क्यों जल रहे फ्रांस, इटली और पुर्तगाल? सड़कों पर हजारों लोग, आगजनी पथराव और जनाक्रोश, अमेरिका को भी सताई चिंता
फ्रांस के लिमोज शहर के 143 साल पुराने टाउन हॉल में आग लगा दी गई. आग से ऐतिहासिक इमारत को भारी नुकसान पहुंचा. भीड़ इतनी बेकाबू हो गई की पुलिस के काबू से बाहर हो गई है.
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स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का दावा करने वाले फ्रांस में विरोध की आवाज उग्र होने लगी है. महंगाई के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. स्कूली छात्रों के लिए बेहतर सुविधाओं और सरकारी सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ ये प्रदर्शन बड़े आंदोलन में बदल गया है.
प्रदर्शनकारियों ने कई बिल्डिंग्स फूंक दी, वाहनों में तोड़फोड़ और पथराव किया. भीड़ इतनी बेकाबू हो गई की पुलिस के काबू से बाहर हो गई है.
प्रदर्शनकारियों ने फूंकी ऐतिहासिक इमारतें
शनिवार को फ्रांस के लिमोज शहर के 143 साल पुराने टाउन हॉल में आग लगा दी गई. आग से ऐतिहासिक इमारत को भारी नुकसान पहुंचा. ये 1883 में बनकर तैयार हुआ था और फ्रांस के ऐतिहासिक स्मारकों की सूची में शामिल था. 17 अक्टूबर को फ्रांस के विभिन्न शहरों में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की और इमारत को आगे के हवाले कर दिया गया.
विरोध के दौरान दुकानों में लूट भी की गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारी आईफोन के स्टोरक में घुस गए और फोन समेत एपल के कई गैजेट्स लेकर भाग गए.
इटली और पुर्तगाल तक विरोध की आंच
आवास संकट, बढ़ते किराये और महंगाई को लेकर शुरू हुआ यह विरोध यूरोप के कई देशों में देखने को मिल रहा है. पुर्तगाल के लिस्बन समेत पोर्टो, कोयम्ब्रा और अन्य शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया.
लोगों का कहना है कि घरों की कीमतें और किराया आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं, इसलिए सरकार को सस्ता आवास उपलब्ध कराने और बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.
सिन्हुआ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, लिस्बन में हजारों प्रदर्शनकारी शहर के केंद्र में जुटे. उन्होंने वहां तंबू लगाए और ऐसे बैनर लेकर प्रदर्शन किया जिनमें मांग की गई कि 'रियल एस्टेट में निवेश करने वाले बड़े फंडों' पर सख्त कानून बनाए जाएं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन फंडों की वजह से संपत्तियों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आम लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है.
कुछ बैनरों में पोर्टो में गुरुवार तड़के हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र था. उस कार्रवाई में पुलिस ने आवास अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाया था. प्रदर्शनकारियों ने 'सिर मत फोड़ो, घर उपलब्ध कराओ' जैसे नारे लिखे हुए बैनर उठाए थे. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में 37 लोग घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई.
पुर्तगाल के राष्ट्रपति ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पुर्तगाल के राष्ट्रपति एंटोनियो जोस सेगुरो ने कहा कि किसी लोकतांत्रिक समाज में गरीबी को 'किस्मत या मजबूरी’ मानकर स्वीकार नहीं किया जा सकता.
राष्ट्रपति की वेबसाइट पर जारी एक संदेश में सेगुरो ने कहा कि पुर्तगाल में अभी भी लगभग 16.6 लाख लोग गरीबी के खतरे में जी रहे हैं. हालांकि, 2015 के बाद यह पहली बार है जब यह संख्या 20 लाख से नीचे आई है. उन्होंने कहा कि जरूरी सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए और ज्यादा प्रयास किए जाने चाहिए.
ये प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि पुर्तगाल में लोग आवास की बढ़ती लागत को लेकर लगातार नाराज हो रहे हैं. यह यूरोप भर में चल रहे आवास अधिकार आंदोलनों का हिस्सा है. इसी तरह के प्रदर्शन की जद में बेल्जियम, इटली, स्पेन और फ्रांस हैं.
इटली में हिंसा बर्दाश्त नहीं- मेलोनी
वहीं इटली में भी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की सरकार के विरोध में छात्र, शिक्षक और ट्रेड यूनियन सड़कों पर उतर आए हैं, रोम सहित कई शहरों में स्कूलों पर कब्जा और पुलिस से झड़पें हुई हैं.
इटली में महंगाई और बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ जनआक्रोश फूट पड़ा है. प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के विरोध में छात्र, शिक्षक और ट्रेड यूनियन सड़कों पर उतर आए हैं, रोम सहित कई शहरों में स्कूलों पर कब्जा और पुलिस से झड़पें हुई हैं.
फ्रांस-24 की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस और स्पेन में हुए आंदोलनों से प्रेरित कई अलग-अलग विरोध प्रदर्शन इन दिनों इटली में हो रहे हैं. इन सभी का एक साझा मकसद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार का विरोध है.
प्रधानमंत्री मेलोनी ने देश में हो रहे इन प्रदर्शनों की निंदा की और कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि इन घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर लिखा, 'शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले हजारों लोगों के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है. इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो सीजीआईएल की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जिसमें वामपंथी नेताओं ने भी हिस्सा लिया. लोग किसी भी विचार या मांग के लिए प्रदर्शन करें, लेकिन लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी होती है.’
PM मेलोनी ने कहा कि इटली के कुछ अन्य शहरों में जो हुआ, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मिलान में पुलिस और सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके गए, कई अधिकारी घायल हुए और तोड़फोड़ व हिंसा की घटनाएं हुईं. हालात इतने बिगड़ गए कि जुलूस को बीच में ही रोकना पड़ा.
हिंसा के बीच बंद करना पड़ा रेलवे स्टेशन
ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और खिड़कियां तोड़ने वाले हथौड़ों के साथ रोका गया. वहीं बोलोन्या में हुई हिंसा और हंगामे की वजह से रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद करना पड़ा. कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाते हैं, सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे लोगों पर हमला करते हैं और पूरे शहर को परेशान कर देते हैं.
उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, 'प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन अपने शहरों को हिंसा और आगजनी की भेंट चढ़ाना कोई अधिकार नहीं है.’
विपक्ष से की अपील
PM मेलोनी ने कहा, 'मैं विपक्षी दलों से फिर अपील करती हूं कि इस मुद्दे पर कोई अस्पष्टता न रखें. इन हिंसक घटनाओं की साफ और खुलकर निंदा करें और हर प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की स्पष्ट अपील करें. ऐसे दृश्य देखकर हर किसी को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए.
जेडी वेंस ने लिबरल्स को दी चेतावनी
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन और ऐतिहासिक इमारत में आगजनी की घटनाओं का हवाला देते हुए पश्चिमी देशों की उदारवादी नीतियों और आव्रजन व्यवस्था की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया, ‘विविधता और करुणा’ के नाम पर अपनाई गई नीतियों में प्रवासियों के स्थानीय समाज में समायोजन और सांस्कृतिक अनुकूलता जैसे महत्वपूर्ण सवालों की अनदेखी की गई.
वेंस ने कहा, ‘पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर फ्रांस और दूसरे देशों में ‘तीसरी दुनिया’ को अपने यहां जगह दी. इन नीतियों के संभावित परिणामों को लेकर पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन संबंधित नेताओं ने उन पर ध्यान नहीं दिया.’
उन्होंने फ्रांस को एक खूबसूरत देश और वहां के लोगों को अद्भुत बताते हुए उम्मीद जताई कि देश इस स्थिति को रोकने के लिए कदम उठाएगा ताकि उसके और ऐतिहासिक स्थलों को आग से नुकसान न पहुंचे.
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस मुद्दे को अमेरिकी राजनीति से भी जोड़ा. उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से फ्रांस की घटनाओं पर ध्यान देने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि ‘अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सांसद भी अपने देश को इसी दिशा में ले जाना चाहते हैं.’