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‘यूरोप तपे तो हमदर्दी, भारत झुलसे तो मजाक…’ पश्चिमी देशों की गर्मी पर क्यों तरस खा रहा मीडिया? भड़कीं कंटेट क्रिएटर Video

यूरोप के देश गर्मी में झुलस रहे हैं जिन पर ग्लोबल मीडिया हमदर्दी जता रही है, 35 डिग्री में हाहाकर मचाने वाले ये ही देश भारत की गर्मी का मजाक बनाते हैं, जिनकी धज्जियां यूरोप की ही कंटेट क्रिएटर ने उड़ा दीं.

‘यूरोप तपे तो हमदर्दी, भारत झुलसे तो मजाक…’ पश्चिमी देशों की गर्मी पर क्यों तरस खा रहा मीडिया? भड़कीं कंटेट क्रिएटर Video
Image Source- Screengrab/the_polishtravelgirl
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यूरोप अभी भीषण गर्मी की चपेट में है. टेम्परेचर 35 डिग्री तक पहुंच गया है, जो कि यूरोप के लिए कोई सामान्य बात नहीं है न तो यहां का इंफ्रास्ट्रक्टर इस गर्मी के लिए तैयार है और न ही लोग, जबकि भारत में ये मौसम सामान्य है, लेकिन दुनियाभर में पश्चिमी देशों की तपिश पर सहानुभूति दी जा रही है. इसी दोहरे मापदंड को लेकर यूरोपीय देश की कंटेट क्रिएटर ने ही सवाल उठा दिए. 

पोलैंड की कंटेंट क्रिएटर एग्निएस्का हड्डा का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वे ग्लोबल वॉर्मिंग और यूरोपीय देशों की गर्मी को लेकर वैश्विक मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रहे दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए धज्जियां उड़ाई हैं. 

पोलैंड की कंटेंट क्रिएटर एग्निएस्का हड्डा ने क्या कहा? 

कंटेंट क्रिएटर एग्निएस्का हड्डा वीडियो में कहती हैं, ‘जब यूरोप में 35 डिग्री तापमान होने पर स्कूल बंद हो जाते हैं और लोग पार्कों या समुद्र तटों पर सोते हैं, तो पूरी दुनिया उनके प्रति सहानुभूति दिखाती है, लेकिन जब भारत में तापमान 40 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है और भारतीय इस गर्मी से बचने के लिए खुले में सोते हैं तो विदेशी मीडिया उनका जमकर मजाक उड़ाती है और भारत को पिछड़ा देश बताती है.’

 
 
 
 
 
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एग्निएस्का हड्डा भारत में ज्यादा से ज्यादा समय बिताती हैं, यह वीडियो उन्होंने पोलैंड यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किया था. वह वीडियो में पूछती हैं, ‘सहानुभूति पश्चिम के लिए ही क्यों आरक्षित है जबकि मजाक केवल भारत के लिए ही?’ 

एग्निएस्का ने आगे कहा कि आलोचना वहां करें जहां सही हो, लेकिन भारत की उपलब्धियों का सम्मान करना भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, यह पहले देश में दुर्लभ माना जाता था. उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के स्कूल बंद हो गए हैं, बाहरी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, पावर सिस्टम फेम हो गया है और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है. सड़कों और रेलवे ट्रैक के पिघलने और बिजली व्यवस्था पर बढ़ते दबाव की खबरें आ रही हैं. 

‘यूरोप में फैन तक नहीं भारत में AC’

एग्निएस्का हाड्डा ने भारत के सिस्टम की तारीफ की और यूरोप की तैयारियों पर सवाल उठाए. उन्होंने तुलना करते हुए कहा, यूरोप में कई घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनिंग या यहां तक कि सीलिंग फैन भी नहीं हैं, जिससे गर्मी सहन करना और भी मुश्किल हो जाता है. जबकि भारत के घरों और दफ्तरों में फैन और AC की व्यवस्था है. 

एग्निएस्का ने कहा, ‘यहां यूरोपीय देशों में जिस 35 डिग्री तापमान पर लोगों की हालत खराब है, उस 35 डिग्री तापमान को भारत में सामान्य माना जाता है. वहां गर्मियों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होना आम बात है और कुछ क्षेत्रों में तो यह 50 डिग्री तक भी पहुंच जाता है.’

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उन्होंने कहा, जब भी भारत किसी चुनौती का सामना करता है, विदेशी मीडिया तुरंत भारत को 'पिछड़ा' कहने लगता है. पॉलिश कंटेट क्रिएटर ने सवाल उठाए कि वैश्मिक मीडिया में अब वे सुर्खियां कहां है जो यूरोपीय देशों पर सवाल उठाएं. 

पॉलिश क्रिएटर ने भारत की कौनसी घटना का किया जिक्र? 

एग्निएस्का हाड्डा ने मीडिया की एक खबर का जिक्र भी किया. जिसमें ग्लोबल लेवल तक मुद्दा बनाया गया. उन्होंने मुंबई के वर्सोवा बीच पर बिजली गुल होने के दौरान खुले में सो रहे लोगों की वायरल तस्वीरों का बचाव किया. एग्निएस्का ने कहा, गर्मी से बचने की कोशिश करने वाले भारतीयों का व्यापक रूप से उपहास किया गया. 

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‘याद है जब बिजली कटौती के दौरान वर्सोवा बीच या पार्कों में सोते हुए भारतीयों की तस्वीरें पूरी दुनिया में वायरल हुई थीं? वे मीम्स बन गईं, मजाक बन गईं. भारत का मजाक उड़ाया गया.’

उन्होंने कहा, ‘आज, यूरोप के कई हिस्सों में लोग समुद्र तटों और पार्कों की घास पर रातें बिता रहे हैं क्योंकि यही उनके पास सबसे सस्ता एयर कंडीशनिंग विकल्प है. इस बार, दुनिया उनका उपहास नहीं उड़ा रही है, बल्कि उनके प्रति सहानुभूति दिखा रही है और सहानुभूति ही वह चीज है जिसके हर इंसान हकदार है.’

यह भी पढ़ें- ‘शांति और प्राइवेसी…’ भारत आई अमेरिकी महिला को भा गए यहां के घर, बताया अमेरिका से बेहतर, वायरल हो गया Video

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आखिर में एग्निएस्का दोहरे रवैये की धज्जियां उड़ाते हुए कहती हैं, ‘भारत की आलोचना वहीं करें जहां आलोचना उचित हो, लेकिन भारत की उपलब्धियों का जश्न भी उतने ही आत्मविश्वास के साथ मनाएं, क्योंकि अगर हम अपने देश का सम्मान नहीं करेंगे, तो कोई और भी नहीं करेगा.’

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