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जिस पर देशकरता है भरोसा
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भारत ने बनाया अपना GPS, NavIC पर अब देश को गर्व, जानें कैसे करता है काम

Navlc: नाविक का पूरा नाम है Navigation with Indian Constellation.यह एक ऐसा सिस्टम है जो आपको आपकी लोकेशन और सही रास्ता बताता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे GPS करता है.

भारत ने बनाया अपना GPS, NavIC पर अब देश को गर्व, जानें कैसे करता है काम
Image Source: Social Media
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Navlc Map: आज के समय में हम कहीं भी जाते हैं तो सबसे पहले मोबाइल निकालते हैं और मैप खोल लेते हैं. कुछ ही सेकंड में रास्ता सामने होता हैं और हम बिना सोचे आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि जिस नेविगेशन पर हम भरोसा करते हैं , वह ज्यादातर विदेशी सिस्टम पर निर्भर हैं. यही सोचकर भारत ने एक बड़ा कदम उठाया और अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम तैयार किया Navlc. इसे ISRO ने बनाया हैं , और आज यह धीरे -धीरे हमारे फ़ोन और गाड़ियों तक पहुंच रहा है.

आखिर क्या है ‘नाविक’?

नाविक का पूरा नाम है Navigation with Indian Constellation.यह एक ऐसा सिस्टम है जो आपको आपकी लोकेशन और सही रास्ता बताता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे GPS करता है. लेकिन फर्क यह है कि GPS अमेरिका का है, जबकि नाविक पूरी तरह भारत का अपना सिस्टम है. इसके सैटेलाइट पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर ऊपर घूमते रहते हैं और भारत के साथ-साथ आसपास के लगभग 1500 किलोमीटर तक के इलाके को कवर करते हैं.

GPS से ज्यादा सटीक क्यों माना जा रहा है?

GPS पूरी दुनिया के लिए बना है, इसलिए उसकी सटीकता हर जगह एक जैसी नहीं होती. वहीं नाविक खासतौर पर भारत और आसपास के इलाकों पर फोकस करता है. GPS की सटीकता करीब 20-30 मीटर तक होती है. नाविक भारत के अंदर 5 मीटर से भी कम की सटीक लोकेशन दे सकता है
इसके अलावा, नाविक दो अलग-अलग सिग्नल (L5 और S-band) का इस्तेमाल करता है, जिससे घने जंगल, ऊंचे पहाड़ या खराब मौसम में भी सिग्नल ज्यादा मजबूत रहता है.

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कैसे काम करता है यह सिस्टम?

नाविक के सैटेलाइट भारत के ऊपर एक तय जगह पर बने रहते हैं. इसका फायदा यह होता है कि सिग्नल लगातार मिलता रहता है और लोकेशन ज्यादा सटीक आती है.
जब आपका फोन या डिवाइस सिग्नल लेता है, तो यह सैटेलाइट से मिली जानकारी के आधार पर आपकी सही जगह का पता लगा लेता है. दो सिग्नल बैंड होने की वजह से गलती (error) कम होती है और रिजल्ट ज्यादा भरोसेमंद होता है.

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

Kargil War के दौरान भारत को GPS डेटा की जरूरत थी, लेकिन अमेरिका ने वह देने से मना कर दिया.उस वक्त भारत को एहसास हुआ कि अगर हम पूरी तरह दूसरों पर निर्भर रहेंगे, तो मुश्किल वक्त में परेशानी हो सकती है. यहीं से यह तय हुआ कि भारत अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम बनाएगा, और उसी का नतीजा है नाविक.

संकट के समय क्यों है ‘गेम चेंजर’?

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नाविक सिर्फ आम लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है.
युद्ध के समय यह सेना के लिए “तीसरी आंख” की तरह काम करता है
मिसाइल गाइडेंस और सीमा पर नजर रखने में मदद करता है
समुद्र में मछुआरों को मौसम और सीमा पार करने का अलर्ट देता है
सबसे बड़ी बात,  यह पूरी तरह भारत के कंट्रोल में है, इसलिए किसी बाहरी देश पर निर्भरता नहीं रहती.

क्या आपके फोन में भी चलेगा?

अभी धीरे-धीरे नाविक स्मार्टफोन्स में आ रहा है.Qualcomm और Apple जैसी बड़ी कंपनियां अपने नए चिप्स और डिवाइसेज में इसका सपोर्ट दे रही हैं. सरकार भी चाहती है कि आने वाले समय में हर स्मार्टफोन में नाविक हो, ताकि लोग अपने ही देश के सिस्टम का इस्तेमाल कर सकें.

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