"पतन की कगार पर मुल्क...इससे पेट नहीं भरेगा", भारत को कोस रहे पाकिस्तानियों को सिंगापुर के डिप्लोमेट ने लताड़ा
अपनी हर समस्या के लिए भारत और अपनी सीमाओं को जिम्मेदार ठहराने वाले पाकिस्तानियों की सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलहारी कौसिकन ने घनघोर बेइज्जती की है. उन्होंने दो टूक कहा कि कूटनीतिक सफलता पर उछल रहे हो, इससे तुम्हारा पेट नहीं भरेगा, पतन की कगार पर खड़े हो.
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अमेरिका और ईरान जंग के बाद से ही पाकिस्तान अपनी तथाकथित कूटनीतिक सफलता और मध्यस्थ की भूमिका मिलने पर इतरा रहा था. पाकिस्तानी छाती पीट रहे थे कि देखो कैसे उनके मुल्क ने खाड़ी में शांति लाने में अहम रोल अदा किया है. उनकी खुशी इस बात को लेकर थी कि चलो कहीं तो भारत बैकफुट पर आया. हालांकि, पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान के अलावा कोई देश अमेरिका, खासकर ट्रंप के साथ मिलकर इस शांति वार्ता में शामिल नहीं होना चाहता था.
ट्रंप के रिकॉर्ड और बड़बोलेपन की वजह से केवल पाकिस्तान ही था जो पोस्टमैन की भूमिका निभा सकता था, जिससे उसे भारी मात्रा में डॉलर, चंद दिनों की खुशी और आतंकवाद प्रायोजित देश के रूप में अपनी पहचान को सुधारने में मदद मिलती. हालांकि, उसने इसे पर्मानेंट सोल्यूशन मान लिया और यह सोचने लगा कि वह अब रीजनल और भारत से बड़ा सुपर पावर है. ऐसे में सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलहारी कौसिकन ने उनके खयाली पुलाव दूर कर दिए और मुगालते से बाहर लाने वाली थेरेपी दी है. पाकिस्तान को कौसिकन ने वह रियलिटी चेक दिया है, जिससे कि पाकिस्तान की अक्ल ठिकाने लग गई होगी.
आपको बता दें कि पाकिस्तान अमेरिका-ईरान विवाद में कथित मध्यस्थ की भूमिका निभाने का जश्न मना रहा था और खुद को नेक्स्ट कतर और नॉर्वे सोचने लगा था, लेकिन उसकी इसी गलतफहमी को सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलहारी कौसिकन ने फैक्ट्स के साथ दूर कर दिया. पाकिस्तान ऐसे वक्त में जब खुद अपनी समस्याओं में डूबा हुआ है, उसने खुद को सुपरपावर समझने की गलती की, जिसे समय रहते सुधार दिया गया. आपको बताएं कि इवेंट में बोलते हुए, सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलहारी कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान की समस्या उसकी लोकेशन नहीं, बल्कि उसके अपने राजनेता और सेना है.
'पाकिस्तान अपने गिरेबान में झांक'
कौसिकन ने दो टूक कहा कि भले ही पाकिस्तान ने खाड़ी जंग में अचानक मिले मौके का फायदा उठाते हुए अपनी डिप्लोमैटिक इमेज को सुधारने की कोशिश की और उसे थोड़ी बहुत सफलता मिली भी, लेकिन इससे जमीन पर कुछ होने वाला नहीं है. उन्होंने दो टूक कहा कि "इससे पाकिस्तान के लोगों का पेट नहीं भरता". कौसिकन ने अगले पांच सालों में पाकिस्तान और साउथ एशिया के भविष्य के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान को सबसे पहले अपने अंदर झांकना होगा. उसे दूसरे देशों, लोकेशन और पड़ोसियों को जिम्मेदार ठहराना बंद करना होगा. उसे ब्लेमगेम छोड़ना होगा.
'पाकिस्तान की समस्याओं के लिए भारत को दोषी नहीं ठहराया जा सकता': कौसिकन
आपको बता दें कि पाकिस्तानी अंग्रेजी अखबार डॉन के एक पत्रकार ने देश की समस्याओं के लिए भारत, अफगानिस्तान और देश की लोकेशन को जिम्मेदार ठहराया. इसका जवाब देते हुए सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलहारी कौसिकन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और इस तर्क को महज एक बहाना करार दिया. कौसिकन ने कहा, "आप हर चीज के लिए लोकेशन को दोष नहीं दे सकते. यह एक बहाना है."
'पाकिस्तानी नेताओं की बात करना समय की बर्बादी है...पाकिस्तान दूसरे पर, अपनी लोकेशन, बॉर्डर, पड़ोसी पर ब्लेम डालना बंद करे...पूरी पाकिस्तानी सोसायटी सामंती है....'
— Guddu Khetan (@guddu_khetan) July 6, 2026
सिंगापुर के पूर्व राजदूत #BilahariKausikan ने पाकिस्तान के ब्लेमगेम और रोने वाली आदत की ऐसी की तैसी कर दी. pic.twitter.com/XPLL9R3C3B
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का प्रबंधन, पाकिस्तान में सरकार, मैनेजमेंट, प्रशासन, इकोनॉमी और कानून-व्यवस्था शुरू से ही गलत रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि जब तक देश अपनी आंतरिक गवर्नेंस (शासन-व्यवस्था) को ठीक नहीं करता, तब तक उन्हें इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं दिखता. उन्होंने कहा, "इसके राजनेता समय की बर्बादी हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों और सेना भी समस्या का एक बड़ा हिस्सा है, जिसके पास पूरा देश है..."
'पाकिस्तान पतन की कगार पर खड़ा है'
कौसिकन ने आगे भविष्यवाणी की कि पाकिस्तान ने ईरान विवाद का इस्तेमाल अपने डिप्लोमैटिक फायदे के लिए किया है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान इस पूरे मामले में बहुत एक्टिव रहा और मिले डिप्लोमैटिक मौके का फायदा उठाने में बहुत सफल रहा है और इससे अमेरिका की नजरों में पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक छवि को सुधारने में कुछ मदद मिली है."
'पाकिस्तान कंगाल होने के मुहाने पर खड़ा है...अमेरिका पाकिस्तान को कभी नहीं बाहर निकाल सकता...ये आतंकियों की नर्सरी है...कूटनीतिक सफलता, पाकिस्तानियों के भूख को खत्म नहीं कर सकती...',
— Guddu Khetan (@guddu_khetan) July 6, 2026
अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम नहीं होता तो तुम्हें कोई भाव भी नहीं देता.
-Bilahari Kausikan pic.twitter.com/vj0kXgAY3D
'अमेरिका भी नहीं कर पाएगा मदद'
इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों की ओर इशारा करते हुए कहा, "लेकिन आप जानते हैं, इससे पाकिस्तान के लोगों का पेट नहीं भरता." देश अपने बढ़ते कर्ज को संभालने के लिए लंबे समय से वर्ल्ड बैंक और IMF से मिलने वाले लोन और आर्थिक मदद पर निर्भर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान की ऐसी स्थिति है जिसे देखकर कहा जा सकता है कि अमेरिका के लिए भी उसे प्रतिबंधों और उसकी छवि से निकालना मुश्किल होगा, अमेरिका भी ऐसा नहीं कर पाएगा... क्योंकि जिस तरह पाकिस्तान में आतंकी और जिहादी संगठन सरकार के हाथ से भी बाहर चले गए हैं, वे अमेरिका के लिए भी खतरा हैं.
'कूटनीतिक सफलता से पेट नहीं भरने वाला'
रूस और फिनलैंड में सिंगापुर के पूर्व राजदूत रहे कौसिकन ने पाकिस्तान को "विफलता की कगार पर खड़ा देश" बताया और कहा कि कोई भी डिप्लोमैटिक सफलता इस बुनियादी सच्चाई को नहीं बदल सकती. डिप्लोमैटिक सफलता से पेट नहीं भरता. इससे आंतरिक समस्या खत्म नहीं होती.
'कोई नहीं करेगा पाकिस्तान की परवाह अगर...'
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पाकिस्तान की हालिया डिप्लोमैटिक कामयाबियों को अपने दिमाग पर हावी कर लेने वाले पाकिस्तानियों की असंभव उम्मीदों पर पानी फेरते हुए उन्होंने कहा, "और हर कोई इसे लेकर चिंतित है क्योंकि आपके पास न्यूक्लियर हथियार हैं. अगर आपके पास न्यूक्लियर हथियार नहीं होते, तो किसी को कोई परवाह नहीं होती." पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति लाने में मदद की.