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US मिडटर्म इलेक्शन में भारतीयों ने मनवाया अपना लोहा, 30 से ज्यादा भारतवंशी जीते, ट्रंप को सिखाया सबक

US MidTerm Election: भारत विरोधी नीतियों का खामियाजा ट्रंप को भुगतना पड़ा है. भारतवंशियों ने साफ कर दिया है कि वे उसी का साथ देंगे, जो उनके देश का सम्मान और उनके हितों की रक्षा करेगा. भारतीय मूल के उम्मीदवारों, वोटर्स ने ट्रंप से अपमान का बदला ले लिया है.

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05 Nov 2026
( Updated: 05 Nov 2026
01:29 PM )
US मिडटर्म इलेक्शन में भारतीयों ने मनवाया अपना लोहा, 30 से ज्यादा भारतवंशी जीते, ट्रंप को सिखाया सबक
Image Source-IANS
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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का जोरदार प्रदर्शन रहा है. भारतवंशियों ने अपने प्रदर्शन से अमेरिकी कांग्रेस में डंका बजा दिया है. इतना ही नहीं इस बार प्रवासी भारतीयों ने ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को तगड़ा सबक सिखाया है. उन्होंने अपनी ताकत का भी एहसास कराया है. ट्रंप की ओर से लगातार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और अपने ही दोस्त और पार्टनर भारत का अपमान, पाकिस्तान, आसिम मुनीर की तारीफ, आतंकी देश की पैरोकारी, 100% टैरिफ की धमकी लगाने का बदला ले लिया.

अमेरिकी चुनाव में भारतीयों ने लिया ट्रंप से अपमान का बदला!

इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर ये रहा कि भारतवंशियों ने रिपब्लिकन का साथ छोड़ दिया और डेमोक्रेटिक पार्टी का साथ दिया. इसी का नतीजा रहा कि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत खो बैठी. इतना ही नहीं जो भारतीय डेमोक्रेट्स के साथ थे वो जीते, लेकिन जो भारतवंशी रिपब्लिकन के साथ थे, जिनका खुद ट्रंप ने साथ दिया, समर्थन किया था, सब हार गए. भारतीय बनाम भारतीय वाली सीट पर भी जीत डेमोक्रेट्स की हुई. ऐसा इसलिए भी क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर्स, ट्रंप समर्थक, खुद ट्रंप और मंत्रियों की ओर से भारत विरोधी बयान दिए गए और नीतियां अपनाई गईं. जाहिर है इसका खामियाजा ट्रंप को भुगतना पड़ा.

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ट्रंप की बयानबाजी और नीतियों का दिखा असर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप की ओर से लगातार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और अमेरिका के रणनीतिक साझीदार भारत के खिलाफ की गई बयानबाजी रिपब्लिकन पार्टी को भारी पड़ी है. चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप द्वारा भारत पर 100% टैरिफ लगाने की धमकियां देना, पाकिस्तान के प्रति उनका नरम रुख, और उनके करीबियों द्वारा दिए गए भारत विरोधी बयानों ने भारतीय मूल के वोटर्स को बुरी तरह नाराज कर दिया. इसी का बदला भारतीय डायस्पोरा (Indian Diaspora) ने वोट की चोट से लिया है.

डेमोक्रेट्स की ऐतिहासिक जीत, रिपब्लिकन दोनों सदनों से आउट

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इस चुनाव का सबसे बड़ा फैक्टर यह रहा कि भारतवंशियों ने रिपब्लिकन पार्टी का साथ पूरी तरह छोड़ दिया और डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में बंपर वोटिंग की. इसी छिटकाव और नाराजगी का नतीजा रहा कि डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स—दोनों ही सदनों में अपना बहुमत खो बैठी और डेमोक्रेट्स ने ऐतिहासिक वापसी की.

'भारतीय बनाम भारतीय' में भी ट्रंप समर्थकों की करारी हार

इन चुनावों में सबसे दिलचस्प मुकाबला उन सीटों पर रहा, जहां भारतीय मूल के उम्मीदवार ही आमने-सामने थे या जहां भारतवंशियों ने ट्रंप की विचारधारा का समर्थन किया था. नतीजे साफ बताते हैं कि जो भारतीय डेमोक्रेट्स के साथ थे, उन्होंने शानदार जीत दर्ज की. वर्जीनिया से सुहास सुब्रमण्यम और फ्लोरिडा से पिया डांडिया ने डेमोक्रेटिक टिकट पर बड़ी जीत हासिल की, वहीं मैरीलैंड में अरुणा मिलर ने लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर फिर से कब्जा जमाया.

30 से ज्यादा भारतवंशियों की हुई जीत

आपको बता दें कि अमेरिका में मंगलवार को हुए मध्यावधि चुनावों में कम से कम 30 भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों के राज्य विधानसभाओं की सीटें जीतने के बाद भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता दो राज्यों मिशिगन और एरिजोना की विधानसभाओं का नेतृत्व करने की स्थिति में पहुंच गए हैं. 

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कौन-कौन भारतवंशी अमेरिकी चुनाव में रहा विजयी?

मिशिगन में रंजीव पुरी ने 24वें जिले से लगभग 66 प्रतिशत वोट हासिल कर दोबारा जीत दर्ज की. डेमोक्रेटिक पार्टी के राज्य विधानसभा में फिर से बहुमत हासिल करने और राज्य सरकार पर पूर्ण नियंत्रण पाने के बाद उनका कद और मजबूत हुआ है. 24वें जिले से लगभग 66 प्रतिशत वोट हासिल कर दोबारा जीत दर्ज की. डेमोक्रेटिक पार्टी के राज्य विधानसभा में फिर से बहुमत हासिल करने और राज्य सरकार पर पूर्ण नियंत्रण पाने के बाद उनका कद और मजबूत हुआ है.

चुनाव जीतने के बाद रंजीत पुरी ने कहा, मिशिगन की जनता ने अपनी आवाज बुलंद कर दी और साफ कह दिया कि अब बहुत हो चुका. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को राज्य विधानसभा (हाउस) में बहुमत देकर अपना फैसला सुना दिया है.

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एरिजोना में सीनेट अल्पसंख्यक नेता प्रिया सुंदरेशन ने 18वें जिले से लगभग 66 प्रतिशत वोट हासिल कर दोबारा जीत दर्ज की. एरिजोना सचिवालय के अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने राज्य की दोनों विधानमंडलीय सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. डेमोक्रेटिक लेजिस्लेटिव कैंपेन कमेटी ने इसे 1960 के दशक के बाद पहली बार राज्य में डेमोक्रेटिक ट्राइफेक्टा (गवर्नर और दोनों सदनों पर एक ही पार्टी का नियंत्रण) बताया है.

हालांकि सुंदरेशन भविष्य में कौन सा पद संभालेंगी, यह अभी तय नहीं हुआ है. द सेंटर स्क्वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, वह सीनेट प्रेसीडेंट पद के लिए दावेदारी पेश करने की तैयारी में हैं, जिसके लिए डेमोक्रेटिक कॉकस के वोट की आवश्यकता होगी. सुंदरेशन ने द सेंटर स्क्वायर से कहा, "हमें पूरा भरोसा है कि जनवरी तक हमारे पास ट्राइफेक्टा होगा."

उधर लॉस एंजिलिस में मेयर पद की दौड़ में नित्या रमन बढ़त बनाए हुए हैं. अनुमानित कुल मतों के लगभग दो-तिहाई की गिनती के बाद रमन को करीब 52 प्रतिशत (4.05 लाख) और मौजूदा मेयर करेन बैस को लगभग 48 प्रतिशत (3.79 लाख) वोट मिले हैं.

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इस तरह रमन करीब 27,000 वोटों से आगे चल रही हैं, हालांकि प्रमुख अमेरिकी मीडिया नेटवर्क्स ने अभी इस मुकाबले का नतीजा घोषित नहीं किया है. रिपोर्टों के अनुसार, बैस को शेष लगभग 3.94 लाख वोटों में से करीब 53 प्रतिशत वोट हासिल करने होंगे, तभी वह रमन की बढ़त को पलट सकेंगी. बुधवार की शुरुआत में करेन बैस मामूली बढ़त पर थीं, लेकिन बाद में नित्या रमन ने उन्हें पीछे छोड़ दिया.

मारिसा रॉय सिटी अटॉर्नी पद पर जीतीं!

लॉस एंजिलिस में इसी चुनाव के दौरान मारिसा रॉय को सिटी अटॉर्नी पद के रनऑफ चुनाव का विजेता माना गया. फॉक्स इलेवन के अनुमान के अनुसार लॉस एंजिलिस काउंटी के मतगणना आंकड़ों के आधार पर उन्होंने जॉन मैककिनी के मुकाबले लगभग 66 प्रतिशत वोट हासिल किए.

जॉर्जिया में ज्योत सिंह की भी जीत!

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दक्षिणी अमेरिका के दो नए भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने भी ऐसी जीत दर्ज की, जिन्हें उनके समर्थक ऐतिहासिक बता रहे हैं. ज्योत सिंह ने जॉर्जिया के 97वें हाउस जिले से करीब 68 प्रतिशत वोटों के साथ जीत दर्ज की. उन्हें लगभग 13,800 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को करीब 6,500 वोट प्राप्त हुए.

भारतीय-अमेरिकी संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के अनुसार, ज्योत सिंह जॉर्जिया राज्य विधानमंडल के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी और पहले सिख-अमेरिकी हैं. 

टेक्सास में पूजा सेठी जीतीं!

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टेक्सास में पूजा सेठी ने 47वें हाउस जिले की सीट पर जीत हासिल की. उन्हें लगभग 63 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को करीब 33,300 वोट प्राप्त हुए. सेठी को लगभग 57,500 वोट मिले.

सेठी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि वह टेक्सास विधानमंडल के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला और पहली एशियाई-अमेरिकी डेमोक्रेटिक महिला हैं.

भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने कई सीटों पर अपनी पार्टी की स्थिति भी मजबूत की. नबीला सैयद ने इलिनोइस के 26वें सीनेट जिले में रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्बी हिल्स को लगभग 57 प्रतिशत बनाम 43 प्रतिशत वोटों से हराकर सीट डेमोक्रेट्स के पक्ष में कर दी.

यह इलिनोइस की सबसे महंगी विधानसभा चुनावी लड़ाइयों में से एक थी. ट्रांसपेरेंसीयूएसए के अनुसार, अक्टूबर तक नबीला सैयद ने लगभग 32 लाख डॉलर का चुनावी चंदा जुटाया था, जबकि हिल्स ने करीब 15 लाख डॉलर जुटाए थे.

न्यूयॉर्क के 39वें सीनेट जिले में लीसा कौल ने रिपब्लिकन रॉब रोलिसन को लगभग 55 प्रतिशत बनाम 45 प्रतिशत वोटों से हराकर जीत हासिल की.

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आयोवा के 47वें सीनेट जिले में निखिल वागले करीब 32,000 वोटों में से लगभग 150 वोटों की मामूली बढ़त के साथ रिपब्लिकन सीनेटर स्कॉट वेबस्टर से आगे चल रहे थे.

वहीं इंडियाना में रंजन रोहतगी ने जिला-बी से लगभग 57 प्रतिशत वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की और सेंट जोसेफ काउंटी काउंसिल पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इलिनोइस में राम विलिवालम भी जीते!

इलिनोइस में राम विलिवालम लगभग 73 प्रतिशत वोटों के साथ राज्य सीनेट के लिए दोबारा चुने गए, जबकि केविन ओलिकल हाउस सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए. वहीं, सबा हैदर ने 84वें हाउस जिले की ओपन सीट पर लगभग 71 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की. नॉर्थ कैरोलिना के 15वें सीनेट जिले से जय चौधरी ने करीब 75 प्रतिशत वोट प्राप्त कर जीत हासिल की.

अन्य विजेताओं में पेंसिल्वेनिया के अरविंद वेंकट (63 प्रतिशत), ओहायो की अनीता सोमानी (71 प्रतिशत), कनेक्टिकट की सुजाता गाडकर-विलकॉक्स (65 प्रतिशत), न्यूयॉर्क के जेरेमी कूनी (67 प्रतिशत, चौथा कार्यकाल) और विस्कॉन्सिन की रेणुका मायादेव (90 प्रतिशत) शामिल हैं.

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कैलिफोर्निया में ऐश कालरा ने रिपब्लिकन हिमत सिंह बैनीवाल को हराते हुए लगभग 73 प्रतिशत वोट प्राप्त किए. वहीं वॉशिंगटन में मांका ढींगरा ने करीब 92 प्रतिशत वोटों के साथ जीत दर्ज की.

कुछ उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए. इनमें मेगन श्रीनिवास (आयोवा), नीमा कुलकर्णी (केंटकी), रूबेन डी'सिल्वा (नेवादा), रीना श्चेपांस्की (न्यू मैक्सिको) और वंदना स्लैटर (वॉशिंगटन) शामिल हैं. वर्मोंट में केशा राम हिन्सडेल और नवोदित निखिल गोयल ने बहु-सदस्यीय सीनेट जिलों से जीत हासिल की. मिनेसोटा के 49वें सीनेट जिले से कृष सुब्रह्मणियन ने लगभग 63 प्रतिशत वोटों के साथ जीत दर्ज की, जबकि मैरीलैंड के 39वें सीनेट जिले से अमर मुकुंदा निर्विरोध चुने गए.

रिपब्लिकन पार्टी के दो भारतीय-अमेरिकी विधायक भी अपनी सीटें बचाने में सफल रहे. टेनेसी के 66वें हाउस जिले से साबी "डॉक" कुमार ने लगभग 66 प्रतिशत वोटों के साथ जीत दर्ज की, जबकि न्यूयॉर्क के 105वें असेंबली जिले से अनिल बीफन करीब 54 प्रतिशत वोटों के साथ विजयी रहे.

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कैलिफोर्निया के 76वें असेंबली जिले में दर्शना पटेल लगभग 59 प्रतिशत वोटों के साथ आगे चल रही थीं, जबकि न्यू हैम्पशायर के हिल्सबोरो-11 जिले में मनोज चौरसिया की जीत की संभावना जताई गई.

अरुणा मिलर फिर से उप-राज्यपाल पद के लिए चुनी गईं!

राज्यव्यापी चुनावों में अरुणा मिलर ने गवर्नर वेस मूर के साथ मैरीलैंड की उप-राज्यपाल के रूप में दोबारा जीत हासिल की. वहीं भारतीय मूल के प्रवासी के बेटे जोश कौल ने लगभग 55 प्रतिशत वोटों के साथ तीसरी बार विस्कॉन्सिन के अटॉर्नी जनरल का चुनाव जीता. उन्होंने कहा, "विस्कॉन्सिन में यह चुनाव पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है."

हालांकि सभी भारतीय मूल के उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली. विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार गए. उन्हें लगभग 44 प्रतिशत वोट मिले, जबकि एक्टन को 52 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. सरिता कोमाटिरेड्डी भी न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल का चुनाव हार गईं.

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डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों में हरजोत सिंह (न्यूयॉर्क सीनेट जिला-2, लगभग 46 प्रतिशत वोट), संदीप श्रीवास्तव (टेक्सास हाउस जिला-66, लगभग 45 प्रतिशत वोट), ज्योति मोहन (मैरीलैंड हाउस जिला-42ए, लगभग 40 प्रतिशत वोट) और निशा लोढ़ाविया (डेलावेयर सीनेट जिला-15, लगभग 43 प्रतिशत वोट) को रिपब्लिकन उम्मीदवारों के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

लोकल लेवल पर भी भारतीयों का बजा डंका!

स्थानीय स्तर पर भी भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं. सिम गिल ने साल्ट लेक काउंटी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी का चुनाव लगभग 66 प्रतिशत वोटों के साथ जीता. वहीं, मोना सिंह वेक काउंटी की एट-लार्ज आयोग सीट की दौड़ में सबसे आगे रहीं और सिल्की जोशी-मलिक ने हैरिस काउंटी शिक्षा बोर्ड की सीट पर करीब 63 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की.

वेस्टचेस्टर काउंटी के विधायक अनंत नांबियार निर्विरोध चुने गए

ओकलैंड की काउंसिल सदस्य जननी रामचंद्रन और वेस्टचेस्टर काउंटी के विधायक अनंत नांबियार निर्विरोध चुने गए. वहीं, रोहित मल्होत्रा ने फुल्टन काउंटी आयोग की सीट जीत ली, हालांकि सभी उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली.

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रैंचो कुकामोंगा में मेयर पद के उम्मीदवार जसकिरत सोंध और मिलपीटास में संतोष साहू तीसरे स्थान पर रहे. जग नागेंद्र लगभग 40 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद फोल्सम सिटी काउंसिल का चुनाव हार गए, जबकि मनीषा पाठक फ्रेमोंट सिटी काउंसिल की शुरुआती मतगणना में पीछे चल रही थीं.

भारतीयों की बंपर स्ट्राइक रेट!

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IANS की सूची में शामिल 41 भारतीय-अमेरिकी स्टेट लेजिस्लेटिव कैंडिडेंट्स में से 30 ने जीत दर्ज की, दो उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं और नौ उम्मीदवार हार गए. भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने घोषित हो चुके 33 मुकाबलों में से 28 में जीत हासिल की, जो लगभग 85 प्रतिशत की सफलता दर है.

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आईएएनएस की सूची में शामिल सभी भारतीय-अमेरिकी मौजूदा विधायक, जिन्होंने पुनर्निर्वाचन का चुनाव लड़ा, दोबारा जीतने में सफल रहे. 30 विजेताओं में से आठ उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि 15 महिलाएं हैं. सबसे अधिक चार विजेता इलिनोइस से रहे, इसके बाद न्यूयॉर्क से तीन तथा वॉशिंगटन और वर्मोंट से दो-दो उम्मीदवार विजयी रहे.

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