सीजफायर का क्रेडिट लेने में जुटा पाकिस्तान, भारत ने चुपचाप शुरू किया बड़ा कूटनीतिक खेल
ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद पाकिस्तान खुद को शांति का बड़ा खिलाड़ी दिखाने में जुटा है, जबकि भारत अलग रणनीति अपनाते हुए अजरबैजान, बांग्लादेश, तुर्की और UAE जैसे देशों से रिश्ते मजबूत कर रहा है.
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ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर के बाद जहां दुनिया राहत की सांस ले रही है, वहीं पाकिस्तान खुद को शांति का बड़ा खिलाड़ी साबित करने में जुट गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लेकर तमाम मंत्री अपनी सरकार की वाहवाही करने में लगे हुए हैं. ये वही पाकिस्तान है जो खुद लंबे समय से अस्थिरता और अंदरूनी चुनौतियों से जूझ रहा है, अब ईरान और अमेरिका के नेताओं की मेजबानी की तैयारी कर रहा है.पाकिस्तान का मानना है कि यह कदम उसे वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर सकता है. दूसरी तरफ भारत ऐसी तैयारी में है जो आने वाले दिनों में पाकिस्तान कई देशों से अलग-थलग कर देगा.
भारत की अलग रणनीति
दूसरी ओर भारत इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहा है. भारत सीधे इस सीजफायर कूटनीति का हिस्सा बनने के बजाय उन देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, जिनसे पाकिस्तान के पारंपरिक रिश्ते अच्छे रहे हैं. इनमें अजरबैजान, बांग्लादेश, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं. यह रणनीति साफ संकेत देती है कि भारत क्षेत्रीय संतुलन को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है.
बांग्लादेश के साथ रिश्तों को नई दिशा
दरअसल, हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भारत दौरे पर आए, जहां उन्होंने एस जयशंकर से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों ने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर रिश्तों को नई दिशा देने पर जोर दिया. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहली बड़ी कूटनीतिक पहल मानी जा रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि ढाका और नई दिल्ली अब संबंधों को फिर से मजबूत करने के रास्ते पर हैं.
तुर्की के साथ रिश्ते सुधरने के संकेत
भारत और तुर्की के बीच भी संबंध सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं. हाल ही में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई, जिसमें द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की गई. कश्मीर को लेकर रेसेप तैय्यप एर्दोगन के बयानों और पाकिस्तान के समर्थन के कारण रिश्तों में तनाव रहा है, लेकिन अब दोनों पक्ष बातचीत के जरिए हालात को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.
अजरबैजान के साथ बदली तस्वीर
अजरबैजान, जो पहले पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा नजर आता था, अब भारत के साथ सहयोग बढ़ाता दिख रहा है. मिडिल ईस्ट संकट के दौरान ईरान में फंसे 215 भारतीयों को सुरक्षित निकालने में अजरबैजान ने अहम भूमिका निभाई. इसके लिए भारत ने आधिकारिक तौर पर उसका आभार भी जताया. हालांकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय अजरबैजान के रुख को लेकर भारत में विरोध भी देखने को मिला था, लेकिन अब दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के संकेत हैं.
UAE के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर
इस बीच एस जयशंकर का संयुक्त अरब अमीरात दौरा भी काफी अहम माना जा रहा है. इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है. साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखना और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा करना भी एजेंडे में शामिल है. यूएई उन चुनिंदा देशों में है, जिनके भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं.
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बहरहाल, सीजफायर के बाद जहां पाकिस्तान खुद को शांति का सूत्रधार बताने में लगा है, वहीं भारत चुपचाप अपनी कूटनीतिक रणनीति को मजबूत कर रहा है. एक ओर मेजबानी और दावों की राजनीति है, तो दूसरी ओर रिश्तों को मजबूत करने की सधी हुई कोशिश. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन दोनों रणनीतियों में कौन सा देश वैश्विक मंच पर ज्यादा प्रभावशाली साबित होता है.
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