार की ओर से दोनों के बारे में कई नई जानकारियों का पता चला है. एक ओर जहां महिला के परिवार वालों को अब तक यह पता नहीं है कि जिस सिटी अख्तर को मौत की सजा दी गई है, वह वाकई उन्हीं की बेटी है या कोई और, क्योंकि जिस महिला की मौत की खबर मीडिया में चल रही है उसकी तस्वीर सिटी या स्वीटी से मिलती नहीं है. लेकिन, नाम वही है जिसकी लिस्ट बांग्लादेशी दूतावास को सौंपी गई है और मीडिया में आई है.
सबसे पहले सऊदी अरब की मीडिया ने बीते 14 अक्टूबर को मौत की सजा पाई महिला का नाम सिटी अख्तर बताया था, लेकिन बांग्लादेश के ब्यूरो ऑफ मैनपावर एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग, यानी BMET ने स्पष्ट किया कि जिस महिला को सजा हुई है उसका नाम सिटी नहीं, स्वीटी अख्तर है और वह टंगाइल जिले के माहेर छावली गांव की रहने वाली थी.
स्वीटी का जन्म 11 अगस्त 2001 को हुआ था और वह एक तलाकशुदा महिला थी. वह 5 बहनों में सबसे छोटी थी, जिसके पिता फजल मियां एक दिहाड़ी मजदूर हैं. फजल मियां ने बताया कि 5 साल पहले उन्होंने स्वीटी की शादी की थी, लेकिन दो साल बाद ही उसका तलाक हो गया.
स्वीटी अख्तर के पिता और परिवार का नया दावा
5 फरवरी 2023 को रिक्रूटमेंट एजेंसी एस राणा ट्रेडिंग इंटरनेशनल के जरिए स्वीटी सऊदी अरब गई. वहां उसे ‘अल मजल अल अरबी ग्रुप’ नाम की एक कंपनी में काम मिल गया, जिसके तहत वह मक्का की मस्जिद में सफाई का काम करने लगी. हालांकि, इसके 6 महीने बाद ही पता चला कि उसे जेल हो गई है. स्वीटी जेल से ही हर 15-20 दिन में फोन किया करती थी.
जहां तक स्वीटी की गिरफ्तारी की बात है, उसकी बहन ब्यूटी ने जो जानकारी दी उसके मुताबिक, स्वीटी कई लड़कियों संग एक ही कमरे में रहा करती थी. सबने मिलकर गैरकानूनी तरीके से गाड़ी खरीदी थी. इसके बाद मकान मालिक ने सभी को गिरफ्तार करा दिया. इसके बाद पता नहीं चला कि क्या हुआ. बांग्लादेशी अखबार ‘द डेली स्टार’ ने बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास के हवाले से बताया कि स्वीटी को 2 अगस्त 2023 को हिरासत में लिया गया. उसके खिलाफ व्यभिचार, यानी एडल्टरी का केस दर्ज किया गया और फिर जेद्दा की महिला जेल में डाल दिया गया.
'स्वीटी जिंदा है, जेल में है, तस्वीर मेल नहीं खाती'
हालांकि, परिवार किसी साज़िश का दावा कर रहा है. परिवार का कहना है कि उनकी बेटी स्वीटी के साथ कोई साजिश हुई है. परिवार का कहना है कि जिस स्वीटी की तस्वीर मीडिया के जरिए चर्चा में है, वह उनकी बेटी से बिल्कुल मेल नहीं खाती. उनकी बेटी स्वीटी सऊदी की जेल में है और जिंदा है. एक ओर जहां स्वीटी की बहन मकान मालिक और गाड़ी को लेकर दावा कर रही है, तो वहीं पिता फजल मियां का कहना है कि, ‘दो साल पहले स्वीटी और उसके साथ रहने वाली लड़कियों के बीच झगड़े के बाद उसे भी झूठे आरोप में जेल भेज दिया गया. इसके बाद उससे एक साल तक कोई बात नहीं हुई. फिर उसका फोन आने लगा. पिछले मंगलवार, 13 अक्टूबर को मेरी बात हुई थी. उसने बताया कि वह दो महीने बाद घर लौट आएगी. अगले दिन उसकी मौत की खबर आ गई. जो तस्वीर छपी है, वह बेटी से मेल नहीं खाती.’
स्वीटी को क्यों हुई जेल, परिवार ने क्या बताया?
इस संबंध में बांग्लादेशी अधिकारियों ने कहा कि अगर मिर्जापुर की स्वीटी को ही मौत की सजा दी गई है, तो विदेश मंत्रालय डेड बॉडी के बारे में बताएगा. हालांकि, अभी साफ तौर पर कोई जानकारी नहीं है.
वहीं, बांग्लादेशी अखबार 'द डेली स्टार' ने नजरुल इस्लाम के बारे में जानकारी दी है कि वह ब्राह्मणबाड़िया जिले के बीरामपुर गांव का रहने वाला था. उसके परिवार में पिता अब्दुल बसीर और मां रहीमा के अलावा एक छोटा भाई और दो बहनें हैं. नजरुल मदरसे से 10वीं पास था. पिता अब्दुल बसीर भी करीब 24 साल सऊदी में काम कर चुके हैं और वापस बांग्लादेश में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. उन्होंने पारिवारिक स्थिति खराब होने के बाद नजरुल को 8 लाख बांग्लादेशी टका उधार लेकर सऊदी भेजा था. नजरुल ने शुरुआती 8 महीनों में परिवार को 1.5 लाख टका भेजे भी थे.
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नजरुल इस्लाम के केस में पाकिस्तानी एंगल
बांग्लादेशी मीडिया ‘द डेली स्टार’ के मुताबिक, 1 अगस्त 2023 को नजरुल को साइबर क्राइम के आरोप में गिरफ्तार करके जेद्दा की करेक्शनल फैसिलिटी, यानी सुधार गृह भेज दिया गया, जहां उसने करीब 1 साल 3 महीने बिताए. उसने परिवार को बताया था कि उसे कुछ दिन रखेंगे और फिर छोड़ देंगे. आखिरी बार 11 अक्टूबर को करीब ढाई मिनट उसकी परिवार से बात हुई थी, लेकिन उसने नहीं बताया कि उसे फांसी होने वाली है. नजरुल अविवाहित था, और परिवार को उसके स्वीटी के साथ संबंधों की कोई जानकारी नहीं थी.
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पाकिस्तानी ने नजरुल को फंसाया?
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नजरुल के रिश्तेदारों ने यह भी दावा किया है कि काम के दौरान उसका किसी पाकिस्तानी से विवाद हुआ था. इसी के चलते नजरुल को फंसाया गया. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. पहले खबर चली थी कि किसी पाकिस्तानी ने ही उसका कोई वीडियो बनाया था और सऊदी अरब की पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.