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कौन बनाता है चुनावी स्याही, आखिर कई दिनों तक क्यों नहीं मिटता ये निशान? जानिए भारत की इस कंपनी का क्या है खास रोल

Indelible Ink: असम, केरल, पुडुचेरी,तमिलनाडु और पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर मतदान के दौरान आज भी वही परंपरा जारी हैं, वोट डालो और उंगली पर स्याही लगवाओ.

कौन बनाता है चुनावी स्याही, आखिर कई दिनों तक क्यों नहीं मिटता ये निशान? जानिए भारत की इस कंपनी का क्या है खास रोल
Image Source: Social Media
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Indelible Ink: जब भी चुनाव होते हैं, एक चीज हर वोटर की पहचान बन जाती हैं, उंगली पर लगा गहरा बैंगनी निशान. ये सिर्फ एक स्याही का दाग नहीं होता , बल्कि ये इस बात का सबूत होता हैं कि आपने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया हैं, असम, केरल, पुडुचेरी,तमिलनाडु और पश्चिमी बंगाल जैसे राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर मतदान के दौरान आज भी वही परंपरा जारी हैं, वोट डालो और उंगली पर स्याही लगवाओ. लेकिन क्या आपने कभी सोचा  हैं कि ये स्याही आखिर इतनी खास क्यो होती है ? और ये इतनी आसानी से मिटती क्यों नहीं...? 

क्या होती है ये ‘जादुई स्याही’?

इस स्याही को इंडेलिबल इंक (Indelible Ink) या वोटर इंक कहा जाता है. “इंडेलिबल” का मतलब होता है, जो मिटाई न जा सके. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. इसमें एक खास केमिकल होता है, सिल्वर नाइट्रेट. जब ये स्याही हमारी त्वचा पर लगती है, तो यह त्वचा में मौजूद प्रोटीन और केराटिन के साथ प्रतिक्रिया करती है. इसी वजह से उंगली पर गहरा नीला या बैंगनी निशान बन जाता है. ये निशान तुरंत नहीं हटता, बल्कि तब तक रहता है जब तक त्वचा की ऊपरी परत खुद ही उतर न जाए, यानि लगभग 10 से 15 दिन तक. यही कारण है कि कोई व्यक्ति दोबारा वोट नहीं डाल सकता.

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कहां बनती है ये स्याही?

भारत में ये खास स्याही सिर्फ एक ही सरकारी कंपनी बनाती है-Mysore Paints & Varnish Ltd साल 1952 से लेकर आज तक, देश के हर चुनाव में इसी कंपनी की स्याही का इस्तेमाल हो रहा है.. ये कंपनी सिर्फ वोटिंग इंक ही नहीं, बल्कि नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली स्याही भी तैयार करती है. दिलचस्प बात ये है कि हैदराबाद की एक कंपनी, रायडू लेबोरेटरी, भी ऐसी स्याही बनाती है, लेकिन वो ज़्यादातर विदेशों में, लगभग 90 देशों को सप्लाई करती है.

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एक वोटर पर कितना खर्च आता है?

 इतनी खास स्याही होगी तो महंगी भी होगी, लेकिन ऐसा नहीं है. करीब 10 मिली लीटर की एक छोटी सी शीशी की कीमत लगभग 174 रुपये होती है, और इससे करीब 700 लोगों की उंगली पर निशान लगाया जा सकता है. यानी एक वोटर पर सिर्फ लगभग 25 पैसे का खर्च आता है. इतनी कम कीमत में ये स्याही चुनाव को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में बहुत बड़ा रोल निभाती है.

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आगे क्या बदलाव हो सकते हैं?

अब समय के साथ बदलाव की कोशिश भी हो रही है. Mysore Paints & Varnish Ltd इस स्याही को पारंपरिक कांच की शीशी की बजाय मार्कर पेन के रूप में लाने की तैयारी कर रही है. हालांकि, ये अभी शुरुआती चरण में है और चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद ही इसे इस्तेमाल किया जाएगा. उंगली पर लगा ये छोटा सा निशान हमें याद दिलाता है कि हमने देश के भविष्य के लिए अपना योगदान दिया है. ये सिर्फ स्याही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, अधिकार और गर्व का प्रतीक है.

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