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केरल के लाल गढ़ में लहराया भगवा, ABVP ने उखाड़ फेंका वामपंथियों का 40 साल पुराना किला, SFI का सफाया!

केरल में एक बार फिर भगवा लहराया है. ABVP ने वामपंथियों का क़रीब 40 साल पुराना किला उखाड़ फेंका है. DU के बाद अब त्रिपुनिथुरा में गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज यूनियन का चुनाव भी जीत लिया है और लेफ्ट स्टूडेंट संगठन SFI का सफाया कर दिया है.

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24 Sep 2026
( Updated: 24 Sep 2026
01:29 PM )
केरल के लाल गढ़ में लहराया भगवा, ABVP ने उखाड़ फेंका वामपंथियों का 40 साल पुराना किला, SFI का सफाया!
Image Source: X / @ABVPVoice
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एक ओर जहां Gen-Z के नाम पर देश में तीखी राजनीति हो रही है, पक्ष-विपक्ष की ओर से नैरेटिव गढ़ा जा रहा था, और इनके समर्थन के लिए 'छात्रों की गूंज', 'जेन-जी मेगा शो' किया जा रहा है. जिस वक्त UGC विवाद और आरक्षण के नाम पर सड़कों को सुलगाने की साजिशें रची जा रही थीं, ठीक उसी वक्त भारत के युवाओं ने वामपंथ के सबसे अभेद्य किले पर करारा प्रहार किया. ये ऐसा झटका है जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है.

केरल में ABVP ने फहराया जीत का परचम, SFI का सफाया!

केंद्र की सत्ता से मोदी सरकार को बेदखल करने के लिए जब विपक्ष पूरी कोशिशें कर रहा है, युवाओं को कथित तौर पर भ्रमित करके देश विरोधी एजेंडों की आग में झोंकने की चालें चली जा रही थीं, ठीक उसी वक्त लेफ्ट की प्रयोगशाला माने जाने वाले केरल के युवाओं ने अपनी सोच से पूरे वामपंथी ईकोसिस्टम को हिलाकर रख दिया है.

पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी में DUSU का रण और अब लाल झंडे के सबसे पुराने गढ़, केरल की ज़मीन पर ABVP ने ऐतिहासिक जीत का वो झंडा गाड़ा है, जिसने 45 साल पुराने लाल किले को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया है. वामपंथी छात्र संगठन SFI, जो दशकों से केरल के परिसरों पर अपना एकछत्र राज समझता था, उसका 12-0 से सूपड़ा साफ हो चुका है. यानी कि केरल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कोच्चि के त्रिपुनिथुरा में गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज यूनियन का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है. कॉलेज यूनियन चुनाव में सभी सीटें जीतकर ABVP ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) को हरा दिया. उमर खालिद जैसे लेफ्ट विंग के चेहरों के लिए घड़ियाली आंसू बहाने वालों, देश के टुकड़ों का सपना देखने वालों और डफली बजाकर झूठा माहौल बनाने वाले गिरोह को देश के असली Gen-Z ने शून्य पर आउट कर दिया है.

आखिर कैसे वामपंथ का 40 साल पुराना वर्चस्व एक झटके में ध्वस्त हो गया?

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कोच्चि के त्रिपुनिथुरा स्थित प्रतिष्ठित गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने वो कर दिखाया जो बीते 45 सालों में कभी नहीं हुआ था. दशकों से इस कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन पर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का एकतरफा कब्जा था. वामपंथी गुट इसे अपना गढ़ मानकर चलते थे, लेकिन इस बार के छात्र संघ चुनाव में जब नतीजे आए तो वामपंथी खेमे में सन्नाटा पसर गया. ABVP ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी 6 प्रमुख पदों समेत यूनियन की सभी 12 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. SFI का स्कोर पूरी तरह 0 रहा.

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वामपंथियों के 40 साल पुराने गढ़ का ये पतन केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि ये इस बात का सबूत है कि केरल की नई पीढ़ी यानी Gen-Z अब वामपंथी विचारधारा के एजेंडे को पूरी तरह नकारना शुरू कर चुकी है. इस ऐतिहासिक छात्र चुनाव की कड़ियों को अगर हम स्थानीय राजनीति से जोड़कर देखें, तो ये जीत एक बहुत बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करती है.

केरल में लहराने लगा भगवा?

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हाल ही में त्रिपुनिथुरा नगर पालिका चुनावों में BJP ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सत्ता की कमान संभाली थी. उस स्थानीय निकाय चुनाव ने वामपंथी दलों के 45 साल पुराने शासन का अंत किया था. ठीक उसी त्रिपुनिथुरा की ज़मीन पर नगर पालिका के बाद अब कॉलेज कैंपस में भी वामपंथ का 40 साल से चला आ रहा वर्चस्व पूरी तरह खत्म हो गया है.

भगवा ने हिला डाली लेफ्ट की ज़मीन!

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जो ज़मीन कभी वामपंथियों की सबसे महफूज़ पनाहगाह मानी जाती थी, वहां अब राष्ट्रवादी सोच का परचम लहरा रहा है. ये साफ दर्शाता है कि केरल का छात्र और युवा वर्ग अब राष्ट्रवाद, विकास और पारदर्शी व्यवस्था के पक्ष में खुलकर खड़ा हो चुका है. सोचिए, वामपंथी और विरोधी छात्र संगठनों ने देश के छात्रों को गुमराह करने के लिए क्या कुछ नहीं किया. कभी जेएनयू के मंचों से उमर खालिद और देश विरोधी तत्वों की पैरोकारी की गई, तो कभी आरक्षण और यूजीसी के मुद्दों को मोहरा बनाकर छात्रों को भड़काने की कोशिशें हुईं. बीजेपी के ख़िलाफ़ माहौल बनाने के लिए तमाम कोशिश की गई, ‘डफली गैंग' ने हर कॉलेज कैंपस को राजनीतिक जंग का मैदान बनाने की चाल चली, लेकिन केरल और दिल्ली के छात्रों ने साबित कर दिया कि वे किसी के एजेंडे का मोहरा नहीं बनेंगे.

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DU में लेफ्ट के साथ-साथ NSUI का किला भी ध्वस्त!

ऐसे में कहा जा सकता है कि नेहा बोरा और उनके समर्थक डफली गुटों का यह झूठा नैरेटिव धड़ाम हो गया जब मतदान के दिन छात्रों ने वामपंथी विचारधारा को सिरे से खारिज करते हुए ABVP के पक्ष में एकतरफा वोट डाला. देश के असली Gen-Z ने बता दिया कि उन्हें आंदोलनजीवी राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सुरक्षित भविष्य चाहिए.

क्या जेन-जी को बरगलाने की कोशिश हुई फेल?

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इससे पहले SFI ही नहीं बल्कि कांग्रेस की छात्र शाखा NSUI को भी छात्रों ने पूरी तरह नकार दिया और DU के अंदर वो भी सभी मुख्य सीटों पर चुनाव हार गई. DUSU के इन नतीजों ने साबित कर दिया कि उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक वामपंथी और विपक्षी एजेंडे की हवा निकल चुकी है. जो लोग Gen-Z को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ढाल बनाते थे, जो सोचते थे कि सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाकर युवाओं को भड़काया जा सकता है, उन्हें केरल और दिल्ली के इन नतीजों ने करारा जवाब दिया है. 45 साल पुराने वामपंथी गढ़ों का ढहना कोई साधारण बात नहीं है. ये भारत के युवाओं के ज़रिए हुए एक बुनियादी बदलाव की मुहर है.

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