चीन में भारत के नए राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने रख लिया 'चीनी' नाम, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!
चीन में भारत के नए राजदूत विक्रम दोराईस्वामी इन दिनों चर्चा में हैं. बीजिंग में पदभार संभालते ही उन्होंने अपना चीनी नाम भी रख लिया है. जिसके बारे में सोशल मीडिया पर खूब बात हो रही है.
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दिग्गज डिप्लोमेट और ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त रहे विक्रम दोराईस्वामी को लेकर सोशल मीडिया पर गजब की चर्चा हो रही है. वजह है उनका नया चीनी नाम, जो उन्होंने चीन में अपनी नियुक्ति के बाद स्थानीय परंपरा के तहत अपनाया. दोराईस्वामी की नियुक्ति वैसे तो बीते महीने की 19 तारीख को हुई थी, लेकिन अब जाकर वो खूब ट्रेंड कर रहे हैं. दरअसल बीजिंग में भारत के नए राजदूत के रूप में तैनाती के बाद उन्होंने चीनी संस्कृति का सम्मान और परंपरा का पालन करते हुए ‘वेई जियामेंग’ नाम अपनाया है. वेई जियामेंग सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि कूटनीति, सांस्कृतिक के साथ-साथ भारत के मेजबान देश के प्रति आदर और रिश्तों के प्रति अपनी गंभीरता को दर्शाता है.
पाकिस्तान को एक्सपोज करने वाले IFS अधिकारी है दोराईस्वामी
आपको बताएं कि 1992 बैच के IFS अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को 19 मार्च को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया था. चीन में तैनाती से पहले वो ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर के तौर पर तैनात थे. उन्होंने अपना कार्यभार संभाल लिया है. ज्ञात हो कि ये वही दोराईस्वामी हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर पाकिस्तान की सबूतों के साथ पोल खोली थी और मशहूर तस्वीर लहराई थी, जिसमें भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे गए आतंकियों के नामज-ए-जनाजा में पाक फौज के कमांडर्स के जाने पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था.
उन्होंने आगे कहा था कि भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमले किए हैं ना कि सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर. अगर पाकिस्तान इस मुद्दे को तूल देता है, लड़ाई को बढ़ाता है तो भारतीय फौज, भारत के पास इतनी ताकत और सलाहियत है कि वो पाकिस्तान को बहुत तगड़ा सबक सिखाएगा और उसकी सजा भीषण होगी.
दोराईस्वामी ने जिस चीनी संस्कृति के लिहाज से अपना नाम ‘वेई जियामेंग’ रखा है, उसका गूढ़ रहस्य और बहुत महत्व है. Vikram Doraiswami ने चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में ‘वेई जियामेंग’ नाम अपनाया है, जो सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि कूटनीति और सांस्कृतिक समझ का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
दोराईस्वामी के नए चीनी नाम का मतलब क्या है?
आपको बता दें कि चीन में विदेशी राजनयिकों द्वारा स्थानीय नाम अपनाने की एक पुरानी परंपरा है. ‘वेई जियामेंग’ नाम का उच्चारण और अर्थ दोनों दृष्टि से आसान है. ‘वेई’ एक सामान्य चीनी उपनाम है, वहीं ‘जिया’ का अर्थ है शुभ या प्रशंसनीय. वहीं ‘मेंग’ का मतलब गठबंधन या साझेदारी का प्रतीक है.
भारत के राजदूत क्यों बदलते हैं अपना नाम?
यह कदम चीन जैसी भाषा और संस्कृति-प्रधान देश के साथ संवाद और सांस्कृति समझ को आसान बनाता है, दूत के लिए संवाद को संभव करता है. जैसा कि आपको पता है कि चीन की आधिकारिक भाषा मंदारिन है, जिसमें विदेशी नामों का उच्चारण कठिन होता है. इसलिए स्थानीय नाम अपनाने की परंपरा है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर का चीन में क्या नाम था?
इतना ही नहीं चीन में भारत के राजदूर रह चुके भारत के मौजूदा विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी अपना नाम बदल लिया था, उन्हें ‘सु जिएशेंग’ नाम से जाना जाता था. कूटनीति की भाषा में इसे “सॉफ्ट पावर” का हिस्सा माना जाता है. मसलम अगर नया राजदूत अपना नाम बदलता है तो इसका मतलब होता है कि वो मेजबान देश के साथ रिश्तों को बेहतर करना चाहता है या रिश्ते बेहतर हैं. अगर नहीं बदलता है तो इसका एक ही मतलब है कि वो कूटनीति की भाषा में मैसेजिंग कर रहा है.
दिग्गज डिप्लोमेट हैं दोराईस्वामी?
दोराईस्वामी 1992 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए. उससे पहले, उन्होंने एक साल तक पत्रकारिता की. विदेश मंत्रालय के मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर डिग्री ली. 1992-1993 में नई दिल्ली में अपनी इन-सर्विस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दोराईस्वामी मई 1994 में हांगकांग में भारतीय दूतावास में थर्ड सचिव नियुक्त हुए. उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा पूरा किया.
India's High Commissioner to the UK shows @SkyYaldaHakim a photo which he claims shows Pakistani military standing behind "a sanctioned terrorist under the American sanctions regime" called Hafiz Abdul Rauf.
— Sky News (@SkyNews) May 8, 2025
Sky News cannot verify the photo.
📺 Sky 501 & YouTube pic.twitter.com/TGfXtOkpTI
चीन में पहले भी कर चुके हैं काम!
सितंबर 1996 में उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने लगभग चार साल तक जिम्मेदारी संभाली. फिर 2000 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में लौटने पर, दोराईस्वामी ने डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (ऑफिशियल) नियुक्त की भूमिका निभाई. दो साल बाद उन्हें प्रधानमंत्री के ऑफिस में प्रमोट किया गया. बाद में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के निजी सचिव के तौर पर काम किया.
2006 में दोराईस्वामी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर और अक्टूबर 2009 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में भारत के महावाणिज्य दूत के तौर पर कार्यभार संभाला. जुलाई 2011 में दोराईस्वामी नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में वापस आ गए, जहां उन्होंने साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (एसएएआरसी) विभाग का नेतृत्व किया. इस दौरान वे मार्च 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स समिट के कोऑर्डिनेटर भी थे.
ब्रिटेन, बांग्लादेश के रह चुके हैं हाई कमिश्मर!
फिर अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक दोराईस्वामी विदेश मंत्रालय के अमेरिकी विभाग में संयुक्त सचिव थे. अप्रैल 2015 में कोरिया में भारत के राजदूत नियुक्त होने से पहले वे अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत बने.
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इसके बाद जुलाई 2018 में हेडक्वार्टर लौट आए और बांग्लादेश व म्यांमार विभाग के प्रमुख के तौर पर काम किया. अप्रैल 2019 में उन्हें हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए विदेश मंत्रालय में एक नया विभाग बनाने का काम सौंपा गया. दिसंबर 2019 में प्रमोशन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय संगठन और समिट के लिए अतिरिक्त सचिव बनाया गया. ब्रिटेन से पहले उन्होंने 5 अक्टूबर 2020 को बांग्लादेश में भारतीय हाई कमिश्नर का पद संभाला था. विक्रम दोराईस्वामी चीनी, फ्रेंच और कोरियन भाषा बोलने में काफी सहज हैं.
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