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भारत की ओर दौड़ा चला आया पाकिस्तान का दोस्त देश, जयशंकर के अजरबैजान दौरे में कमाल, आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेगा?

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफदारी करने वाला अजरबैजान अब भारत से दोस्ती बढ़ाना चाह रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर के दौरे में आतंकवाद से लड़ाई, स्थिरता, अर्थव्यवस्था से लेकर पर्यटन तक को लेकर कई मुद्दों पर बात हुई.

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24 Oct 2026
( Updated: 24 Oct 2026
12:12 PM )
भारत की ओर दौड़ा चला आया पाकिस्तान का दोस्त देश, जयशंकर के अजरबैजान दौरे में कमाल, आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेगा?
Image Source: X/ @DrSJaishankar
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पाकिस्तान के खेमे का देश माने जाने वाला अजरबैजान भारत से दोस्ती और कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करना चाह रहा है. बाकू में विदेश मंत्री एस जयशंकर की अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव से द्विपक्षीय मुलाकात हुई. इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अजरबैजान के साझा हित शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने में हैं. उन्होंने आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता को दोनों देशों का ‘साझा दुश्मन’ बताया.

भारत से संबंधों की बहाली चाह रहा अजरबैजान!

अजरबैजान की राजधानी बाकू में विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य देते हुए जयशंकर ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने का रास्ता खुलेगा. उन्होंने दोहराया कि भारत का स्पष्ट रुख है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए.

विदेश मंत्री एस जयशंकर के अजरबैजान दौरे में बड़ी प्रगति! 

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अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव ने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बाकू दौरे को ‘बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात’ बताते हुए विश्वास जताया कि भारत और अजरबैजान के संबंध ‘नई ऊंचाइयों’ की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और परिवहन गलियारों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं.

पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करता रहा है अजरबैजान!

आपको बता दें कि ये वही अजरबैजान है जिसने हमेशा से कश्मीर और दूसरे मुद्दों पर गाहे-बगाहे पाकिस्तान का साथ दिया और उसके रुख का साथ दिया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी अजरबैजान ने तुर्की के साथ मिलकर भारत की पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की निंदा की थी. यहां तक कि अजरबैजान की ओर से बयान भी जारी हुआ था, जिस पर भारत ने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी.

जयशंकर के साथ मुलाकात के बाद बैरामोव ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लंबी, सकारात्मक और सार्थक बातचीत हुई. इसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की गई. बैरामोव ने कहा कि जयशंकर का यह दौरा पिछले महीने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के बीच हुई मुलाकात की स्वाभाविक अगली कड़ी है.

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भारत और अजरबैजान के बीच 600 मिलियन डॉलर का व्यापार!

आर्थिक संबंधों का उल्लेख करते हुए अजरबैजान के विदेश मंत्री ने बताया कि इस साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 600 मिलियन डॉलर रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दोनों देशों के बीच व्यापार की वास्तविक संभावनाओं को पूरी तरह नहीं दर्शाता. उन्होंने बताया कि भारत की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने अजरबैजान की एक प्रमुख तेल एवं गैस परियोजना में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. इसके अलावा, अजरबैजान में 1,000 से अधिक भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं.

बैरामोव ने ऊर्जा, कृषि और फार्मास्यूटिकल्स को दोनों देशों के बीच सहयोग के संभावनाशील क्षेत्र बताया. उन्होंने कहा कि अजरबैजान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण मार्गों को जोड़ने वाले परिवहन गलियारों में भी सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं.

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बाकू और दिल्ली के बीच दो सीधी उड़ानें

भारत और अजरबैजान के बीच लोगों के आपसी संपर्क का जिक्र करते हुए बैरामोव ने बताया कि फिलहाल बाकू और दिल्ली के बीच दो सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं. इस साल लगभग 500 भारतीय छात्रों ने अजरबैजान के विश्वविद्यालयों में दाखिला लिया है. वहीं, पिछले कुछ वर्षों में 30 से अधिक भारतीय फिल्मों की शूटिंग अजरबैजान में हुई है.

अजरबैजान के विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों नेताओं ने दक्षिण काकेशस की स्थिति, आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया, मध्य पूर्व में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा की. बैरामोव ने कहा, "हमारा मानना है कि यह दौरा और विभिन्न मुद्दों पर हुई बातचीत दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी."

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वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगे कहा कि, “हम इस क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर सावधानीपूर्वक नजर रख रहे हैं. हम पिछले साल अगस्त में अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे स्थायी शांति स्थापित होगी. भारत का स्पष्ट रुख है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए.”


उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, यूरोप और यूरेशिया के घटनाक्रमों पर चर्चा हुई. साथ ही, इन संघर्षों के वैश्विक प्रभावों का आकलन किया गया. उन्होंने कहा कि इन संघर्षों के कारण वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की अर्थव्यवस्थाओं के सामने खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पैदा हुई हैं.

आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता पर भी हुई बात!

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अजरबैजान के बीच शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने के साझा हित हैं. आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता दोनों देशों के साझा दुश्मन हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों में सुधार तथा उनके विस्तार पर भी चर्चा का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को समकालीन जरूरतों के अनुरूप और अधिक प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता है.

जयशंकर ने कहा कि बैरामोव के साथ उनकी बातचीत काफी उपयोगी रही और इससे दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा तय करने में मदद मिली है. उन्होंने अजरबैजान के विदेश मंत्री को सुविधानुसार जल्द भारत आने का निमंत्रण भी दिया.

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जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. इसमें व्यापार, निवेश और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और ऐसे में द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं. दोनों पक्षों ने विभिन्न गतिविधियों और आपसी आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की.

विदेश मंत्री ने वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था में कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत और अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) से जुड़े हुए हैं. इस परियोजना में ईरान की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इस गलियारे के संबंध में आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई है. हवाई संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.

जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिदिन उड़ानें संचालित होती हैं, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए हवाई संपर्क के विस्तार की संभावनाओं पर विचार करना होगा.

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ईरान संघर्ष के दौरान भारतीयों की वापसी में अजरबैजान ने की थी मदद!

जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान ईरान से भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों को निकालने में अजरबैजान की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “अजरबैजान में हमारे भारतीय छात्र हैं. मैं उनकी जिस देखभाल और संवेदनशीलता के साथ आप देखभाल करते हैं, उसके लिए आपको धन्यवाद देना चाहता हूं. इस साल की शुरुआत में ईरान में संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों को वहां से निकालने में आपकी सहायता के लिए भी मैं विशेष रूप से आभार व्यक्त करना चाहता हूं.”

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जयशंकर और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की हुई मुलाकात

इससे पहले, जयशंकर ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की. उन्होंने इस बातचीत को केंद्रित और भविष्य की दिशा तय करने वाली बताया. जयशंकर ने कहा कि बाकू पहुंचने के तुरंत बाद उन्होंने राष्ट्रपति अलीयेव से मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं. उन्होंने बताया कि बैठक में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई. इसमें मौजूदा सहयोग, सहयोग के नए क्षेत्रों और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने की संभावनाओं पर विचार किया गया.

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जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर रणनीतिक दृष्टिकोण से भी विचारों का आदान-प्रदान किया. उन्होंने कहा कि भारत और अजरबैजान दोनों स्वतंत्र सोच वाले देश हैं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने फैसले स्वयं लेते हैं. विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की संस्कृति और मूल्यों का सम्मान करते हैं, जो आधुनिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए एक अच्छी नींव प्रदान करता है.

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